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Exclusive: यूरिया से जहरीला हो रहा भूजल, डायबिटीज-कैंसर का खतरा बढ़ा

Sat, 24 Nov 2018 09:06 PM IST
डीपी आर्य, अमर उजाला, मुरादाबाद
डीपी आर्य, अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Sat, 24 Nov 2018 09:06 PM IST
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Groundwater is becoming poisonous by use of urea in Moradabad
प्रतीकात्मक तस्वीर
खेतों में यूरिया के ज्यादा प्रयोग से भूजल जहरीला हो रहा है। यूरिया से नाइट्रोजन के पानी-हवा में मिलने से वह नाइट्रेट में बदल जाता है। इसके शरीर में पहुंचने से कई नाजुक अंगों की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं। इनके कारण लोगों में मधुमेह और कैंसर होने की आशंका बढ़ रही है। उर्वरकों और रसायनों की मात्रा बढ़ने से वेस्ट यूपी पर इसका खतरा ज्यादा है।
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भूजल में नाइट्रेट, नाइट्राइट और अमोनियम के रूप में नाइट्रोजन पहुंचती है। इसका मुख्य कारण यूरिया के ज्यादा प्रयोग, खुले में मल विसर्जन होने, डिस्टलरी तथा बूचड़खानों से ज्यादा मात्रा में नाइट्रोजन पहुंचती है। फसलों में कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग भी इसका मुख्य कारण है।
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देश में उप्र के साथ ही पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, तथा छत्तीसगढ़ का भूजल इसके कारण दूषित हो चुका है। उप्र में आजकल मेरठ, मुरादाबाद व सहारनपुर मंडलों पर नाइट्रेट का खतरा ज्यादा बढ़ा है।
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ऐसे करता है नुकसान

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. विवेक राज सिंह के अनुसार नाइट्रेट के शरीर में पहुंचने पर मुंह और आंतों में जीवाणु उसको नाइट्राइट में बदल देते हैं। इसके कारण रक्त में मौजूद हीमोग्लोबिन में मौजूद लौह तत्व फैरस (एफई-2 प्लस) को फैरिक (एफई-3 प्लस) में बदल देता है। इससे हीमोग्लोबिन मैथेमोग्लोबिन में बदल जाता है। इससे रक्त में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे शरीर के जहरीले रसायन बाहर नहीं निकल पाते हैं। इससे बच्चों में साइनोसिस और ब्ल्यू बेबी रोग हो जाता है।

ऐसे होती है बीमारी

यह नाइट्राइट दोबारा से एमीन, एमाइड तथा कार्बोमेट से क्रिया करके नाइट्रोसो यौगिक बनाता है। इससे कैंसर होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके कारण हृदय संवहनी तंत्र पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके कारण टाइप-1 श्रेणी की डायबिटीज होने के मामले सामने आ रहे हैं। नाइट्रेट के फ्री रेडीकल्स के कारण पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।

‘यूरिया का प्रयोग कम करना ही एक मात्र विकल्प बचा है। खुले में शौच की प्रवृति को तत्काल रोकना होगा। विभाग भूजल के सैंपल ले रहा है। उसके आधार पर इलेक्ट्रोडायलेसिस  से नाइट्रेट का अपनयन किया जाएगा। इसमें किसानों के सहयोग की जरूरत है।’- उप निदेशक कृषि रक्षा डा. एसएस यादव
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