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'पापा चाहते थे टीचर बनूं, लेकिन खेल प्रेम ने बना दिया पहलवान'
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 04 Apr 2016 02:03 PM IST
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इंटरनेशनल रेसरल योगेश्वर दत्त
- फोटो : फाइल फोटो
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ओलंपिक और कॉमनवेल्थ मेडल विजेता योगेश्वर दत्त ने कहा कि शिक्षक होने के नाते पिता शिक्षा के क्षेत्र में भेजना चाहते थे, लेकिन शुरुआत से ही मेरी रुचि खेल में थी। वह दिन आज भी याद है जब पहली कुश्ती जीतने पर उन्हें दीवार घड़ी बतौर ईनाम में मिली थी। उस दीवार घड़ी ने इतना हौसला बढ़ाया कि फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
वे रविवार को हुए सद्भावना सम्मेलन में अतिथि के तौर पर आए थे। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके गुरु सतवीर सिंह का विशेष योगदान है। कई बार परिजनों से छिपकर गुरु जी के अखाड़े में जाता था और वहीं से खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
उन्हीं के सिखाए गए दांव-पेंच से प्रतिद्वंद्वी को मात देने में सक्षम हुआ। पिता शिक्षक थे, जिस कारण वह उन्हें भी शिक्षा के क्षेत्र में भेजना चाहते थे। लेकिन जैसे ही परिजनों को मेरे अखाड़े में जाने का पता चला, उन्होंने खुलकर सहयोग किया। कुश्ती जीतकर मिलने वाला पुरस्कार कभी कम या ज्यादा नहीं होता। पहली कुश्ती जीतने के बाद जिस समय उन्हें दीवार घड़ी पुरस्कार के रूप में मिली थी वह आज भी याद है।
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जो हुआ उसे भुला सद्भाव फैलाएं
ओलंपिक मेडल विजेता योगेश्वर दत्त ने पिछले दिनों हुई हिंसा पर कहा कि जो हुआ उसे भूलकर अब सभी को सद्भावना का परिचय देना चाहिए। इसी से देश, प्रदेश और समाज का हित होगा।
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वे रविवार को हुए सद्भावना सम्मेलन में अतिथि के तौर पर आए थे। अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मुकाम तक पहुंचाने में उनके गुरु सतवीर सिंह का विशेष योगदान है। कई बार परिजनों से छिपकर गुरु जी के अखाड़े में जाता था और वहीं से खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।
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उन्हीं के सिखाए गए दांव-पेंच से प्रतिद्वंद्वी को मात देने में सक्षम हुआ। पिता शिक्षक थे, जिस कारण वह उन्हें भी शिक्षा के क्षेत्र में भेजना चाहते थे। लेकिन जैसे ही परिजनों को मेरे अखाड़े में जाने का पता चला, उन्होंने खुलकर सहयोग किया। कुश्ती जीतकर मिलने वाला पुरस्कार कभी कम या ज्यादा नहीं होता। पहली कुश्ती जीतने के बाद जिस समय उन्हें दीवार घड़ी पुरस्कार के रूप में मिली थी वह आज भी याद है।
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जो हुआ उसे भुला सद्भाव फैलाएं
ओलंपिक मेडल विजेता योगेश्वर दत्त ने पिछले दिनों हुई हिंसा पर कहा कि जो हुआ उसे भूलकर अब सभी को सद्भावना का परिचय देना चाहिए। इसी से देश, प्रदेश और समाज का हित होगा।