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प्रदेश में जंगलों में गिरे और सूखे पेड़ों के लिए नई नीति तैयार

Tue, 07 Aug 2018 12:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 07 Aug 2018 12:48 PM IST
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HImachal Pradesh Forest dept make policy for salvage timber in state

प्रदेश सरकार ने राज्य के जंगलों में गिरे और सूखे पेड़ों (साल्वेज टिंबर) के लिए नई नीति तैयार की है। नीति बनने के बाद अब इन पेड़ों से न केवल सरकारी भवन और फर्नीचर तैयार होगा, बल्कि इसे इंधन के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा।

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यही नहीं, लड़की के इस तरह के इस्तेमाल से सरकार को आय भी होगी। हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में सरकार ने इस नीति को मंजूरी दी थी, जिसके बाद वन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी।
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अधिसूचना के तहत वन विभाग को विभागीय कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए निशुल्क लकड़ी उपलब्ध होगी। सूखे पेड़ हटाने के लिए वन निगम से बड़ी राशि मांगने वाले ठेकेदारों की मनमानी भी रुकेगी।
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वन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि नीति के अंतर्गत गैर किफायती टिंबर का इस्तेमाल लोक निर्माण, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, वन और वन निगम जैसे विभिन्न सरकारी विभागों के सरकारी भवनों और फर्नीचर बनाने के लिए प्रयोग होगा।

इससे जंगलों में इन पेड़ों के स्थान पर नई पौध भी तैयार हो सकेगी। इस काम को विभाग में तैनात चरानी करेंगे। पहले साल्वेज टिंबर को गैर किफायती मानकर जंगलों में ही छोड़ दिया जाता था।

इनाम में मिलेगी जंगल की लकड़ी

HImachal Pradesh Forest dept make policy for salvage timber in state

साल्वेज टिंबर को सरकार उन स्वयंसेवियों को बतौर इनाम देगी जो जंगलों में अकारण लगने वाली आग बुझाने में योगदान देंगे। वन मंत्री ने बताया कि ऐसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर विभाग इन पेड़ों से बढ़िया लकड़ी निकाल कर टीडी के तहत देगा।

इस लकड़ी का इस्तेमाल वन विश्राम गृहों, निरीक्षण गृहों, ट्रांजिट आवासों, वन प्रशिक्षण केंद्रों, सामुदायिक भवनों, संवाद केंद्रों, चिड़ियाघरों आदि के अलावा ईको टूरिज्म के संवर्धन और जंगलों में विभिन्न ट्रैक पर लगाए जाने वाले लकड़ी के छोटे पुलों के लिए भी इस्तेमाल होगा।

सूखे और गिरे पेड़ों के चलते नए पौधे तैयार नहीं हो पाते थे। बेशकीमती लकड़ी जंगलों में ही पड़ी सड़ जाती थी। जंगलों में आग लगने का भी यही मुख्य कारण होता है। विभाग को राजस्व का नुकसान होता है। नई नीति से इन सबसे से निजात मिलेगी।

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