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अफसरों से बोले शहरवासी- ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर की नहीं, ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत
Tue, 24 Dec 2019 02:41 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 02:41 PM IST
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एडवाइजर मनोज परिदा
- फोटो : अमर उजाला
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ट्रिब्यून चौक पर फ्लाईओवर बनाने को लेकर यूटी प्रशासन के अफसरों ने सोमवार को यूटी गेस्ट हाउस में शहरवासियों के सुझाव सुने। भारी संख्या में पहुंचे लोगों को देखने के बाद एडवाइजर मनोज परिदा भी हैरान हुए। उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर गर्व हो रहा है कि शहर को लेकर लोग कितने सक्रिय हैं, उन्हें अपने शहर की कितनी चिंता है।
एडवाइजर मनोज परिदा के अध्यक्षता में हुई सुनवाई में फ्लाईओवर बनाए जाने के पक्ष में कम विपक्ष में ज्यादा लोग रहे। सुझाव देने के लिए 18 से 90 वर्ष के लोग भी पहुंचे। अफसरों की तरफ से सभी को सुना गया। लोगों ने कहा कि फ्लाईओवर की जगह ट्रैफिक मैनेजमेंट पर काम होना चाहिए। इस मौके पर प्रशासन के सभी अधिकारी भी उपस्थित रहे। लोगों ने फ्लाईओवर न बनाए जाने के पीछे शहर के हेरिटेज स्टेटस को बताया।
ज्यादातर लोगों की राय रही कि फ्लाईओवर बनाने के कोई खास फायदा नहीं होगा। ट्रैफिक को मैनेज करने की जरूरत है। कुछ लोगों ने फ्लाईओवर में बदलाव को लेकर प्रेजेंटेशन भी अफसरों के सामने पेश की। एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि प्रशासन ने सबके सुझाव सुने हैं। कई लोगों ने लिखित में भी सुझाव दिए हैं। सभी के सुझावों को देखा जाएगा और कंपाइल करने के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपा जाएगा।
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एडवाइजर मनोज परिदा के अध्यक्षता में हुई सुनवाई में फ्लाईओवर बनाए जाने के पक्ष में कम विपक्ष में ज्यादा लोग रहे। सुझाव देने के लिए 18 से 90 वर्ष के लोग भी पहुंचे। अफसरों की तरफ से सभी को सुना गया। लोगों ने कहा कि फ्लाईओवर की जगह ट्रैफिक मैनेजमेंट पर काम होना चाहिए। इस मौके पर प्रशासन के सभी अधिकारी भी उपस्थित रहे। लोगों ने फ्लाईओवर न बनाए जाने के पीछे शहर के हेरिटेज स्टेटस को बताया।
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ज्यादातर लोगों की राय रही कि फ्लाईओवर बनाने के कोई खास फायदा नहीं होगा। ट्रैफिक को मैनेज करने की जरूरत है। कुछ लोगों ने फ्लाईओवर में बदलाव को लेकर प्रेजेंटेशन भी अफसरों के सामने पेश की। एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि प्रशासन ने सबके सुझाव सुने हैं। कई लोगों ने लिखित में भी सुझाव दिए हैं। सभी के सुझावों को देखा जाएगा और कंपाइल करने के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपा जाएगा।
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ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत
गौतम काचरू ने इस फ्लाईओवर का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जरूरत ट्रैफिक मैनेजमेंट की है, न कि फ्लाईओवर की। प्रशासन को स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पर काम करना चाहिए। इसमें कैमरे, राडार, सेंसर्स, स्मार्ट रेड लाइट्स हों जो गाड़ियों की संख्या के अनुसार खुद ही बदल सकें। कई देशों में यह सिस्टम पहले से ही काम भी कर रहा है। यह महंगा भी नहीं है।
