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RSS 24 को करेगा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, प्राचीन भारतीय परंपरा होगी पुनर्जीवित
सीमा शर्मा /अमर उजाला, नर्ई दिल्ली
Updated Tue, 13 Feb 2018 03:51 PM IST
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प्राचीनकाल से भारत शिक्षा ही नहीं, संस्कृति के दम पर भी विश्व को एक परिवार मानता था। भारतीय संस्कृति आपसी भाईचारे व प्रेमभाव के साथ प्रकृति को भी सहेजना का संदेश देती रही है।
इसी प्राचीन भारत की शिक्षा व संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 24 फरवरी से दिल्ली में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली करेंगे। खास बात यह है कि कार्यक्रम में पचास देशों के राजदूत या प्रतिनिधियों के साथ देशभर से 30 कुलपति भी मंच सांझा करेंगे।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनुराग मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली में दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन से दुनिया के सभी देशों से अशांति, स्वार्थ को छोड़कर दुनिया को ग्लोबल विलेज बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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इससे संस्कृतियों व विचारों का आदान-प्रदान होगा, जिससे आपसी भाईचारे की भावना को भी बढ़ाया जाएगा। सम्मेलन को 12 सेशन में विभाजित किया है, जिसमें विभिन्न विषयों पर संभाषण, सामूहिक विचार-विमर्श और शोध पत्रों की प्रस्तुति होगी।
अभी तक सौ से अधिक शोध पत्र मिल चुके हैं। इन पत्रों की एक स्मारिका में भी प्रकाशित किया जाएगा। सम्मेलन के निष्कर्षों को संकलित कर एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार होगा, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
कार्यक्रम में रेल मंत्री पीयूष गोयल, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, आरएसएस के अनिरुद्ध देशपांडे, बजरंग लाल गुप्ता समेत कई केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, संघ के बड़े अधिकारी समेत संघ से जुड़े संगठन भी शामिल होंगे।
बता दें कि कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कर रहा है,जोकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 48 अनुषांगिक संगठनों में से एक है।
इसके सदस्यों में 24 राज्यों के 35 राज्य स्तरीय संगठन और 100 से अधिक विश्वविद्यालयों के संगठन हैं, जोकि शिक्षा की दिशा और स्तर को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
सरकार की नीतियों को लेकर संघ से जुड़े संस्थान और संस्थाएं समय-समय पर ऐसे आयोजन करते रहे हैं जिन्हें सरकार के लिए दिशा निर्देश के तौर पर लिया जाता है।
इन विषयों पर होगी चर्चा
सभी का कल्याण, संस्कृतियों का विविधता में एकता, धारणक्षम विकास, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रगति के लिए सहयोग, सार्वभौमिक जीवन मूल्य, संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका, शिक्षा ज्ञान, विश्व शांति व आतंकवाद,विज्ञान-नैतिकता व ज्ञान, विश्व कल्याण में भारत की भूमिका मुख्य है।
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इसी प्राचीन भारत की शिक्षा व संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 24 फरवरी से दिल्ली में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली करेंगे। खास बात यह है कि कार्यक्रम में पचास देशों के राजदूत या प्रतिनिधियों के साथ देशभर से 30 कुलपति भी मंच सांझा करेंगे।
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कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनुराग मिश्रा के मुताबिक, दिल्ली में दो दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन से दुनिया के सभी देशों से अशांति, स्वार्थ को छोड़कर दुनिया को ग्लोबल विलेज बनाने पर जोर दिया जाएगा।
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इससे संस्कृतियों व विचारों का आदान-प्रदान होगा, जिससे आपसी भाईचारे की भावना को भी बढ़ाया जाएगा। सम्मेलन को 12 सेशन में विभाजित किया है, जिसमें विभिन्न विषयों पर संभाषण, सामूहिक विचार-विमर्श और शोध पत्रों की प्रस्तुति होगी।
अभी तक सौ से अधिक शोध पत्र मिल चुके हैं। इन पत्रों की एक स्मारिका में भी प्रकाशित किया जाएगा। सम्मेलन के निष्कर्षों को संकलित कर एक विजन डॉक्यूमेंट तैयार होगा, जिसे केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
कार्यक्रम में रेल मंत्री पीयूष गोयल, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा, आरएसएस के अनिरुद्ध देशपांडे, बजरंग लाल गुप्ता समेत कई केंद्रीय मंत्री, संसद सदस्य, संघ के बड़े अधिकारी समेत संघ से जुड़े संगठन भी शामिल होंगे।
बता दें कि कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ कर रहा है,जोकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 48 अनुषांगिक संगठनों में से एक है।
इसके सदस्यों में 24 राज्यों के 35 राज्य स्तरीय संगठन और 100 से अधिक विश्वविद्यालयों के संगठन हैं, जोकि शिक्षा की दिशा और स्तर को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
सरकार की नीतियों को लेकर संघ से जुड़े संस्थान और संस्थाएं समय-समय पर ऐसे आयोजन करते रहे हैं जिन्हें सरकार के लिए दिशा निर्देश के तौर पर लिया जाता है।
इन विषयों पर होगी चर्चा
सभी का कल्याण, संस्कृतियों का विविधता में एकता, धारणक्षम विकास, स्वास्थ्य, पर्यावरण, प्रगति के लिए सहयोग, सार्वभौमिक जीवन मूल्य, संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका, शिक्षा ज्ञान, विश्व शांति व आतंकवाद,विज्ञान-नैतिकता व ज्ञान, विश्व कल्याण में भारत की भूमिका मुख्य है।