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आखिर कब होगा तबादला : बीते सात साल, 40 हजार जेबीटी बेहाल
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विभाग ने अक्तूबर 2023 में पूरी की थी औपचारिकताएं, आज तक अलाॅट नहीं हुए स्टेशन
चंडीगढ़। हरियाणा में पिछले सात साल से 40 हजार जेबीटी (जूनियर बेसिक ट्रेनिंग) अध्यापकों को तबादले का इंतजार है। 2016 के बाद से प्रदेश में जेबीटी अध्यापकों के तबादले नहीं हो सके हैं। अब पांच माह पहले शिक्षा विभाग में सामान्य तबादला ड्राइव को लेकर तमाम प्रक्रिया पूरी कर ली थी। बावजूद इसके अब तक विभाग ने जेबीटी टीचर्स को स्टेशन अलाॅट नहीं किए हैं। खास बात यह है कि खुद शिक्षा मंत्री विभाग के अधिकारियों को जल्द तबादले के लिए निर्देश दे चुके हैं, बावजूद इसके आज तक तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। अब जेबीटी अध्यापक विधानसभा सत्र के बाद शिक्षा मंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे।
ट्रांसफर पॉलिसी के तहत एक शिक्षक अधिकतम पांच सालों तक एक स्कूल में रह सकता है। लेकिन 2016 के बाद से ट्रांसफर पोर्टल न खुलने के कारण सभी शिक्षक सात सालों से एक ही स्कूल में पढ़ा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद सरकार ने अगस्त 2023 में तबादला प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत अक्तूबर महीने में साल 2004, 2011 और 2017 में नियुक्ति पाने वाले जेबीटी को जिले भी अलॉट कर दिए थे। जिले अलॉट होने के बाद अगला चरण इन शिक्षकों को ब्लॉक व स्कूल अलॉट होने का था, लेकिन जिले अलॉट होने के बाद तबादले की इस प्रक्रिया पर विराम लग गया।
बिगड़ा हुआ है विद्यार्थियों और अध्यापकों का अनुपात
इस समय कई प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक नहीं हैं तो कहीं पर विद्यार्थी कम हैंं। लेकिन वहां पर अध्यापकों का अनुपात अधिक है। 2020 में अंतर जिला तबादले हुए थे। इनके स्थान पर खाली हुए पदों पर नए अध्यापक नहीं आए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद पद खाली हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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नियम पूरे करके दोबारा शुरू हो प्रक्रिया
शिक्षक तबादला संघर्ष समिति के राज्य प्रधान कृष्ण निर्माण ने कहा कि शिक्षामंत्री और सीएम से भी राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल मिल चुका है, हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। हमारी मांग है कि अध्यापकों को स्टेशन अलाॅट किए जाएं, चाहे उनके तबादले बेशक नए शिक्षा सत्र के बाद किए जाएं। इस बारे में दोबारा से शिक्षा मंत्री से मुलाकात की जाएगी।
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चंडीगढ़। हरियाणा में पिछले सात साल से 40 हजार जेबीटी (जूनियर बेसिक ट्रेनिंग) अध्यापकों को तबादले का इंतजार है। 2016 के बाद से प्रदेश में जेबीटी अध्यापकों के तबादले नहीं हो सके हैं। अब पांच माह पहले शिक्षा विभाग में सामान्य तबादला ड्राइव को लेकर तमाम प्रक्रिया पूरी कर ली थी। बावजूद इसके अब तक विभाग ने जेबीटी टीचर्स को स्टेशन अलाॅट नहीं किए हैं। खास बात यह है कि खुद शिक्षा मंत्री विभाग के अधिकारियों को जल्द तबादले के लिए निर्देश दे चुके हैं, बावजूद इसके आज तक तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। अब जेबीटी अध्यापक विधानसभा सत्र के बाद शिक्षा मंत्री से मिलकर अपनी बात रखेंगे।
ट्रांसफर पॉलिसी के तहत एक शिक्षक अधिकतम पांच सालों तक एक स्कूल में रह सकता है। लेकिन 2016 के बाद से ट्रांसफर पोर्टल न खुलने के कारण सभी शिक्षक सात सालों से एक ही स्कूल में पढ़ा रहे हैं। लंबे इंतजार के बाद सरकार ने अगस्त 2023 में तबादला प्रक्रिया शुरू की थी। इस प्रक्रिया के तहत अक्तूबर महीने में साल 2004, 2011 और 2017 में नियुक्ति पाने वाले जेबीटी को जिले भी अलॉट कर दिए थे। जिले अलॉट होने के बाद अगला चरण इन शिक्षकों को ब्लॉक व स्कूल अलॉट होने का था, लेकिन जिले अलॉट होने के बाद तबादले की इस प्रक्रिया पर विराम लग गया।
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बिगड़ा हुआ है विद्यार्थियों और अध्यापकों का अनुपात
इस समय कई प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक नहीं हैं तो कहीं पर विद्यार्थी कम हैंं। लेकिन वहां पर अध्यापकों का अनुपात अधिक है। 2020 में अंतर जिला तबादले हुए थे। इनके स्थान पर खाली हुए पदों पर नए अध्यापक नहीं आए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद पद खाली हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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नियम पूरे करके दोबारा शुरू हो प्रक्रिया
शिक्षक तबादला संघर्ष समिति के राज्य प्रधान कृष्ण निर्माण ने कहा कि शिक्षामंत्री और सीएम से भी राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल मिल चुका है, हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। हमारी मांग है कि अध्यापकों को स्टेशन अलाॅट किए जाएं, चाहे उनके तबादले बेशक नए शिक्षा सत्र के बाद किए जाएं। इस बारे में दोबारा से शिक्षा मंत्री से मुलाकात की जाएगी।