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चंडीगढ़ः नगर निगम कहां खर्च कर रहा 152 करोड़ रुपये, प्रशासन रखेगा हिसाब किताब पर नजर
Sun, 10 Nov 2019 12:44 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Nov 2019 12:44 PM IST
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वित्तीय संकट के जूझ रहे नगर निगम को 152 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट के एलान के बाद से नगर निगम के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। यूटी प्रशासन ने कहा है कि कुछ ही दिनों में 50 करोड़ रुपये जारी कर दिए जाएंगे। इससे नगर निगम की बदहाल सड़कों के साथ अन्य रुके हुए काम फिर से रफ्तार पकड़ेंगे। हालांकि नगर निगम इन पैसों का इस्तेमाल कहां कर रहा है, इस पर प्रशासन नजर रखेगा। इसके लिए कुछ दिनों में एक कमेटी भी बनाई जाएगी।
एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि प्रशासन की तरफ से जारी किए जाने वाले पहले 50 करोड़ रुपये नगर निगम की टूटी सड़कों को ठीक करने में खर्च किए जाएंगे। हालांकि कौन सी सड़कें बनाई जाएंगी, यह यूटी प्रशासन व नगर निगम के अधिकारी और मेयर की कमेटी तय करेगी। जानकारी के अनुसार एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में यह कमेटी कुछ दिनों में गठित की जाएगी। इस कमेटी में नगर निगम के कमिश्नर केके यादव और मेयर राजेश कालिया भी होंगे।
प्रशासन नहीं चाहता है कि अतिरिक्त बजट का दुरुपयोग न हो, इसलिए ही प्रशासन की तरफ से खर्चे पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा प्रशासन ने निगम कमिश्नर को आदेश दिए हैं कि इस फंड के खर्चे का पूरा ब्योरा प्रशासन को समय-समय पर दिया जाए। गौरतलब है कि सड़कों की खस्ता हालत को देखते हुए प्रशासन ने पिछले महीने भी नगर निगम को 15 करोड़ रुपये दिए थे।
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एडवाइजर बोले- पैसा खर्च करना एमसी का काम, हम रखेंगे निगरानी
एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि फंड के इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन इन रुपयों का दुरुपयोग न हो इसलिए प्रशासन नजर रखेगा। नगर निगम में फंड की काफी कमी होने की वजह से कई काम रुके हुए हैं। इसके अलावा कुछ सड़कों की हालत भी खराब है। नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह जहां पैसों का इस्तेमाल करेंगे, उसकी जानकारी हमें देनी होगी। यह सिर्फ इसलिए है कि फंड का इस्तेमाल शहर के विकास में हो।
22 करोड़ का बना दिया था इस्टीमेट
नगर निगम में फंड की काफी कमी रहती है। बावजूद इसके फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आते ही रहते हैं। ताजा मामला पिछले महीने का ही है, जब प्रशासन ने नगर निगम को सड़क ठीक कराने के लिए स्पेशल बजट के तौर पर 15 करोड़ जारी किए थे। सड़कों को बनाने के लिए बी एंड आर बिंग ने 40 सबसे खराब सड़कों की जो लिस्ट बनाई थी, उसमें ही बड़ी गड़बड़ी पाई गई थी। सर्वे के बाद नगर निगम के कमिश्नर केके यादव ने देखा कि जो सड़कें करीब 6 करोड़ में ठीक हो सकती थी, उसके लिए करीब 22 करोड़ का इस्टीमेट बनाया गया था। जो लिस्ट बनाई गई थी, उसमें से ज्यादातर सड़कें पहले से ही ठीक थी। इसके बाद इस इस्टीमेट को खारिज कर नया बनाया गया था।
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एडवाइजर मनोज परिदा ने बताया कि प्रशासन की तरफ से जारी किए जाने वाले पहले 50 करोड़ रुपये नगर निगम की टूटी सड़कों को ठीक करने में खर्च किए जाएंगे। हालांकि कौन सी सड़कें बनाई जाएंगी, यह यूटी प्रशासन व नगर निगम के अधिकारी और मेयर की कमेटी तय करेगी। जानकारी के अनुसार एडवाइजर मनोज परिदा की अध्यक्षता में यह कमेटी कुछ दिनों में गठित की जाएगी। इस कमेटी में नगर निगम के कमिश्नर केके यादव और मेयर राजेश कालिया भी होंगे।
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प्रशासन नहीं चाहता है कि अतिरिक्त बजट का दुरुपयोग न हो, इसलिए ही प्रशासन की तरफ से खर्चे पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा प्रशासन ने निगम कमिश्नर को आदेश दिए हैं कि इस फंड के खर्चे का पूरा ब्योरा प्रशासन को समय-समय पर दिया जाए। गौरतलब है कि सड़कों की खस्ता हालत को देखते हुए प्रशासन ने पिछले महीने भी नगर निगम को 15 करोड़ रुपये दिए थे।
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एडवाइजर बोले- पैसा खर्च करना एमसी का काम, हम रखेंगे निगरानी
एडवाइजर मनोज परिदा ने कहा कि फंड के इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन इन रुपयों का दुरुपयोग न हो इसलिए प्रशासन नजर रखेगा। नगर निगम में फंड की काफी कमी होने की वजह से कई काम रुके हुए हैं। इसके अलावा कुछ सड़कों की हालत भी खराब है। नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वह जहां पैसों का इस्तेमाल करेंगे, उसकी जानकारी हमें देनी होगी। यह सिर्फ इसलिए है कि फंड का इस्तेमाल शहर के विकास में हो।
22 करोड़ का बना दिया था इस्टीमेट
नगर निगम में फंड की काफी कमी रहती है। बावजूद इसके फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आते ही रहते हैं। ताजा मामला पिछले महीने का ही है, जब प्रशासन ने नगर निगम को सड़क ठीक कराने के लिए स्पेशल बजट के तौर पर 15 करोड़ जारी किए थे। सड़कों को बनाने के लिए बी एंड आर बिंग ने 40 सबसे खराब सड़कों की जो लिस्ट बनाई थी, उसमें ही बड़ी गड़बड़ी पाई गई थी। सर्वे के बाद नगर निगम के कमिश्नर केके यादव ने देखा कि जो सड़कें करीब 6 करोड़ में ठीक हो सकती थी, उसके लिए करीब 22 करोड़ का इस्टीमेट बनाया गया था। जो लिस्ट बनाई गई थी, उसमें से ज्यादातर सड़कें पहले से ही ठीक थी। इसके बाद इस इस्टीमेट को खारिज कर नया बनाया गया था।