हर चौक पर लाल बत्ती ही ट्रैफिक की असल समस्या
आर्किटेक्ट पल्लव मुखर्जी ने कहा कि वह फ्लाईओवर के सख्त खिलाफ हैं। असल समस्या लाल बत्तियां है, जो हर जगह हैं। इनकी वजह से ही जाम लग रहा है। इन्हें हटाना होगा। शहर में कई ऐसे प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं, जिनकी जरूरत नहीं है। उदाहरण के तौर पर सेक्टर-17 और रोज गार्डन के बीच बना अंडरपास, जिसकी किसी को भी जरूरत नहीं है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री कर देना चाहिए
सीनियर वकील एमएल सरीन ने कहा कि यह फ्लाईओवर मास्टर प्लान में नहीं है। शहर इतने ट्रैफिक को भी संभाल सकता है। मैनेजमेंट की जरूरत है। 472 पेड़ नहीं काटे जा सकते। पर्यावरण की सुरक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री कर देना चाहिए ताकि लोग उनका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। पंजाब और हरियाणा से आने वाली गाड़ियों को डायवर्ट करना होगा।
मध्य और दक्षिण मार्ग पर भी बने फ्लाईओवर
यशपाल महाजन ने कहा कि वह फ्लाईओवर के बनाने के पक्ष में हैं। शहर के विकास को रोकना नहीं चाहिए। दिल्ली भी आज फ्लाईओवर की वजह से ही चल रही है। इसे बनाने में पेड़ कटेंगे, लेकिन प्रशासन को उससे ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर के सिर्फ एक फ्लाईओवर से राहत नहीं मिलेगी बल्कि मध्य और दक्षिण मार्ग पर भी एक-एक फ्लाईओवर होना चाहिए।
हम भूतकाल में नहीं जी सकते
भारतीय विद्या भवन के चेयरमैन आरके साबू ने कहा कि हम भूतकाल में नहीं जी सकते। भविष्य को देखते हुए फ्लाईओवर को बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। ऐसा नहीं है फ्लाईओवर सिर्फ चंडीगढ़ में हैं, विदेश के खूबसूरत शहरों में भी फ्लाईओवर बनाए गए हैं और बनाए जा रहे हैं।
हर चौक पर लाल बत्ती ही ट्रैफिक की असल समस्या
आर्किटेक्ट पल्लव मुखर्जी ने कहा कि वह फ्लाईओवर के सख्त खिलाफ हैं। असल समस्या लाल बत्तियां है, जो हर जगह हैं। इनकी वजह से ही जाम लग रहा है। इन्हें हटाना होगा। शहर में कई ऐसे प्रोजेक्ट लाए जा रहे हैं, जिनकी जरूरत नहीं है। उदाहरण के तौर पर सेक्टर-17 और रोज गार्डन के बीच बना अंडरपास, जिसकी किसी को भी जरूरत नहीं है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री कर देना चाहिए
सीनियर वकील एमएल सरीन ने कहा कि यह फ्लाईओवर मास्टर प्लान में नहीं है। शहर इतने ट्रैफिक को भी संभाल सकता है। मैनेजमेंट की जरूरत है। 472 पेड़ नहीं काटे जा सकते। पर्यावरण की सुरक्षा भी हमारी जिम्मेदारी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फ्री कर देना चाहिए ताकि लोग उनका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। पंजाब और हरियाणा से आने वाली गाड़ियों को डायवर्ट करना होगा।
मध्य और दक्षिण मार्ग पर भी बने फ्लाईओवर
यशपाल महाजन ने कहा कि वह फ्लाईओवर के बनाने के पक्ष में हैं। शहर के विकास को रोकना नहीं चाहिए। दिल्ली भी आज फ्लाईओवर की वजह से ही चल रही है। इसे बनाने में पेड़ कटेंगे, लेकिन प्रशासन को उससे ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शहर के सिर्फ एक फ्लाईओवर से राहत नहीं मिलेगी बल्कि मध्य और दक्षिण मार्ग पर भी एक-एक फ्लाईओवर होना चाहिए।
