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हरियाणा में आफत बनकर गिरी बारिश, 10 लोगों की मौत, 24 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 25 Sep 2018 10:05 AM IST
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हरियाणा में भारी बारिश
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हरियाणा में भी बारिश के चलते यहां अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, यमुना का जलस्तर भी बढ़ गया है। अगले 24 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। प्रदेश में पिछले तीन दिन से बारिश का कहर जारी है। सोमवार को हरियाणा में मकान की छत ढहने और कार पर पेड़ गिरने की घटनाओं में महिला समेत पांच लोगों की मौत हो गई और करीब 20 लोग घायल हो गए। पिछले 72 घंटे में प्रदेश में बारिश के कारण हुए हादसों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश से जलभराव हुआ और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर स्कूल का जर्जर भवन होने के कारण कक्षाएं भी नहीं लगीं। मंडियों में आई किसानों की फसल भी भीग गई। यमुना व घग्गर नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
अंबाला के गांव गरनाला में सोमवार को कार पर पेड़ गिर गया। हादसे में घायल महिला कैलाशो की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई और परिवार के 6 सदस्य भी घायल हो गए। परिवार पंचकूला स्थित कोट कछुआ से रिश्तेदार के यहां भोग में आ रहा था। वहीं गांव जंडली में टैक्सी चालक बेटे के बाहर जाने पर पड़ोसी के घर में सो रहे धर्म सिंह (45) की छत गिरने से मौत हो गई और पड़ोसी घायल हो गया।
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कैंट में रामबाग रोड पर गोशाला कॉलोनी में घर पर पेड़ गिरने से तीन लोग घायल हो गए। कुरुक्षेत्र में गांव शरीफगढ़ में अलसुबह 4:00 बजे मकान की छत गिरने से हरदेव सिंह (55) की मौत हो गई। कैथल के जालंधरी मोहल्ले में छत गिरने से चार साल की बच्ची घायल हो गई। करनाल के नीलोखेड़ी में मकान की छत गिरने से सूबे सिंह (70) की मौत हो गई। इंद्री में भी छत ढहने से छह लोग घायल हो गए।
जींद में रविवार रात तेज बारिश के कारण झोपड़ी गिरने से खजानी देवी (65) की मौत हो गई। महेंद्रगढ़ के गांव मुडायन में रविवार देर शाम खराब मौसम के कारण प्लग में करंट आ गया था। गांव के अमर सिंह (60) पुत्र हुकमा राम की प्लग में तार लगाते समय करंट लगने से मौत हो गई। गौरतलब है कि शनिवार को अंबाला के दलीपगढ़ में दो मकानों की छत गिरने से भाई-बहन की हो गई थी। सिरसा के डबवाली क्षेत्र के गांव नीलियांवाली में मां-बेटी की मौत हो गई थी।
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प्रदेश के अधिकतर जिलों में बारिश से जलभराव हुआ और फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर स्कूल का जर्जर भवन होने के कारण कक्षाएं भी नहीं लगीं। मंडियों में आई किसानों की फसल भी भीग गई। यमुना व घग्गर नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक बारिश का सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ेगा। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
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अंबाला के गांव गरनाला में सोमवार को कार पर पेड़ गिर गया। हादसे में घायल महिला कैलाशो की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई और परिवार के 6 सदस्य भी घायल हो गए। परिवार पंचकूला स्थित कोट कछुआ से रिश्तेदार के यहां भोग में आ रहा था। वहीं गांव जंडली में टैक्सी चालक बेटे के बाहर जाने पर पड़ोसी के घर में सो रहे धर्म सिंह (45) की छत गिरने से मौत हो गई और पड़ोसी घायल हो गया।
