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चिकित्सा में नई पहल, PGI में आर्टिफीशियल मरीजों के इलाज से ट्रेनिंग

Fri, 16 Sep 2016 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 16 Sep 2016 02:08 AM IST
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What is the artificial patient, their treatment will now PGI
चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल - फोटो : File Photo
पीजीआई में मरीजों के बारे में तो आपने कई बार सुना होगा, और अब आर्टिफिशियल मरीजों के ईलाज बारे में सुनकर थोड़ा अजीब जरूर लगेगा है, लेकिन ये सच है। पीजीआई में पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट के डॉक्टर अब आर्टिफिशियल मरीजों पर ट्रेनिंग करेंगे। मेडिकल एजुकेशन में इसे एडवांस सिम्यूलेशन ट्रेनिंग कहते हैं। इसके लिए पीजीआई दो सिम्यूलेशन खरीद रहा है। एक  नियोनेटल के लिए और दूसरा पीडियाट्रिक्स के लिए। इनकी लागत 30 लाख है।
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डिपार्टमेंट के डॉक्टर दीपक बंसल ने बताया कि मौजूदा समय में पेशेंट काफी जागरूक हैं। ट्रेनिंग पर ज्यादा फोकस दिया जा रहा है। अब कोई भी डॉक्टर लाइव पेशेंट पर गलती नहीं करना चाहते हैं। इसलिए पहले डॉक्टरों को आर्टिफिशियल पेशेंट पर ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे स्किल्स में बढ़ोतरी होगी। अनेक देशों में एमबीबीएस के पाठ्यक्रम में एडवांस सिम्यूलेशन ट्रेनिंग को शामिल कर लिया गया है। इसे लेकर पीजीआई में दो दिन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया था। इसमें देशभर के कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। ये प्रोग्राम डॉक्टर व नर्स दोनों के लिए फायदेमंद है।
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जानिए क्या है अर्टिफिशियल पेशेंट ?

What is the artificial patient, their treatment will now PGI
artificial patient - फोटो : Demo Pic
डा. दीपक बंसल के अनुसार आर्टिफिशियल पेशेंट एक प्रकार से रोबोट हैं। पहले भी डमी पेशेंट पर ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम चल रहा है, लेकिन अब नए फीचर के साथ आर्टिफिशियल पेशेंट को लाया गया है। इसमें हाई टेक्नोलॉजी है। इन पेशेंट में हार्ट बीट होगी, ब्लड प्रेशर ले सकते हैं, ईसीजी चेक कर सकते हैं, आंखे खुलेंगी और बंद होगी, यूरीन भी आएगा। ये मूव भी कर सकते हैं।

ऐसे ट्रेनिंग लेंगे डॉक्टर 
डा. बंसल ने बताया कि रेजिडेंट डॉक्टर या नर्स को एक आर्टिफिशियल मरीज दे दिया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि दस साल का एक बच्चा आया है और उसकी हार्ट बीट कम होती जा रही है। डॉक्टर उसे दवा देंगे और सीनियर डॉक्टर उसकी निगरानी करेंगे। सीनियर डॉक्टर के पास आर्टिफिशियल मरीज का कंट्रोल होगा। यदि डॉक्टर ने ठीक दवा दी है तो उसकी हार्ट बीट बढ़ाते जाएंगे। यदि दवा गलत दी गई होगी तो उसकी बीट कम करते जाएंगे। साथ ही डॉक्टरों को बताएंगे कि दवा गलत दी जा रही है।
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