चंडीगढ़: धनतेरस पर मंगल और बृहस्पति की मित्रता फलदायक, प्रदोष काल (शाम 5.05 से 6 बजे तक) खरीदारी से मिलेगा लाभ
इस बार धनतेरस पर प्रदोष काल मेष लग्न में और कन्या राशि के अलावा हस्त नक्षत्र में पड़ रहा है। प्रदोष काल में खरीदारी करते हैं, तो यह लाभदायक रहेगी। धनतेरस पर मंगल और बृहस्पति की मित्रता भी शुभ है। आपको बता दें कि धनतेरस दो नवंबर को है। इसे भौम प्रदोष भी कहते हैं।
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विस्तार
इस साल धनतेरस पर मंगल और बृहस्पति की मित्रता अति शुभ फलदायक होगी, इसलिए प्रदोष काल में खरीदारी कीजिए। प्रदोष काल मेष लग्न और कन्या राशि के अलावा हस्त नक्षत्र में पड़ रहा है। यह बहुत ही शुभ है। यह कहना है श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री का। धनतेरस दो नवंबर दिन मंगलवार को है। इसे भौम प्रदोष भी कहते हैं। प्रदोष काल शाम पांच बजकर पांच मिनट से शाम छह बजे तक है। उन्होंने कहा कि मेष राशि का स्वामी मंगल है। चंडीगढ़ की राशि मीन है।
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इस दिन को माना जाता है शुभ
मीन का स्वामी बृहस्पति है। मंगल और बृहस्पति दोनों मित्र हैं, इसलिए इस वर्ष प्रदोष काल में की गई खरीदारी अति शुभ रहेगी। आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि कार्तिक महीने को त्योहारों का महीना कहा जाता है। धनतेरस भी इस महीने का एक मुख्य त्योहार है। खरीदारी के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। इसे धनत्रयोदशी अथवा धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी, एवं धन कुबेर की पूजा करने का विधान है। समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर इसी दिन प्रकट हुए थे। उन्होंने कहा कि इस दिन बर्तन खरीदना भी बहुत शुभ होता है। इस पर्व को धन एवं समृद्धि का कारक माना जाता है। सोना, चांदी, आभूषण आदि खरीदना भी समृद्धि का प्रतीक है।
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खाली बर्तन न लाएं घर में
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा-कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि विशेष बात यह है कि यदि बाजार से बर्तन खरीदकर लाएं, तो उसे खाली नहीं लाना चाहिए। उसमें मेवा, मिठाई, खील-पतासे इत्यादि डालकर ही घर पर लाना चाहिए।
डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विधान है। इसी दिन भगवान धन्वंतरि की जयंती को भी बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। विशेष तौर पर आयुर्वेद के विद्वान एवं वैद्य समाज की ओर से भगवान धन्वंतरि की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाती है। उनका श्रद्धापूर्वक पूजन किया जाता है। आरोग्य लाभ के लिए मंगल कामना की जाती है।
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यमराज के लिए दीपदान
इस दिन संध्याकाल में यमराज की प्रसन्नता के लिए यमदीप दान किया जाता है अर्थात् यमराज के लिए दीया जलाया जाता है।
पूजा का समय
धनत्रयोदशी या धनतेरस की पूजा का समय संध्याकाल यानी प्रदोष काल में ही होता है। 2 नवंबर को धनतेरस का पर्व होगा। 2 नवंबर को त्रयोदशी तिथि दोपहर 11 बजकर 31 मिनट पर प्रारंभ होगी। यह 3 नवंबर को सुबह 9 बजकर 02 मिनट पर समाप्त होगी, इसलिए 2 नवंबर को ही धनतेरस से संबंधित सभी कार्यक्रम होंगे।
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अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11.42 से दोपहर 12.26 बजे तक
गोधूलि पर्व
शाम 5 बजकर 05 मिनट से 6 बजे तक
वृष लग्न मुहूर्त
रात्रि 6.18 से रात्रि 8 बजकर 13 मिनट तक