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कैंट में रामबाग रोड पर गोशाला कॉलोनी में घर पर पेड़ गिरने से तीन लोग घायल हो गए। कुरुक्षेत्र में गांव शरीफगढ़ में अलसुबह 4:00 बजे मकान की छत गिरने से हरदेव सिंह (55) की मौत हो गई। कैथल के जालंधरी मोहल्ले में छत गिरने से चार साल की बच्ची घायल हो गई। करनाल के नीलोखेड़ी में मकान की छत गिरने से सूबे सिंह (70) की मौत हो गई। इंद्री में भी छत ढहने से छह लोग घायल हो गए।
जींद में रविवार रात तेज बारिश के कारण झोपड़ी गिरने से खजानी देवी (65) की मौत हो गई। महेंद्रगढ़ के गांव मुडायन में रविवार देर शाम खराब मौसम के कारण प्लग में करंट आ गया था। गांव के अमर सिंह (60) पुत्र हुकमा राम की प्लग में तार लगाते समय करंट लगने से मौत हो गई। गौरतलब है कि शनिवार को अंबाला के दलीपगढ़ में दो मकानों की छत गिरने से भाई-बहन की हो गई थी। सिरसा के डबवाली क्षेत्र के गांव नीलियांवाली में मां-बेटी की मौत हो गई थी।
पहाड़ों में बारिश, बंद रहेगा कालका-शिमला रेलमार्ग
कालका शिमला ट्रैक
पहाड़ों में मूसलाधार बारिश के चलते रेल मंडल ने कालका-शिमला रेलमार्ग पर रेल परिचालन मंगलवार को बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। अंबाला रेल मंडल की सीनियर डीसीएम प्रवीण गौड़ द्विवेदी ने बताया कि पहाड़ों में भारी बारिश के चलते चट्टान खिसक रही है और इस वजह से रेलमार्ग को खतरा है। इसी के चलते मंगलवार को रेलमार्ग पर मंगलवार को अस्थायी तौर पर परिचालन बंद करने का निर्णय लिया गया है। बता दें कि करीब 96 किमी लंबे इस रेलमार्ग पर विभिन्न स्थानों पर चट्टान गिरने का खतरा बना रहता है।
कहां क्या स्थिति
- भिवानी के बवानीखेड़ा में 24 घंटे में 107 एमएम बरसात।
- तोशाम में अलखपुरा माइनर और चांग में सैय मोड़ के पास नहर टूट गई, आधा दर्जन गांवों में बाढ़ जैसे हालात
- भिवानी के जताई गांव में एक मकान गिरा
- कैथल में 36 घंटे के दौरान 197 एमएम बारिश
- अंबाला में बारिश के कारण ट्विन सिटी में 30 से ज्यादा पेड़ गिर चुके हैं।
- फतेहाबाद में घग्गर नदी का जल स्तर 4650 क्यूसिक दर्ज किया गया।
- यमुनानगर में यमुना नदी का जलस्तर 90 हजार क्यूसिक पहुंच गया है।
- जींद के भंभेवा गांव में सोनीपत-जींद रेलवे लाइन धंसी
कहां क्या स्थिति
- भिवानी के बवानीखेड़ा में 24 घंटे में 107 एमएम बरसात।
- तोशाम में अलखपुरा माइनर और चांग में सैय मोड़ के पास नहर टूट गई, आधा दर्जन गांवों में बाढ़ जैसे हालात
- भिवानी के जताई गांव में एक मकान गिरा
- कैथल में 36 घंटे के दौरान 197 एमएम बारिश
- अंबाला में बारिश के कारण ट्विन सिटी में 30 से ज्यादा पेड़ गिर चुके हैं।
- फतेहाबाद में घग्गर नदी का जल स्तर 4650 क्यूसिक दर्ज किया गया।
- यमुनानगर में यमुना नदी का जलस्तर 90 हजार क्यूसिक पहुंच गया है।
- जींद के भंभेवा गांव में सोनीपत-जींद रेलवे लाइन धंसी
हथिनीकुंड बैराज पर पहुंचा 90 हजार क्यूसिक पानी
हथिनीकुंड बैराज
हथनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ाने से सिंचाई विभाग ने लो प्लड घोषित कर दिया है। हथनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर शाम पांच बजे तक 88974 क्यूसिक तक पहुंच गया था। यमुना का जलस्तर बढ़ने से सिंचाई विभाग ने स्थानीय नहरों में पानी की सप्लाई बंद कर दी गई।
पहाड़ों में लगातार हो रही बरसात से हथनीकुंड बैराज पर सुबह सात बजे से ही यमुना का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। सुबह सात बजे 49189 क्यूसिक दर्ज किया गया। आठ बजे जलस्तर घटकर 46132 क्यूसिक रह गया था। ग्यारह बजे 60198 क्यूसिक और शाम को चार बजे 64909 क्यूसिक और पांच बजे तक यमुना का जलस्तर 88974 तक पहुंच गया।
सिंचाई विभाग के एसडीओ धर्मपाल ने बताया कि यमुना में सतर हजार क्यूसिक पानी आने पर यमुना में सिल्ट, पत्थर, रेत, गटका, मिट्टी आदि बहकर आते हैं और अधिक मात्रा में मिट्टी पत्थर आने से नहरें ब्लाकेज हो जाती है। इसलिए उनको बंद कर दिया जाता है और पूरा पानी यमुना में ही छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यमुना का जलस्तर रात सात बजे के आसपास 90 हजार क्यूसिक पानी है और रात में इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है। फिलहाल विभाग की ओर से लो प्लड घोषित कर दिया है।
