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Womens Day: 'लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं, मैंने उस हाल में जीने की कसम खाई है'
Sun, 08 Mar 2020 02:06 PM IST
खुशबू गोयल
सीमा एस आनंद, चंडीगढ़
सीमा एस आनंद, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 08 Mar 2020 02:06 PM IST
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समाजसेवी अंजू
- फोटो : अमर उजाला
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लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं, मैंने उस हाल में जीने की कसम खाई है...यह लाइनें फिट बैठती हैं इस बहादुर मिला अंजू पर। क्योंकि जिस बीमारी में लोग जीने की आस तक छोड़ देते हैं, उसमें अंजू ने न केवल खुद को उबारा, बल्कि 10 लोगों को रोजगार भी दिया। अंजू का कहना है कि उन्होंने सुना था कि जब किसी कोई लाइन छोटी करनी हो तो उसके साथ एक बड़ी लाइन खींच दो।
मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए अंजू ने भी कुछ ऐसा ही किया। शारीरिक रूप से 60 फीसदी अक्षम हो चुकीं अंजू पिछले 19 साल से इस बीमारी से जूझ रही हैं लेकिन जज्बा और हौसला ऐसा है कि अब वह हालात से हार चुके लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें जीने की राह दिखा रही हैं।
मदद लेने की बजाय करती हैं समाजसेवा
अंजू बताती हैं कि उनकी शादी को 20 साल हो गए हैं। शादी के एक साल बाद ही वे इस बीमारी से पीड़ित हो गईं। एक बार तो लगा कि जिंदगी जैसे खत्म हो गई लेकिन फिर सोचा बेड पर पड़े-पड़े बोझ बनने से अच्छा है कि कुछ किया जाए। बस इसी सोच को लेकर अंजू ने एक विज्ञापन एजेंसी खोल ली।
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अब उनके अधीन 10 लोग काम कर रहे हैं। यही नहीं वह समाज सेवा में भी पीछे नहीं हटतीं। वह एम्स में दाखिल और जिंदगी की जंग हार चुके लोगों की काउंसलिंग करती हैं और किसी से कोई चार्ज नहीं लेतीं। टैगोर थियेटर में भी कई बार उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।
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मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी गंभीर बीमारी को हराने के लिए अंजू ने भी कुछ ऐसा ही किया। शारीरिक रूप से 60 फीसदी अक्षम हो चुकीं अंजू पिछले 19 साल से इस बीमारी से जूझ रही हैं लेकिन जज्बा और हौसला ऐसा है कि अब वह हालात से हार चुके लोगों की काउंसलिंग कर उन्हें जीने की राह दिखा रही हैं।
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मदद लेने की बजाय करती हैं समाजसेवा
अंजू बताती हैं कि उनकी शादी को 20 साल हो गए हैं। शादी के एक साल बाद ही वे इस बीमारी से पीड़ित हो गईं। एक बार तो लगा कि जिंदगी जैसे खत्म हो गई लेकिन फिर सोचा बेड पर पड़े-पड़े बोझ बनने से अच्छा है कि कुछ किया जाए। बस इसी सोच को लेकर अंजू ने एक विज्ञापन एजेंसी खोल ली।
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अब उनके अधीन 10 लोग काम कर रहे हैं। यही नहीं वह समाज सेवा में भी पीछे नहीं हटतीं। वह एम्स में दाखिल और जिंदगी की जंग हार चुके लोगों की काउंसलिंग करती हैं और किसी से कोई चार्ज नहीं लेतीं। टैगोर थियेटर में भी कई बार उन्हें काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है।
इच्छाशक्ति और योग को बनाया सहारा
घर में सास-ससुर, पति के अलावा 14 साल की बेटी है। माता-पिता और ससुराल वालों की मदद के बिना आज वह खुद की विज्ञापन एजेंसी चला रही हैं। पति पूरा सपोर्ट करते हैं लेकिन आज तक किसी से एक भी पैसा नहीं लिया। अंजू का कहना है कि आपके अंदर केवल इच्छाशक्ति होनी चाहिए फिर आप अपना हर सपना पूरा कर सकते हैं। वह नियमित रूप से योग और प्राणायाम करती हैं। इसका एक फायदा यह है कि दिनभर तरोताजा रहने के साथ ही बीमारी से लड़ने की शक्ति भी आ जाती है।
क्या है स्क्लेरोसिस
इस बीमारी में आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपकी तंत्रिकाओं को आवरण प्रदान करने वाले सुरक्षात्मक खोल को नुकसान पहुंचाती है। इसका ज्यादा असर नसों पर पड़ता है। इससे मरीज का शरीर सुन्न हो जाता है और वह चल फिर सकने की क्षमता खो सकता है। इससे मांसपेशियों में ऐंठन आ जाती है। स्क्लेरोसिस बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर 15 से 60 वर्ष के लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि विटामिन डी की कमी से यह बीमारी बढ़ सकती है।
क्या है स्क्लेरोसिस
इस बीमारी में आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपकी तंत्रिकाओं को आवरण प्रदान करने वाले सुरक्षात्मक खोल को नुकसान पहुंचाती है। इसका ज्यादा असर नसों पर पड़ता है। इससे मरीज का शरीर सुन्न हो जाता है और वह चल फिर सकने की क्षमता खो सकता है। इससे मांसपेशियों में ऐंठन आ जाती है। स्क्लेरोसिस बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन यह आमतौर पर 15 से 60 वर्ष के लोगों को ज्यादा प्रभावित करती है। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि विटामिन डी की कमी से यह बीमारी बढ़ सकती है।