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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Garhi Chaukhandi gang rape case: relatives do not reveal court decision to victim

गढ़ी चौखंडी गैंगरेप केसः परिजनों ने पीड़िता को नहीं बताया कोर्ट का फैसला

Sat, 25 Feb 2017 02:19 PM IST
अमित सिंह/अमर उजाला, नोएडा
अमित सिंह/अमर उजाला, नोएडा Updated Sat, 25 Feb 2017 02:19 PM IST
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Garhi Chaukhandi gang rape case: relatives do not reveal court decision to victim
court shimla

गढ़ी चौखंडी गांव में पांच जनवरी, 2009 को हुए बहुचर्चित गैंगरेप मामले के सभी आरोपी बरी हो चुके हैं। दिल्ली की सेशन कोर्ट ने सभी नौ आरोपियों को सबूतों के अभाव में 16 फरवरी को बरी कर दिया था।

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विदेश में नौकरी और पढ़ाई कर रही गैंगरेप पीड़िता को अभी इसकी जानकारी नहीं है। दिल्ली निवासी पीड़िता केजीजा ने बताया कि अभी उसे कोई जानकारी नहीं दी गई है। वे लोग खुद फैसले से सदमे में हैं। अब समझ नहीं पा रहे कि उसे कैसे इसकी जानकारी दी जाए। कोर्ट का आदेश आ गया है तो जल्द ही उसे इसकी सूचना देंगे। 
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जीजा के अनुसार वह लोग आठ साल से इंसाफ का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान कई बार पीड़िता विदेश से आकर जांच और कोर्ट की सुनवाई में शामिल हुई थी। शुरू से ही पूरा केस और सबूत उन लोगों के पक्ष में थे।
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मामले में नोएडा पुलिस के जांच अधिकारी ने काफी मेहनत की थी। बावजूद आरोपी कैसे बरी हो गए, ये उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है। जीजा ने कहा कि उन्हें न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है। वे लोग अब हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

इस संबंध में जल्द ही अपने वकील से भी सलाह लेंगे। केस की सरकारी वकील नीलम नारंग ने बताया कि उनकी तरफ से भी हाईकोर्ट में अपील करने के लिए सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

कार्रवाई के लिए एसएसपी को आदेश
दिल्ली कोर्ट ने गढ़ी चौखंडी गैंग रेप केस के आदेश में जांच अधिकारी अनिल समानिया पर सख्त टिप्पणी की है। अनिल समानिया उस वक्त थाना सेक्टर-39 के प्रभारी निरीक्षक थे। इसी थाने में पीड़िता केदोस्त ने गैंगरेप की एफआईआर कराई थी। कोर्ट ने कहा है कि जांच अधिकारी ने इस केस को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस केस में वास्तविक आरोपियों की पहचान नहीं करा सके। वहीं कानूनी प्रक्रिया का सही से पालन नहीं किया गया। इस वजह से इसको साबित कर पाना असंभव हो गया। इसके साथ ही कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के एसएसपी को जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच अधिकारी द्वारा की गई घोर लापरवाही को सटीक उदाहरण बताया है।


कोर्ट ने आरोपियों की पहचान को संदिग्ध माना
कोर्ट ने कहा कि गैंगरेप की वारदात रात के वक्त अंधेरे जंगल में हुई थी। ऐसे में पीड़िता द्वारा की गई आरोपियों की शिनाख्त संदिग्ध है। उसने कोर्ट में गवाही दर्ज कराने के दौरान आरोपियों की पहचान की थी। जांच अधिकारी ने जांच के दौरान मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जेल में आरोपियों की शिनाख्त परेड नहीं कराई थी। इसी तरह जांच अधिकारी ने आरोपियों से जो बरामदगी की है, उसकी भी सही से शिनाख्त नहीं कराई गई।

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