पहाड़ों में लगातार हो रही बरसात से हथनीकुंड बैराज पर सुबह सात बजे से ही यमुना का जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। सुबह सात बजे 49189 क्यूसिक दर्ज किया गया। आठ बजे जलस्तर घटकर 46132 क्यूसिक रह गया था। ग्यारह बजे 60198 क्यूसिक और शाम को चार बजे 64909 क्यूसिक और पांच बजे तक यमुना का जलस्तर 88974 तक पहुंच गया।
सिंचाई विभाग के एसडीओ धर्मपाल ने बताया कि यमुना में सतर हजार क्यूसिक पानी आने पर यमुना में सिल्ट, पत्थर, रेत, गटका, मिट्टी आदि बहकर आते हैं और अधिक मात्रा में मिट्टी पत्थर आने से नहरें ब्लाकेज हो जाती है। इसलिए उनको बंद कर दिया जाता है और पूरा पानी यमुना में ही छोड़ दिया जाता है। उन्होंने बताया कि यमुना का जलस्तर रात सात बजे के आसपास 90 हजार क्यूसिक पानी है और रात में इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है। फिलहाल विभाग की ओर से लो प्लड घोषित कर दिया है।
24 फीसदी बरसात, फसलों को 80% तक नुकसान
हरियाणा में भारी बारिश
प्रदेश से रूठा मानसून विदाई से पहले ऐसा सक्रिय हुआ कि पिछले तीन दिनों में किसानों ने बारिश से तौबा कर ली। मौसम विभाग के अनुसार मानसून सीजन की 24 फीसदी बारिश केवल तीन दिनों में हो गई। लेकिन इस बीच फसलों को 80 फीसदी तक नुकसान होने की आशंका है। सोमवार को ही प्रदेश में 7 हजार से अधिक किसानों ने फसल नुकसान की शिकायत दर्ज कराई है। मानसून सीजन के चार माह (जून-सितंबर) के दौरान प्रदेश में 450 मिलीमीटर औसत बारिश होती है। प्रदेश में अब तक 401.6 एमएम बारिश हुई है। पिछले तीन दिनों जमकर बारिश होने के बावजूद 50 एमएम कम बारिश हुई है।
वहीं, देरी से बरसात होने के कारण पकाव अवस्था में पहुंची खरीफ की फसलों को 20 से 50 फीसदी का नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, कृषि विभाग का कहना है कि गिरदावरी के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी, लेकिन दबे स्वर में वह भी अगेती धान, कपास और बाजरे में 20 फीसदी तक नुकसान मान रहे हैं। जबकि किसानों का कहना है पकाव अवस्था में पहुंचीं फसलों में कम से कम 50 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। सोमवार को कृषि विभाग में किसानों ने फसलों के नुकसान की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। प्रदेश में 30 लाख हेक्टेयर के करीब खरीफ की बुवाई हुई है।
किसानों को सलाह...
प्रदेश में लगी झड़ी के कारण धान, बाजरा, मूंग और कपास की फसल को नुकसान हुआ है। फसल पूरी तरह से पक कर तैयार है, ऐसे में बारिश नुकसानदायक है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, कपास, मूंग की फसल में जहां पानी भरा हो, उसकी निकासी करें। लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसल को नुकसान पहुंचेगा। जहां खाली खेत हो, वहां किसान पानी निकासी न करें। धान की फसल में एक लेवल तक ही पानी रहने दें।
वहीं, देरी से बरसात होने के कारण पकाव अवस्था में पहुंची खरीफ की फसलों को 20 से 50 फीसदी का नुकसान होने की आशंका है। हालांकि, कृषि विभाग का कहना है कि गिरदावरी के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी, लेकिन दबे स्वर में वह भी अगेती धान, कपास और बाजरे में 20 फीसदी तक नुकसान मान रहे हैं। जबकि किसानों का कहना है पकाव अवस्था में पहुंचीं फसलों में कम से कम 50 प्रतिशत तक नुकसान हो चुका है। सोमवार को कृषि विभाग में किसानों ने फसलों के नुकसान की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दी हैं। प्रदेश में 30 लाख हेक्टेयर के करीब खरीफ की बुवाई हुई है।
किसानों को सलाह...