हम भूतकाल में नहीं जी सकते
भारतीय विद्या भवन के चेयरमैन आरके साबू ने कहा कि हम भूतकाल में नहीं जी सकते। भविष्य को देखते हुए फ्लाईओवर को बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। ऐसा नहीं है फ्लाईओवर सिर्फ चंडीगढ़ में हैं, विदेश के खूबसूरत शहरों में भी फ्लाईओवर बनाए गए हैं और बनाए जा रहे हैं।
मेरे बच्चों को उन पेड़ों की जरूरत है
चारू गुप्ता ने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के सख्त खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना से शहर को बनाने वाले ली काबूर्जिए को कब्र में रहते हुए भी पीड़ा होगी। उन्होंने कहा कि एक भी पेड़ कटना नहीं चाहिए। वह पेड़ न जाने कितने लोगों को जिंदगी देते हैं। वह पेड़ उनके बच्चों को चाहिए। फ्लाईओवर नहीं बनना चाहिए।
विरोध के बावजूद कैसे पास हुआ फ्लाईओवर
सीनियर वकील रीटा कोहली ने कहा कि इस फ्लाईओवर को लेकर अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने भी विरोध किया, फिर भी इस योजना को पास किया गया। यह फ्लाईओवर इंडियन रोड कांग्रेस पॉलिसी के भी खिलाफ है। दुनिया के कई देश फ्लाईओवर को तोड़ रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में बनाया जा रहा है। हम कैसे स्मार्ट सिटी में रह रहे हैं। बंगलुरू और पुणे फ्लाईओवर बना कर पछता रहे हैं।
एक फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा 7-8 और बनाने होंगे
मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह ने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। शहर को जाम से निजात दिलाना है तो एक फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा 7-8 और बनाने होंगे। ट्रिब्यून फ्लाईओवर का काम जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। ज्यादा पेड़ लगाने की जरूरत है। शहर को बचाना है तो फ्लाईओवर बनाना होगा।
फ्लाईओवर के साथ मेट्रो की भी जरूरत
पार्षद देवेंदर बबला ने कहा कि वह इसके पक्ष में हैं। कभी सभी लोग दिल्ली सड़क से जाते थे, अब फ्लाईओवर से जा रहे हैं। फ्लाईओवर की वजह से ही जाम में नहीं फंसते। ट्रिब्यून चौक पर काफी जाम लगता है। एक बार उनके आंखों के सामने एक महिला के बच्चे की जान चली गई, क्योंकि एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिला। शहर को मेट्रो भी चाहिए।
समस्या-समाधान टीम ने मोनो रेल का दिया सुझाव
समस्या-समाधान टीम के क्रांति शुक्ला ने कहा कि वह मोनो रेल के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि चीन और जापान अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए मोनो रेल, मेट्रो रेल से भी काफी आगे निकल गए हैं और चंडीगढ़ के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग नहीं कर पाए। चंडीगढ़ में मोनो रेल चलाने से ट्रैफिक व्यवस्था ठीक होगी। साथ ही गाड़ी की रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आए लोगों से पहले पौधा लगवाना चाहिए।
शहर को नए फ्लाईओवर की जरूरत
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी संजीव चड्ढा ने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। शहर में ट्रैफिक की समस्या काफी ज्यादा है। शहर को नए फ्लाईओवर की जरूरत है। भविष्य में इस फ्लाईओवर को जीरकपुर तक जोड़ना चाहिए ताकि लोगों को कहीं भी रुकना न पड़े।
