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World Earth Day: चंडीगढ़ में है 51 फीसदी हरियाली...गिलहरी और तितलियों का घर है देश का पहला व्यवस्थित शहर
Sat, 22 Apr 2023 04:45 PM IST
निवेदिता वर्मा
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 22 Apr 2023 04:45 PM IST
सार
ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान के हिस्से के रूप में एक वार्षिक मूल्यांकन के अनुसार चंडीगढ़ में पिछले 14 वर्षों (2007-21) में सालाना 160,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिससे हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
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चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
51% हरियाली... पक्षी, गिलहरी और तितलियों का घर...हां मैं चंडीगढ़ हूं। फ्रेंच वास्तुकार ली कार्बुजिए द्वारा डिजाइन किया गया भारत का पहला व्यवस्थित शहर चंडीगढ़ न केवल आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, बल्कि अपनी हरित पट्टी की वजह से पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो चंडीगढ़ शहर का हरियाली आच्छादित क्षेत्र 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इंसानों की बढ़ती हुई आबादी के बीच चंडीगढ़ शहर और इसके इर्द-गिर्द 270 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों समेत कई छोटे स्तनधारियों के लिए बेहतर पारिस्थितिकी माहौल कायम है। इंसानों के साथ पशु-पक्षियों के लिए यह शहर देश और दुनिया में मिसाल कायम किए हुए है। 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले चंडीगढ़ में 47.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन के अधीन है, जबकि 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पेड़ों से आच्छादित है।
ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान के हिस्से के रूप में एक वार्षिक मूल्यांकन के अनुसार चंडीगढ़ में पिछले 14 वर्षों (2007-21) में सालाना 160,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिससे हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अधिक पानी सोखने के कारण नीलगिरी के वृक्षारोपण को बंद कर दिया गया है और पिछले एक दशक में औषधीय और स्वदेशी प्रजातियों का पोषण किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में हर्बल उद्यान स्थापित किए जा रहे हैं।
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सुखना वाइल्ड लाईफ सेंक्चुरी कई जीवों की पनाहगार
कई पार्कों, जंगलों और सड़कों के किनारे पंक्तिबद्ध पेड़ों से सजे चंडीगढ़ शहर को सुखना लेक और सुखना वाइल्ड लाईफ सेंक्चुरी से वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में अलग पहचान मिली है। यह सेंक्चुरी कई जीवों की पनाहगार है। यहां 270 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों और कई छोटे स्तनधारियों के लिए बेहतरीन पारिस्थितिक माहौल है। वनीकरण गतिविधियों पर काम कर रहे पर्यावरण संगठन सैट्रीज के परियोजना प्रबंधक शिवम चौहान का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के साथ-साथ चंडीगढ़ शहर के नागरिकों द्वारा किए गए ठोस प्रयासों के कारण शहर के हरित आवरण में वृद्धि हुई है।
साल दर साल ऐसे बढ़ा चंडीगढ़ का वन आवरण
चंडीगढ़ वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल वन आवरण 2003 में 42 वर्ग किमी से बढ़कर 2017 में 47.56 वर्ग किमी और 2019 में 48.03 वर्ग किमी हो गया। इसी अवधि के दौरान, वृक्षों का आवरण 2003 में आठ वर्ग किमी से बढ़कर 2017 में 10 वर्ग किमी से बढ़कर 2019 में 25 वर्ग किमी हो गया। कुल मिलाकर, हरित आवरण 2001 में 26% से बढ़कर 2019 में 46% और अब 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