प्रदेश में लगी झड़ी के कारण धान, बाजरा, मूंग और कपास की फसल को नुकसान हुआ है। फसल पूरी तरह से पक कर तैयार है, ऐसे में बारिश नुकसानदायक है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बाजरा, कपास, मूंग की फसल में जहां पानी भरा हो, उसकी निकासी करें। लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसल को नुकसान पहुंचेगा। जहां खाली खेत हो, वहां किसान पानी निकासी न करें। धान की फसल में एक लेवल तक ही पानी रहने दें।
बारिश से धंसी सोनीपत रेलवे लाइन, रोकी ट्रेनें
रेल ट्रेक
- फोटो : demo pic
जींद में रविवार रात व सोमवार दिन भर हुई तेज बारिश से ललित खेड़ा गांव के पास रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन की मिट्टी धंस गई। इसके चलते शाम छह बजे जींद पहुंचने वाली यात्री गाड़ी को गोहाना में ही रोक दिया गया। हालांकि रेलवे ने लाइन की अस्थायी मरम्मत करवाई और इसकी जांच की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता होने पर ही गाड़ी को चलाया जाएगा।
रेलवे स्टेशन अधीक्षक प्रेम किशोर के अनुसार सोनीपत से चलकर शाम करीब छह बजे जींद पहुंचने वाली यात्री गाड़ी के आने से पहले सूचना मिली कि ललित खेड़ा गांव के पास रेलवे लाइन की मिट्टी धंस गई है। इसके चलते अधिकारियों ने गाड़ी को गोहाना में ही रोक दिया। यहां रेलवे लाइन के छह-सात स्लीपर के नीचे से मिट्टी पूरी तरह निकल गई थी। रेलवे लाइन खोखली हो गई थी। इससे हादसे का अंदेशा बढ़ गया था।
इसके बाद रेलवे के अधिकारी हरकत में आए और ललित खेड़ा के पास से रेलवे लाइन की मरम्मत की। इसके बाद करीब सात बजे तक रेलवे लाइन ठीक हो सकी। इसके बाद शाम चार बजे जींद पहुंचने वाली 74039 गाड़ी को सवा सात बजे यहां से निकाला गया। वहीं गोहाना में रोकी गई ट्रेन 74039 को अभी तक नहीं चलाया गया है। रेलवे अधिकारी निरीक्षण करने के बाद ही आगे का फैसला लेंगे।
रेलवे स्टेशन अधीक्षक प्रेम किशोर के अनुसार सोनीपत से चलकर शाम करीब छह बजे जींद पहुंचने वाली यात्री गाड़ी के आने से पहले सूचना मिली कि ललित खेड़ा गांव के पास रेलवे लाइन की मिट्टी धंस गई है। इसके चलते अधिकारियों ने गाड़ी को गोहाना में ही रोक दिया। यहां रेलवे लाइन के छह-सात स्लीपर के नीचे से मिट्टी पूरी तरह निकल गई थी। रेलवे लाइन खोखली हो गई थी। इससे हादसे का अंदेशा बढ़ गया था।
इसके बाद रेलवे के अधिकारी हरकत में आए और ललित खेड़ा के पास से रेलवे लाइन की मरम्मत की। इसके बाद करीब सात बजे तक रेलवे लाइन ठीक हो सकी। इसके बाद शाम चार बजे जींद पहुंचने वाली 74039 गाड़ी को सवा सात बजे यहां से निकाला गया। वहीं गोहाना में रोकी गई ट्रेन 74039 को अभी तक नहीं चलाया गया है। रेलवे अधिकारी निरीक्षण करने के बाद ही आगे का फैसला लेंगे।
घग्घर का जलस्तर बढ़ने से मंडराया बाड़ खतरा, प्रशासन अलर्ट
हरियाणा में भारी बारिश
मानसून खत्म होने के पश्चात हिमाचल, पंजाब व हरियाणा में हुई भारी बारिश से ओटू हैड पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश से घग्घर नदी हरियाणा के पिछले इलाकों में उफान पर है और पंजाब व हरियाणा में घग्घर के आसपास के इलाकों को हाई अलर्ट पर कर दिया गया है। गुहला चीका हैड पर पानी 32 हजार को पार कर चुका है और पानी की निरंतरता बनी हुई है। ओटू हैड पर सुबह तक पानी पहुंचने की संभावना है और ओटू हैड पर पानी 40 हजार क्यूसेक के लेवल को पार कर सकता है। घग्घर नदी पर ओटू हैड पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
