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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Gyanvapi: The District Magistrate is the receiver of the deity present in the basement of Vyasji.

Gyanvapi : व्यासजी के तहखाने में विराजमान देवता के रिसीवर हैं जिलाधिकारी, निगरानी में तैयार हो रही है रिपोर्ट

Sat, 03 Feb 2024 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 03 Feb 2024 05:16 AM IST
सार

अपने स्थान पर पहुंचने के बाद भी जिलाधिकारी उनके रिसीवर हैं और उनके राग-भोग सहित हर पल की रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं।

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Gyanvapi: The District Magistrate is the receiver of the deity present in the basement of Vyasji.
Gyanvapi case - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी का तहखाने में विधि-विधान से विराजमान देवता हर पल जिलाधिकारी की निगरानी में हैं। अपने स्थान पर पहुंचने के बाद भी जिलाधिकारी उनके रिसीवर हैं और उनके राग-भोग सहित हर पल की रिपोर्ट तैयार करवा रहे हैं। जिला जज के आदेश पर ही ज्ञानवापी परिसर में मिली मूर्तियां और अन्य सामग्रियां जिलाधिकारी को सौंपी गई हैं। विराजमान होने के बाद भी प्रतिमाएं जिलाधिकारी की सुपुर्दगी में ही हैं। इससे पहले विद्वत परिषद ने तहखाने का नाम बदलकर ज्ञान तलगृह किया था।

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तलगृह में विराजमान देवता को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने सर्वे से प्राप्त किया था। 259 सामग्रियों को बतौर प्रमाण अदालत के आदेश पर जिलाधिकारी को सौंपा था। सर्वे के दौरान हनुमान की दो, विष्णु और गणेश की एक-एक, दो शिवलिंग और एक मकर प्रतिमा प्राप्त हुई थी। जिला जज की अदालत ने जिलाधिकारी को ज्ञानवापी स्थित तहखाने में पूजा-पाठ शुरू कराने का आदेश दिया तो मूर्तियों की पहचान एएसआई के सर्वे रिपोर्ट से कराई गई। इसके बाद कोषागार से ज्ञानवापी स्थित तहखाने तक प्रतिमाओं को लाने से पहले जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकरी प्रोटोकाल के बीच कागजी प्रक्रिया के साथ औपचारिकताओं का पालन कराया गया। अब विराजमान देवता जिलाधिकारी की सुपुर्दगी में रहकर राग भोग प्राप्त कर रहे हैं।
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अंजुमन के इन्कार के बाद कोषागार में जमा कराए गए प्रमाण
एएसआई सर्वे के दौरान प्राप्त प्रमाण और सामग्रियों को प्रशासन ज्ञानवापी परिसर में ही सुरक्षित रखवाना चाहता था। जिलाधिकारी ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी से इन्हें रखने के लिए जगह की मांग की थी। ताकि इन्हें सुरक्षित रखवाकर उस जगह को लॉक कर दिया जाए। मगर, मसाजिद कमेटी के इन्कार के बाद इन्हें कोषागार में रखवाया गया। तहखाने में पूजा शुरू होने से पहले मूर्तियों को कोषागार से आने में भी दो घंटे का समय लग गया था।
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अदालत के आदेश पर सुपुर्दगी वाली प्रतिमाओं का एएसआई की सर्वे रिपोर्ट से मिलान कराया गया, फिर उसे व्यासजी के तहखाने में रखवा कर पूजा शुरू कराई गई। प्रतिमाएं मेरी सुपुर्दगी में हैं। पूजा जारी है। अदालत का जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन कराया जाएगा।
- एस राजलिंगम, जिलाधिकारी

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