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Chandigarh News: सुखना वन्यजीव अभयारण्य में होगी वन्यजीवों की जनगणना
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चंडीगढ़। 6400 एकड़ में फैले सुखना वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों की गणना की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके लिए 20 नवंबर से सर्वे शुरू होगा। यह चार से पांच दिन चलेगा। खास बात यह है कि इस बार पहली बार सुखना चो रिजर्व फॉरेस्ट, पटियाला की राव रिजर्व फॉरेस्ट और लेक रिजर्व फॉरेस्ट को जनगणना में शामिल किया जा रहा है।
मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार ने बताया कि इसमें देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तकनीकी सहयोग कर रहा है। सर्वे से पहले 18 नवंबर से कर्मचारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण भी शुरू होगा। जनगणना में पर्यावरणविदों, एनजीओ प्रतिनिधियों के साथ पंजाब विश्वविद्यालय के बायोलॉजी और जूलॉजी विभाग के छात्र भी शामिल होंगे। इस सर्वे में चीतल, नीलगाय, सांभर, हिरण और अन्य वन्यजीवों की संख्या के साथ उनकी प्रजातियों का भी विस्तृत ब्योरा जुटाया जाएगा। साथ ही, यह भी दर्ज किया जाएगा कि पिछली जनगणना की तुलना में किस प्रजाति की संख्या बढ़ी है और किसकी घटी है। अभयारण्य में सबसे अधिक पाई जाने वाली प्रजाति सांभर रही है। इसके अलावा चीतल, जंगली सूअर, सियार, स्मॉल इंडियन सिवेट, जंगल कैट, साही, लंगूर, रीसस बंदर, इंडियन हेयर, कॉमन मैंगूस और थ्री-स्ट्राइप्ड पाम स्क्विरल प्रमुख रूप से देखे जाते हैं।
गौरतलब है कि पहली जनगणना 2010 में हुई थी, जबकि दूसरी कोविड-19 और लॉकडाउन के चलते 2020 में न होकर मई 2021 में पूरी की गई थी। 2010 की रिपोर्ट में तीन दिन के अंदर 65 पक्षी प्रजातियों की गिनती दर्ज हुई थी और उस समय सांभर की संख्या एक हजार से अधिक पाई गई थी।
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मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार ने बताया कि इसमें देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया तकनीकी सहयोग कर रहा है। सर्वे से पहले 18 नवंबर से कर्मचारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण भी शुरू होगा। जनगणना में पर्यावरणविदों, एनजीओ प्रतिनिधियों के साथ पंजाब विश्वविद्यालय के बायोलॉजी और जूलॉजी विभाग के छात्र भी शामिल होंगे। इस सर्वे में चीतल, नीलगाय, सांभर, हिरण और अन्य वन्यजीवों की संख्या के साथ उनकी प्रजातियों का भी विस्तृत ब्योरा जुटाया जाएगा। साथ ही, यह भी दर्ज किया जाएगा कि पिछली जनगणना की तुलना में किस प्रजाति की संख्या बढ़ी है और किसकी घटी है। अभयारण्य में सबसे अधिक पाई जाने वाली प्रजाति सांभर रही है। इसके अलावा चीतल, जंगली सूअर, सियार, स्मॉल इंडियन सिवेट, जंगल कैट, साही, लंगूर, रीसस बंदर, इंडियन हेयर, कॉमन मैंगूस और थ्री-स्ट्राइप्ड पाम स्क्विरल प्रमुख रूप से देखे जाते हैं।
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गौरतलब है कि पहली जनगणना 2010 में हुई थी, जबकि दूसरी कोविड-19 और लॉकडाउन के चलते 2020 में न होकर मई 2021 में पूरी की गई थी। 2010 की रिपोर्ट में तीन दिन के अंदर 65 पक्षी प्रजातियों की गिनती दर्ज हुई थी और उस समय सांभर की संख्या एक हजार से अधिक पाई गई थी।
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