पंजाब के कई क्षेत्रों में तो पानी का जलस्तर काफी उच्चतम स्तर पर बताया जा रहा है। ओटू हैड पर खतरे के बादल पूरी तरह मंडराने लगे हैं। लगातार बढ़ रहा है जलस्तर फिलहाल ओटू हैड पर करीब एक हजार क्यूसेक पानी पहुंचा है। इसके अलावा घग्घर नदी के पिछले क्षेत्रों में जलस्तर काफी ऊंचा बताया जा रहा है। जिसकी वजह से ओटू हैड पर पानी बढने की काफी संभावना है। गुहला चीका में अब तक करीब 32 हजार क्यूसेक पानी है। जोकि लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लगातार बढ रहे जलस्तर से ओटू हैड व आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। 2010 के समय करीब 24 हजार क्यूसेक पानी से क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी और भारी तबाही मचाई थी।
मौजूदा जलस्तर इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। जिसके कारण 2010 का मंजर याद आने लगता है। प्रशासन अभी से तैयारियों में जुटा गया है। अगर पानी की यही स्थिति रही तो अंदरुनी क्षेत्र की फसलें डूबना तय है और घग्घर नदी से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। घग्घर के बाहरी क्षेत्र के किसान ट्यूबवैलों से ही फसल की सिंचाई करते हैं। बरसात से किसानों को थोड़ी राहत अवश्य मिली है। वहीं क्षेत्र के किसानों को घग्घर व घग्घर से निकलने वाली नहरों से काफी फायदा होता है। घग्घर से आसपास के करीब 100 गांवों का रकबा सिंचित होता है। घग्घर के पानी से फसलों का फैलाव अधिक होता है और भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
पंजाब के कई क्षेत्रों में तो पानी का जलस्तर काफी उच्चतम स्तर पर बताया जा रहा है। ओटू हैड पर खतरे के बादल पूरी तरह मंडराने लगे हैं। लगातार बढ़ रहा है जलस्तर फिलहाल ओटू हैड पर करीब एक हजार क्यूसेक पानी पहुंचा है। इसके अलावा घग्घर नदी के पिछले क्षेत्रों में जलस्तर काफी ऊंचा बताया जा रहा है। जिसकी वजह से ओटू हैड पर पानी बढने की काफी संभावना है। गुहला चीका में अब तक करीब 32 हजार क्यूसेक पानी है। जोकि लगातार बढ़ता ही जा रहा है। लगातार बढ रहे जलस्तर से ओटू हैड व आसपास के इलाकों में खतरा बढ़ गया है। 2010 के समय करीब 24 हजार क्यूसेक पानी से क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी और भारी तबाही मचाई थी।
मौजूदा जलस्तर इससे कहीं अधिक बताया जा रहा है। जिसके कारण 2010 का मंजर याद आने लगता है। प्रशासन अभी से तैयारियों में जुटा गया है। अगर पानी की यही स्थिति रही तो अंदरुनी क्षेत्र की फसलें डूबना तय है और घग्घर नदी से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। घग्घर के बाहरी क्षेत्र के किसान ट्यूबवैलों से ही फसल की सिंचाई करते हैं। बरसात से किसानों को थोड़ी राहत अवश्य मिली है। वहीं क्षेत्र के किसानों को घग्घर व घग्घर से निकलने वाली नहरों से काफी फायदा होता है। घग्घर से आसपास के करीब 100 गांवों का रकबा सिंचित होता है। घग्घर के पानी से फसलों का फैलाव अधिक होता है और भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है।
किसानों की फसलों पर प्राकृतिक आपदा की दोहरी मार
हरियाणा में भारी बारिश
हरियाणा के किसानों पर प्रकृति की दोहरी मार पड़ी है। पहले मौसमी बीमारियों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, अब तीन दिन से हो रही बारिश ने किसानों की कमर तोड़ने का काम किया है। धान, गन्ना, कपास और सब्जियां हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गई हैं। प्रदेश के अनेक जिलों में धान की तैयार फसल बरसात के कारण पूरी तरह बिछ गई है। अगर एक-दो दिन बरसात यूं ही जारी रही तो धान पूरी तरह से खराब हो सकता है। चूंकि, बरसात से पहले हरियाणा के अधिकतर जिलों में धान की फसल को काला तेला रोग लगा था, जिससे किसान काफी परेशान रहे।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के बावजूद काफी मात्रा में धान का तना कमजोर हो गया था। भारी बारिश के कारण धान तना कमजोर होने के कारण अधिकांश बिछ गया है। अगर यह फिर से खड़ा न हुआ और खेतों में पानी भरा रहा तो किसानों को आर्थिक तौर पर भारी चपत लगेगी। इसका असर प्रदेश के धान उत्पादन पर भी पड़ सकता है। बरसात रुकने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पूरे प्रदेश में धान की फसल कितने हेक्टेयर में बर्बाद हुई है।