इन लोगों ने भी दिए सुझाव
एन्वायर्नमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के एनके झिंगन, रिटायर्ड इंजीनियर चंद्र प्रकाश, कर्नल कुलदीप सिंह, आर्किटेक्ट शिल्पा दास, पर्यावरण के जानकार राहुल महाजन, व्यापारी अजय सोनी, पीके अग्रवाल, विनोद वशिष्ठ, पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर, आर्किटेक्ट सुरिंदर बाघा, वकील एसके सिन्हा, सरकारी कर्मचारी मनीष कपूर, अजीत सिंह ने भी अपने सुझाव दिए।
विरोध के बावजूद कैसे पास हुआ फ्लाईओवर
सीनियर वकील रीटा कोहली ने कहा कि इस फ्लाईओवर को लेकर अर्बन प्लानिंग डिपार्टमेंट ने भी विरोध किया, फिर भी इस योजना को पास किया गया। यह फ्लाईओवर इंडियन रोड कांग्रेस पॉलिसी के भी खिलाफ है। दुनिया के कई देश फ्लाईओवर को तोड़ रहे हैं, लेकिन चंडीगढ़ में बनाया जा रहा है। हम कैसे स्मार्ट सिटी में रह रहे हैं। बंगलुरू और पुणे फ्लाईओवर बना कर पछता रहे हैं।
एक फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा 7-8 और बनाने होंगे
मनोनीत पार्षद चरणजीव सिंह ने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। शहर को जाम से निजात दिलाना है तो एक फ्लाईओवर से काम नहीं चलेगा 7-8 और बनाने होंगे। ट्रिब्यून फ्लाईओवर का काम जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए। ज्यादा पेड़ लगाने की जरूरत है। शहर को बचाना है तो फ्लाईओवर बनाना होगा।
फ्लाईओवर के साथ मेट्रो की भी जरूरत
पार्षद देवेंदर बबला ने कहा कि वह इसके पक्ष में हैं। कभी सभी लोग दिल्ली सड़क से जाते थे, अब फ्लाईओवर से जा रहे हैं। फ्लाईओवर की वजह से ही जाम में नहीं फंसते। ट्रिब्यून चौक पर काफी जाम लगता है। एक बार उनके आंखों के सामने एक महिला के बच्चे की जान चली गई, क्योंकि एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिला। शहर को मेट्रो भी चाहिए।
समस्या-समाधान टीम ने मोनो रेल का दिया सुझाव
समस्या-समाधान टीम के क्रांति शुक्ला ने कहा कि वह मोनो रेल के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि चीन और जापान अपनी एडवांस टेक्नोलॉजी के जरिए मोनो रेल, मेट्रो रेल से भी काफी आगे निकल गए हैं और चंडीगढ़ के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग नहीं कर पाए। चंडीगढ़ में मोनो रेल चलाने से ट्रैफिक व्यवस्था ठीक होगी। साथ ही गाड़ी की रजिस्ट्रेशन कराने के लिए आए लोगों से पहले पौधा लगवाना चाहिए।
शहर को नए फ्लाईओवर की जरूरत
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के जनरल सेक्रेटरी संजीव चड्ढा ने कहा कि वह इस फ्लाईओवर के पक्ष में हैं। शहर में ट्रैफिक की समस्या काफी ज्यादा है। शहर को नए फ्लाईओवर की जरूरत है। भविष्य में इस फ्लाईओवर को जीरकपुर तक जोड़ना चाहिए ताकि लोगों को कहीं भी रुकना न पड़े।
इन लोगों ने भी दिए सुझाव
एन्वायर्नमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के एनके झिंगन, रिटायर्ड इंजीनियर चंद्र प्रकाश, कर्नल कुलदीप सिंह, आर्किटेक्ट शिल्पा दास, पर्यावरण के जानकार राहुल महाजन, व्यापारी अजय सोनी, पीके अग्रवाल, विनोद वशिष्ठ, पूर्व चीफ आर्किटेक्ट सुमित कौर, आर्किटेक्ट सुरिंदर बाघा, वकील एसके सिन्हा, सरकारी कर्मचारी मनीष कपूर, अजीत सिंह ने भी अपने सुझाव दिए।