ये पार्क चंडीगढ़ की सुंदरता में लगा रहे चांद
चंडीगढ़ के सौंदर्यीकरण में पार्कों का बड़ा योगदान है। प्रमुख पार्कों में बोटेनिकल पार्क, राजेंद्र पार्क, बोगेनविलिया गार्डन, लीजर वैली गार्डन, जाकिर रोज गार्डन, शांति कुंज, बांस वैली गार्डन, बल्बस गार्डन, हिबिस्कस गार्डन, खुशबू गार्डन और डहेलिया गार्डन शामिल हैं। 247 एकड़ में फैले इस हरे-भरे शहर में हरित स्थानों का निरंतर विकास हो रहा है। सारंगपुर, लाहौरा और धनास गांवों के प्रशासनिक ट्राई-जंक्शन पर विकसित 176 एकड़ का नया बोटेनिकल गार्डन चंडीगढ़ की एक धरोहर है।
चंडीगढ़ में प्रति वर्ग किलोमीटर में 1.94 प्रतिशत पक्षी
ईबर्ड से प्राप्त पक्षियों की संख्या के मुताबिक चंडीगढ़ शहर में प्रति वर्ग किमी पक्षी प्रजातियों का अनुमान 1.94 है। हालांकि यह आंकड़ा पारिस्थितिक रूप से समृद्ध शहरों जैसे देहरादून (2.91) और मैसूर (2.65) से पीछे है, लेकिन लोकप्रिय रूप से हरे माने जाने वाले शहरों जैसे भोपाल (0.99), श्रीनगर (0.97) और बंगलुरु (0.52) से बहुत आगे है। शहर में ये हरे भरे स्थान पक्षियों की लगभग 150 प्रजातियों को साल भर आश्रय, भोजन और घोंसले के स्थान प्रदान करते हैं। वन्य प्राणी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ के राज्य पक्षी भारतीय ग्रे हॉर्नबिल के अलावा शिकरा, ब्लैक आइबिस, कॉमन बैबलर, बारबेट्स और पर्पल सनबर्ड्स जैसे पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
पांच लाख की आबादी के लिए बसा था शहर, अब 13 लाख से ऊपर
शहर अपने निर्माण के वक्त पांच लाख की आबादी के लिए बसाया गया था। लेकिन अब चंडीगढ़ की आबादी 13 लाख से उपर हो चुकी है। यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए शहर में मैट्रो जैसी परियोजनाओं के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। पर्यावरण प्रमियों का कहना है कि अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो चंडीगढ़ के हरित क्षेत्र को नुकसान होगा। हालांकि कई स्थानों पर जंगल को हटाने के साथ शहर का विकास भी हुआ। सेक्टर 35 पहले एक वन क्षेत्र था, लेकिन अब एक आवासीय क्षेत्र है।
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पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो चंडीगढ़ शहर का हरियाली आच्छादित क्षेत्र 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इंसानों की बढ़ती हुई आबादी के बीच चंडीगढ़ शहर और इसके इर्द-गिर्द 270 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों समेत कई छोटे स्तनधारियों के लिए बेहतर पारिस्थितिकी माहौल कायम है। इंसानों के साथ पशु-पक्षियों के लिए यह शहर देश और दुनिया में मिसाल कायम किए हुए है। 114 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले चंडीगढ़ में 47.56 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन के अधीन है, जबकि 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पेड़ों से आच्छादित है।
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ग्रीनिंग चंडीगढ़ एक्शन प्लान के हिस्से के रूप में एक वार्षिक मूल्यांकन के अनुसार चंडीगढ़ में पिछले 14 वर्षों (2007-21) में सालाना 160,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिससे हरियाली में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अधिक पानी सोखने के कारण नीलगिरी के वृक्षारोपण को बंद कर दिया गया है और पिछले एक दशक में औषधीय और स्वदेशी प्रजातियों का पोषण किया जा रहा है। स्कूलों और कॉलेजों में हर्बल उद्यान स्थापित किए जा रहे हैं।
