हरियाणा पंचायत चुनाव: राजनीतिक दलों के लिए क्यों अहम, क्या पड़ेगा असर, पिछले चुनाव से कैसे अलग?
हरियाणा में पहले चरण में 10 जिलों भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, पंचकूला, यमुनानगर और पानीपत में पंचायत चुनाव होंगे।
विस्तार
हरियाणा में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। ये चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। कई मायनों में यह चुनाव बेहद अहम हैं तो वहीं पिछले चुनाव से अलग भी हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह परीक्षा की घड़ी हैं तो वहीं भाजपा- जजपा गठबंधन के सामने अपने आपको साबित करने का मौका भी है। प्रदेश में कुल मतदान केंद्र 14637 हैं। कुल 411 जिला परिषद, 3081 पंचायत समिति, 6220 पंचायत और 61993 पंच चुने जाने हैं। मतदाताओं की कुल संख्या 1.20 करोड़ है।
जिला परिषद-पंचायत समिति सदस्य के 30 अक्तूबर और सरपंच-पंच पद के लिए दो नवंबर को वोट पड़ेंगे। सरपंच-पंच के नतीजे मतदान के दिन ही आ जाएंगे, जिला परिषद और पंचायत समिति का चुनाव परिणाम दोनों चरण पूरा होने पर एक साथ घोषित होगा। 12 जिलों में दूसरे चरण में चुनाव होंगे, उनकी घोषणा पहले चरण के चुनाव की नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी। पहले चरण में 10 जिलों भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, पंचकूला, यमुनानगर और पानीपत में पंचायत चुनाव होंगे।
पिछले चुनाव से यह अलग कैसे
- बीसी-ए को पहली बार आरक्षण
- महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें, पहले 33 फीसदी थीं
- सम-विषम के आधार पर पंचायतें आरक्षित
- पहली बार दो चरणों में चुनाव
- 23 ग्राम पंचायतें अधिक, सरपंच चुनाव भी ईवीएम से
इस चुनाव का क्या असर होगा
- राजनीतिक दलों को आइना दिखाएंगे
- गावों में भाजपा-जजपा, कांग्रेस, आप, इनेलो को अपनी पकड़ पता चलेगी
- 2022 लोकसभा-विधानसभा चुनाव की दशा-दिशा तय करेगा
- गठबंधन का भविष्य तय होगा
- सरकार के प्रति ग्रामीणों का मिजाज पता चलेगा
दलों के लिए यह चुनाव क्यों अहम
भाजपा: आठ साल से सत्ता में, दो साल बाद विस चुनाव। गांवों में पैठ बढ़ाना चाहती
जजपा: गठबंधन सरकार का हिस्सा, ग्रामीण क्षेत्र की पार्टी। इस चुनाव में जीत-हार के अनेक मायने
कांग्रेस: 2014 से सत्ता से दूर, जीत से संजीवनी मिलेगी, 2022 के लिए मनोबल बढ़ेगा
इनेलो: 18 साल से सत्ता से बाहर, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही। ग्रामीण क्षेत्र में पकड़ मजबूत करना चाहेगी
आप: पंजाब विस चुनाव में जीत के बाद हरियाणा में पहला बड़ा चुनाव। जिप-पंचायत समिति चेयरमैन बनाना चाह रही
चुनाव होंगे लेकिन नतीजे हाईकोर्ट के फैसले पर निर्भर
हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनाव में बीसी-ए को 8 फीसदी और महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण प्रावधान किया था। इसे पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। इसी वजह से चुनाव नहीं हो सके थे। सुनवाई जारी है। हाईकोर्ट ने सरकार को स्पष्ट किया है कि वह चुनाव नए प्रावधान से करा सकती है, पर इसके नतीजे अदालत के आखिरी फैसले पर निर्भर रहेंगे।