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अन्य राज्यों में फंसे चंडीगढ़ के लोगों को कब लाएगा प्रशासन
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चंडीगढ़। यूटी प्रशासन एनआरआई की तो चंडीगढ़ वापसी करा रहा है, लेकिन शहर के वह छात्र और कर्मचारी जो अन्य राज्यों में फंसे हुए हैं, उन्हें कब लाया जाएगा, इस पर अधिकारी मौन हैं। इस समस्या को लेकर पूर्व पार्षद और वकील सतिंदर सिंह ने प्रशासक वीपी सिंह बदनौर, एडवाइजर मनोज परिदा और अन्य को एक पत्र लिखकर शिकायत की है। उन्होंने कहा है कि प्रशासन दूसरे राज्यों में फंसे छात्रों व कर्मचारियों को निकालने का प्रयास नहीं कर रहा है।
सतिंदर सिंह ने अपने पत्र में एक मामले का भी जिक्र किया है, जो बेंगलुरु में नौकरी करता था। लॉकडाउन हुआ तो प्रशासन की तरफ से कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं होने पर उसे हिमाचल सरकार की मदद से शहर लौटना पड़ा। सेक्टर-44डी निवासी शुभम पांडेय ने बताया कि वह बेंगलुरु में जॉब करते हैं और लॉकडाउन के बाद से ही वहां फंसे हुए थे। लॉकडाउन 2.0 से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को घर वापसी के लिए सरकार ने कुछ राहत देना शुरू किया था। इसके बाद ही उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के पास शहर लौटने के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। उन्हें पता चला कि हिमाचल प्रदेश द्वारा वहां फंसे अपने लोगों के लिए ट्रेन चलाई जा रही है, जिस पर उन्होंने अप्लाई किया और तुरंत उनका पास बनकर आ गया। इसके बाद वह बेंगलुरु से हिमाचल ऊना ट्रेन के जरिए पहुंच गए।
चंडीगढ़ से अभी तक नहीं मिला पास, स्टेटस पेंडिंग
ऊना पहुंचने के बाद उन्होंने फिर चंडीगढ़ आने के लिए अप्लाई किया, जिसका अभी तक स्टेटस पेंडिंग आ रहा है। हालांकि इस दौरान हिमाचल ऊना प्रशासन की तरफ से उन्हें पास बनाकर दे दिया गया, जिससे वह चंडीगढ़ अपने शहर पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार की तरफ से सभी व्यवस्थाएं की गई थीं, जिसके चलते वह शहर पहुंच पाए। वह चंडीगढ़ प्रशासन से अपील करना चाहते हैं कि उसे इस तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि उनके जैसे और जो लोग फंसे हुए हैं, उन्हें शहर वापस लाया जा सके और उन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े।
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पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अभी तक शहर से बाहर फंसे लोगों को निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मांग की तरफ ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अभी भी शहर के 1200 के करीब छात्र व कर्मचारी दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं।
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सतिंदर सिंह ने अपने पत्र में एक मामले का भी जिक्र किया है, जो बेंगलुरु में नौकरी करता था। लॉकडाउन हुआ तो प्रशासन की तरफ से कोई मदद मिलने की उम्मीद नहीं होने पर उसे हिमाचल सरकार की मदद से शहर लौटना पड़ा। सेक्टर-44डी निवासी शुभम पांडेय ने बताया कि वह बेंगलुरु में जॉब करते हैं और लॉकडाउन के बाद से ही वहां फंसे हुए थे। लॉकडाउन 2.0 से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को घर वापसी के लिए सरकार ने कुछ राहत देना शुरू किया था। इसके बाद ही उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के पास शहर लौटने के लिए अप्लाई किया था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। उन्हें पता चला कि हिमाचल प्रदेश द्वारा वहां फंसे अपने लोगों के लिए ट्रेन चलाई जा रही है, जिस पर उन्होंने अप्लाई किया और तुरंत उनका पास बनकर आ गया। इसके बाद वह बेंगलुरु से हिमाचल ऊना ट्रेन के जरिए पहुंच गए।
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चंडीगढ़ से अभी तक नहीं मिला पास, स्टेटस पेंडिंग
ऊना पहुंचने के बाद उन्होंने फिर चंडीगढ़ आने के लिए अप्लाई किया, जिसका अभी तक स्टेटस पेंडिंग आ रहा है। हालांकि इस दौरान हिमाचल ऊना प्रशासन की तरफ से उन्हें पास बनाकर दे दिया गया, जिससे वह चंडीगढ़ अपने शहर पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार की तरफ से सभी व्यवस्थाएं की गई थीं, जिसके चलते वह शहर पहुंच पाए। वह चंडीगढ़ प्रशासन से अपील करना चाहते हैं कि उसे इस तरफ ध्यान देना चाहिए, ताकि उनके जैसे और जो लोग फंसे हुए हैं, उन्हें शहर वापस लाया जा सके और उन्हें परेशानी का सामना ना करना पड़े।
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पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा अभी तक शहर से बाहर फंसे लोगों को निकालने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मांग की तरफ ध्यान देना चाहिए, क्योंकि अभी भी शहर के 1200 के करीब छात्र व कर्मचारी दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं।