25 जून 1983 यह वह दिन था, जिसने भारतीय क्रिकेट की दशा-दिशा बदल दी। आज ही के दिन ठीक 35 साल पहले भारतीय क्रिकेट ने अपना पहला विश्व कप जीत इतिहास रच दिया था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि कपिल देव की अगुवाई वाली यह टीम लगातार 2 विश्व कप जीत चुकी खूंखार वेस्टइंडीज को हरा पाएगी। इंग्लैंड में हुए इस विश्व कप ने भारतीय क्रिकेट की दशा-दिशा बदल दी।
आज उस ऐतिहासिक घटना को पूरे 35 साल बीत चुके हैं। इंग्लैंड में हुए उस विश्व कप में फाइनल तक का सफर तय कर टीम इंडिया ने पहले ही विश्व क्रिकेट को चौंका दिया था। खिताबी मुकाबला मजबूत वेस्टइंडीज से था। जानलेवा तेज गेंदबाजों और जबरदस्त बल्लेबाजों से भरी उस टीम की कप्तानी महान बल्लेबाज क्लाइव लॉयड कर रहे थे।
वेस्टइंडीज 1975 और 1979 का विश्व कप जीतते हुए विजयी रथ पर सवार थी। फैंस से लेकर दुनिया भर के तमाम एक्सपर्ट्स भी कैरेबियाई टीम के आगे भारतीय दल को हल्का आंक रहे थे। पहले बल्लेबाजी करते हुए 'क्रिकेट का मक्का' कहलाए जाने वाले लॉर्ड्स में इस फाइनल मुकाबले को लेकर सारी तैयारियां की जा चुकी थी। वेस्टइंडीज ने टॉस जीतकर टीम इंडिया को पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाया।
एंडी रॉबर्ट्स, जोएल गार्नर, मैल्कम मार्शल, माइकल होल्डिंग जैसे खूंखार तेज गेंदबाजों के सामने पूरी भारतीय टीम महज 183 रन पर सिमट गई। मैदान पर मौजूद भारतीय फैंस वापस लौटने लगे थे। खुद कपिल देव की पत्नी तक अपने होटल लौट गई। मगर आज भारतीय क्रिकेट टीम इतिहास रचने के इरादे से मैदान पर उतरी थी।
न जाने ड्रेसिंग रूम में कप्तान कपिल देव ने अपने खिलाड़ियों के कान में ऐसा कौन सा मंत्र फूंका कि गेंदबाजों ने कमाल दिखाते हुए वेस्टइंडीज को 140 रन पर ही समेट दिया। क्लाइव लॉयड, विवियन रिचर्ड्स, डेसमंड हेन्स जैसे दिग्गज बल्लेबाजों से लैस वेस्टइंडीज की टीम के 7 खिलाड़ी दहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच सके थे।