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खिलाड़ी जब आपकी टीम से खेल रहा तो उसे प्रमाणपत्र क्यों नहीं दे रहे : हाईकोर्ट

Tue, 25 Jun 2024 06:42 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Jun 2024 06:42 AM IST
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When a player is playing for your team then why are you not giving him a certificate: High Court
चंडीगढ़। निशानेबाजी में चंडीगढ़ की टीम का हिस्सा बनकर शहर का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी को केवल इस आधार पर स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी करने से इन्कार करना कि वह अन्य राज्य से है, मनमाना और अन्यायपूर्ण निर्णय है। यूटी प्रशासन की खेल नीति किसी अन्य राज्य के खिलाड़ी (जिसने शहर का प्रतिनिधित्व किया हो) को सर्टिफिकेट जारी करने से नहीं रोकती। यह टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन के प्रमाणपत्र जारी न करने के आदेश को खारिज कर दिया।
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मोहाली निवासी मनराज सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया है कि वह खिलाड़ी हैं और चंडीगढ़ के लिए निशानेबाजी की प्रतियोगिताएं खेलते रहे हैं। उन्हें पंजाब यूनिवर्सिटी में पांच वर्षीय लॉ पाठ्यक्रम में खेल कोटे में प्रवेश लेना है। ऐसे में उन्होंने यूटी प्रशासन से स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट मांगा था। याची का कहना है कि वह मोहाली में रहते हैं इसलिए यूटी प्रशासन ने उन्हें सर्टिफिकेट देने से इन्कार कर दिया।
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वहीं, पंजाब सरकार ने चंडीगढ़ के लिए खेलने के चलते स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी करने से इन्कार कर दिया। ऐसे में याची ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट देने का निर्देश देने की अपील की थी। हाईकोर्ट में चंडीगढ़ प्रशासन ने कहा कि याची मोहाली में रहते हैं, वहीं से उन्होंने दसवीं और बारहवीं की है, इसलिए पंजाब उन्हें ग्रेडेशन सर्टिफिकेट जारी करे। दूसरी तरफ, पंजाब सरकार ने कहा कि मनराज चंडीगढ़ की शूटिंग टीम से खेलते हैं, इसलिए चंडीगढ़ सर्टिफिकेट जारी करे। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा था कि जब याची आपकी टीम से खेल रहा है तो आप उसे सर्टिफिकेट क्यों नहीं जारी कर रहे।
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प्रशासन की दलील थी कि जो खिलाड़ी चंडीगढ़ में दो साल तक न पढ़ा हो उसे सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि यहां न तो कोई आरक्षण का मामला है और न ही प्रशासन के किसी संस्थान का। यहां एक खिलाड़ी का मामला हमारे समक्ष है जो प्रतिभावान है और उसे उसका हक मिलना ही चाहिए। प्रशासन की दो साल की चंडीगढ़ में नियमित पढ़ाई की दलील केवल उन संस्थानों में प्रवेश के लिए है जो कि प्रशासन के अधीन हों। यहां मामला पंजाब यूनिवर्सिटी का है और प्रशासन की नीति इसके लिए बाहरी राज्य के खिलाड़ी को प्रमाणपत्र जारी करने से नहीं रोकती जिसने शहर का प्रतिनिधित्व किया हो।
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