फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   You get life once, you have to do something in it: Manu Bhaker

युवा दिवस: ओलंपियन निशानेबाज मनु भाकर का फलसफा-जीवन एक बार ही मिलता है, इसमें कुछ कर के जरूर दिखाना है

Fri, 12 Jan 2024 01:31 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Fri, 12 Jan 2024 01:31 AM IST
सार

युवा दिवस पर अमर उजाला ने ओलंपियन मनु भाकर से विशेष बातचीत की। उनके निशानेबाज बनने के सफर के बारे में जाना। डीएवी कॉलेज से स्नातकोत्तर कर रहीं मनु 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और 70 से अधिक राष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं।

विज्ञापन
You get life once, you have to do something in it: Manu Bhaker
manu bhakar

विस्तार

हमें एक ही जीवन मिला है और इसमें कुछ कर दिखाना है। यह बात अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज मनु भाकर ने कही। उन्होंने बताया कि अगला लक्ष्य इस साल के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
विज्ञापन


युवा दिवस पर अमर उजाला ने ओलंपियन मनु भाकर से विशेष बातचीत की। उनके निशानेबाज बनने के सफर के बारे में जाना। डीएवी कॉलेज से स्नातकोत्तर कर रहीं मनु 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और 70 से अधिक राष्ट्रीय पदक जीत चुकी हैं। 2021 में हुए ओलंपिक में वह सातवें स्थान पर रहीं। अब इस साल पेरिस में होने जा रही ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक लाना उनका लक्ष्य है। 2023 में मनु ने एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता।
विज्ञापन


दूसरी कक्षा में स्कूल में वार्षिक खेल प्रतियोगिता से शुरू कर मनु का खेलों के साथ गहरा संबंध बन गया। कभी वह कबड्डी के मैदान में उतरीं तो कभी कराटे के। शूटिंग को प्राथमिक रूप से चुनने से पूर्व मनु ने स्केटिंग, मार्शल आर्ट्स, कराटे, कबड्डी सब खेला। 16 साल की उम्र में मनु ने 2018 में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और दो स्वर्ण पदक जीते। उसी साल मनु ने कॉमनवेल्थ गेम्स और यूथ ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक हासिल किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


नौवीं तक था डॉक्टर बनने का सपना
बहुत से विद्यार्थियों की तरह मनु भी नौवीं कक्षा तक डॉक्टर बनना चाहती थीं। वह खेल में शुरू से अच्छी रही लेकिन पढ़ाई पर मुख्य ध्यान रहा। 10वीं में मनु के जीवन का अलग मोड़ आया, जब कक्षा में टॉप करने के साथ उनका चयन शूटिंग के लिए राष्ट्रीय टीम में हुआ। उनके कोच अनिल जाखड़ के कहने पर मनु ने शूटिंग को एक मौका दिया और 11वीं में जब वह 16 साल की थी तब आईएसएसएफ वर्ल्ड कप, कॉमनवेल्थ गेम्स और यूथ ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अपना नाम बनाया।

अन्य लड़कियों के लिए बनी प्रेरणा
मनु को परिवार का भरपूर साथ मिला लेकिन लड़की होने के नाते कइयों ने उनके खेल के लिए अधिक परिवहन करने और अधिक रुझान को सही नहीं ठहराया। मगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम बनाकर मनु ने सभी रिश्तेदारों के मुंह पर ताले लगा दिए। मनु ने कहा उन्हें एक ही जीवन मिला है, जिसमें वह कुछ महत्वपूर्ण करना चाहती हैं। पीटी ऊषा, गीता, पीवी सिंधु आदि खिलाड़ियों के बारे में जानकर वह बड़ी हुई हैं और आज उनके जिले झज्जर की कई लड़कियां उन्हें रोल मॉडल की तरह देखती हैं।


बेटी को कुछ भी करने से नहीं रोका
मनु के पिता राम किशन भाकर ने बताया कि अभिभावक होने के नाते उन्होंने कभी भी अपनी बेटी को कुछ भी करने से रोका नहीं। उसका जिस खेल को खेलने का मन था, उसे करने दिया और अंत में उसने अपनी पसंद का खेल चुना।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed