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उल्टी गंगा बह रही, उल्टा हुआ बहाव, केवट कैसे धोएगा अब रामचंद्र के पांव

Mon, 28 Sep 2020 01:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2020 01:57 AM IST
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Vomiting Ganges is flowing, reverse flow, how will the boat wash away Ramchandra's feet
चंडीगढ़। उल्टी गंगा बह रही, उल्टा हुआ बहाव, केवट कैसे धोएगा अब रामचंद्र के पांव.. बिहार के कवि शैलेंद्र सिंह ने जैसे ही यह कविता सुनाई सभी ने उनका तालियों से स्वागत किया। मौका था रविवार को उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) पटियाला द्वारा एक विशेष ऑनलाइन अखिल भारतीय दिव्यांग ई-कवि सम्मेलन का। इसका आयोजन ‘गुगल मीट एप’ के माध्यम से किया गया। संचालन उत्तर प्रदेश के सीतापुर से कवि कमलेश मौर्य ‘मुदु’ ने किया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रोफेसर सौभाग्य वर्धन ने बताया कि इस कवि कई कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं।
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इस अवसर पर छिंदबाड़ा मध्य प्रदेश से कवयित्री अंजुमन मंसूरी ‘आरजू’ ने अपनी रचना जय-जय भारत, जय मातृभूमि, जय जय जननी धरती माता.. सुनाई। इसके बाद कानपुर से डॉ. मनोज कुमार ने अपनी रचना मैं आंखों को पढ़ सकता हूं, तुम मानो या ना मानो. सुनाई। दिल्ली से डॉ. दयाल सिंह पंवार, बाराबंकी से ओज कवि शिवकुमार ‘व्यास’, अरुण कुमार सहित कई कवियों ने रचना सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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