गन्ना-नरमा पर भी बरसात का कहर
भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि कपास को पहले सफेद मक्खी ने अपनी चपेट में लिया था, जिससे काफी फसल बर्बाद हो चुकी है। रही फसल पर बारिश कहर बनकर टूटी है। सफेद मक्खी से खराब फसल की गिरदावरी का काम भी अभी पूरा नहीं हो पाया है। अब बरसात से बड़ा नुकसान हुआ है। गन्ना भी बारिश के कारण अनेक जिलों में काफी मात्रा में बिछ गया है। अगर बारिश जारी रही और खेतों से पानी की निकासी न हुई तो इसका तना भी जमीन पर गिरे-गिरे सड़ जाएगा।
और चढ़ेंगे सब्जियों के दाम
भाकियू नेता कर्म सिंह मथाना ने बताया कि सब्जियों को भी भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा है। इससे मार्केट में मौसमी व बेमौसमी सब्जियों के दाम और चढ़ने की संभावना है। खेतों में बारिश का पानी भरने से सब्जियां खराब हुई हैं। इसके साथ ही आलू और गोभी की अगेती बिजाई भी कम से कम दस दिन लेट हो गई है। जिन किसानों ने गोभी व आलू की बिजाई कर दी थी, उन्हें बीज सड़ने की चिंता सता रही है।
सरकार किसानों की करेगी पूरी मदद : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ है। भारी बरसात से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बीमा व गैर बीमा वाले किसानों की फसल की गिरदावरी कराकर उचित मुआवजा दिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव के बावजूद काफी मात्रा में धान का तना कमजोर हो गया था। भारी बारिश के कारण धान तना कमजोर होने के कारण अधिकांश बिछ गया है। अगर यह फिर से खड़ा न हुआ और खेतों में पानी भरा रहा तो किसानों को आर्थिक तौर पर भारी चपत लगेगी। इसका असर प्रदेश के धान उत्पादन पर भी पड़ सकता है। बरसात रुकने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि पूरे प्रदेश में धान की फसल कितने हेक्टेयर में बर्बाद हुई है।
गन्ना-नरमा पर भी बरसात का कहर
भाकियू प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि कपास को पहले सफेद मक्खी ने अपनी चपेट में लिया था, जिससे काफी फसल बर्बाद हो चुकी है। रही फसल पर बारिश कहर बनकर टूटी है। सफेद मक्खी से खराब फसल की गिरदावरी का काम भी अभी पूरा नहीं हो पाया है। अब बरसात से बड़ा नुकसान हुआ है। गन्ना भी बारिश के कारण अनेक जिलों में काफी मात्रा में बिछ गया है। अगर बारिश जारी रही और खेतों से पानी की निकासी न हुई तो इसका तना भी जमीन पर गिरे-गिरे सड़ जाएगा।
और चढ़ेंगे सब्जियों के दाम
भाकियू नेता कर्म सिंह मथाना ने बताया कि सब्जियों को भी भारी मात्रा में नुकसान पहुंचा है। इससे मार्केट में मौसमी व बेमौसमी सब्जियों के दाम और चढ़ने की संभावना है। खेतों में बारिश का पानी भरने से सब्जियां खराब हुई हैं। इसके साथ ही आलू और गोभी की अगेती बिजाई भी कम से कम दस दिन लेट हो गई है। जिन किसानों ने गोभी व आलू की बिजाई कर दी थी, उन्हें बीज सड़ने की चिंता सता रही है।
सरकार किसानों की करेगी पूरी मदद : धनखड़
कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने कहा है कि सरकार किसानों के साथ है। भारी बरसात से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बीमा व गैर बीमा वाले किसानों की फसल की गिरदावरी कराकर उचित मुआवजा दिया जाएगा।