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सुखना वाइल्ड लाईफ सेंक्चुरी कई जीवों की पनाहगार
कई पार्कों, जंगलों और सड़कों के किनारे पंक्तिबद्ध पेड़ों से सजे चंडीगढ़ शहर को सुखना लेक और सुखना वाइल्ड लाईफ सेंक्चुरी से वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में अलग पहचान मिली है। यह सेंक्चुरी कई जीवों की पनाहगार है। यहां 270 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों और कई छोटे स्तनधारियों के लिए बेहतरीन पारिस्थितिक माहौल है। वनीकरण गतिविधियों पर काम कर रहे पर्यावरण संगठन सैट्रीज के परियोजना प्रबंधक शिवम चौहान का कहना है कि सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के साथ-साथ चंडीगढ़ शहर के नागरिकों द्वारा किए गए ठोस प्रयासों के कारण शहर के हरित आवरण में वृद्धि हुई है।
साल दर साल ऐसे बढ़ा चंडीगढ़ का वन आवरण
चंडीगढ़ वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कुल वन आवरण 2003 में 42 वर्ग किमी से बढ़कर 2017 में 47.56 वर्ग किमी और 2019 में 48.03 वर्ग किमी हो गया। इसी अवधि के दौरान, वृक्षों का आवरण 2003 में आठ वर्ग किमी से बढ़कर 2017 में 10 वर्ग किमी से बढ़कर 2019 में 25 वर्ग किमी हो गया। कुल मिलाकर, हरित आवरण 2001 में 26% से बढ़कर 2019 में 46% और अब 51 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
ये पार्क चंडीगढ़ की सुंदरता में लगा रहे चांद
चंडीगढ़ के सौंदर्यीकरण में पार्कों का बड़ा योगदान है। प्रमुख पार्कों में बोटेनिकल पार्क, राजेंद्र पार्क, बोगेनविलिया गार्डन, लीजर वैली गार्डन, जाकिर रोज गार्डन, शांति कुंज, बांस वैली गार्डन, बल्बस गार्डन, हिबिस्कस गार्डन, खुशबू गार्डन और डहेलिया गार्डन शामिल हैं। 247 एकड़ में फैले इस हरे-भरे शहर में हरित स्थानों का निरंतर विकास हो रहा है। सारंगपुर, लाहौरा और धनास गांवों के प्रशासनिक ट्राई-जंक्शन पर विकसित 176 एकड़ का नया बोटेनिकल गार्डन चंडीगढ़ की एक धरोहर है।
चंडीगढ़ में प्रति वर्ग किलोमीटर में 1.94 प्रतिशत पक्षी
ईबर्ड से प्राप्त पक्षियों की संख्या के मुताबिक चंडीगढ़ शहर में प्रति वर्ग किमी पक्षी प्रजातियों का अनुमान 1.94 है। हालांकि यह आंकड़ा पारिस्थितिक रूप से समृद्ध शहरों जैसे देहरादून (2.91) और मैसूर (2.65) से पीछे है, लेकिन लोकप्रिय रूप से हरे माने जाने वाले शहरों जैसे भोपाल (0.99), श्रीनगर (0.97) और बंगलुरु (0.52) से बहुत आगे है। शहर में ये हरे भरे स्थान पक्षियों की लगभग 150 प्रजातियों को साल भर आश्रय, भोजन और घोंसले के स्थान प्रदान करते हैं। वन्य प्राणी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक चंडीगढ़ के राज्य पक्षी भारतीय ग्रे हॉर्नबिल के अलावा शिकरा, ब्लैक आइबिस, कॉमन बैबलर, बारबेट्स और पर्पल सनबर्ड्स जैसे पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
पांच लाख की आबादी के लिए बसा था शहर, अब 13 लाख से ऊपर
शहर अपने निर्माण के वक्त पांच लाख की आबादी के लिए बसाया गया था। लेकिन अब चंडीगढ़ की आबादी 13 लाख से उपर हो चुकी है। यातायात के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए शहर में मैट्रो जैसी परियोजनाओं के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। पर्यावरण प्रमियों का कहना है कि अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो चंडीगढ़ के हरित क्षेत्र को नुकसान होगा। हालांकि कई स्थानों पर जंगल को हटाने के साथ शहर का विकास भी हुआ। सेक्टर 35 पहले एक वन क्षेत्र था, लेकिन अब एक आवासीय क्षेत्र है।