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पंजाब यूनिवर्सिटी में नौ-नौ हजार रुपये देकर पाई थी नौकरी, अब तीन महीने से नहीं मिल रहा वेतन
Sat, 23 May 2020 12:32 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 12:32 PM IST
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पंजाब यूनिवर्सिटी में ठेकेदारी पर रखे गए कर्मचारियों ने तीन माह का वेतन न मिलने के बाद व्यवस्था की पोल खोलना शुरू कर दी। कर्मचारियों ने कहा कि ठेकेदार की ओर से उनसे नौ नौ हजार रुपये नौकरी देते समय लिए गए थे। अब तीन माह से वेतन नहीं दिया। इन कर्मचारियों के समर्थन में ज्वाइंट सेक्रेटरी मनप्रीत सिंह माहल आए हैं।
उन्होंने वीसी से लेकर डीसी तक को मिल किया है। इसमें कहा गया है कि इन कर्मियों का वेतन नहीं दिया गया तो यह आंदोलन करने पर विवश होंगे। लॉकडाउन में उनका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। पीयू के निर्माण विभाग ने ठेकेदारों के जरिये 12 कर्मचारियों की भर्तियां की थी। यह कांट्रेक्ट बेस पर थे जो वर्ष 2010 से लेकर अब तक काम करते आ रहे थे।
फरवरी से इन कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया। ठेकेदार को कई बार कहा गया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। आरोप है कि ठेकेदार ने ज्वाइनिंग लेटर तभी दिए थे जब उनसे नौ-नौ हजार रुपये रिश्वत के लिए थे। उन्होंने कहा कि पीयू प्रशासन के अधिकारी भी उनकी नहीं सुन रहे हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो वह परिवारों के साथ आकर वीसी कार्यालय या आवास के बाहर आकर धरना देंगे।
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शुक्रवार को कर्मचारी निर्माण विभाग पहुंचे थे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं दे रहा है।
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उन्होंने वीसी से लेकर डीसी तक को मिल किया है। इसमें कहा गया है कि इन कर्मियों का वेतन नहीं दिया गया तो यह आंदोलन करने पर विवश होंगे। लॉकडाउन में उनका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। पीयू के निर्माण विभाग ने ठेकेदारों के जरिये 12 कर्मचारियों की भर्तियां की थी। यह कांट्रेक्ट बेस पर थे जो वर्ष 2010 से लेकर अब तक काम करते आ रहे थे।
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फरवरी से इन कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया। ठेकेदार को कई बार कहा गया, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। आरोप है कि ठेकेदार ने ज्वाइनिंग लेटर तभी दिए थे जब उनसे नौ-नौ हजार रुपये रिश्वत के लिए थे। उन्होंने कहा कि पीयू प्रशासन के अधिकारी भी उनकी नहीं सुन रहे हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो वह परिवारों के साथ आकर वीसी कार्यालय या आवास के बाहर आकर धरना देंगे।
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शुक्रवार को कर्मचारी निर्माण विभाग पहुंचे थे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं दे रहा है।