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वायरल इफेक्ट: अस्पताल में भीड़ इतनी कि रोजाना मारपीट की नौबत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 19 Sep 2016 01:00 AM IST
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GMCH 16 Chandigarh
- फोटो : अमर उजाला
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जीएमएसएच 16 की इमरजेंसी में रोजाना मारपीट की स्थिति बन रही है। मरीजों को इलाज में देरी और जगह नहीं मिलने पर डाक्टरों व कर्मचारियों से लड़ने पर उतारू हो जाते हैं। रविवार को भी एक मरीज की इमरजेंसी में तैनात कर्मियों के साथ झड़प हो गई। आरोप है कि मरीज व उसके परिजनों ने इमरजेंसी के कर्मी को थप्पड़ भी लगा दिए। उसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने मामले को शांत कराया। बताया जा रहा है कि मरीज काफी देर से लाइन में खड़ा था, लेकिन उसका नंबर नहीं आ रहा था। इसलिए वे गुस्से में आ गए।
वायरल के मरीजों की बढ़ती भीड़ से बिगड़े जीएमएसएच 16 के हालात पर देर शाम अस्पताल प्रशासन ने कई बड़े फैसले लिए। वायरल से पीड़ित मरीजों को बेड नहीं मिलने की स्थिति पर सभी प्लान सर्जरी को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। इससे कई वार्ड में बेड खाली हो जाएंगे और इसमें बुखार के मरीजों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। देर शाम 40 बेड की पहचान भी कर ली गई है। देर रात इमरजेंसी के मरीजों को उनमें शिफ्ट करने की प्रकिया जारी थी। मेडिसिन डिपार्टमेंट के डाक्टर भी देर शाम इमरजेंसी पहुंचे और उन्होंने हालात का जायजा लिया।
इमरजेंसी में दाखिल मरीजों के भोजन की व्यवस्था भी की गई। सिटीब्यूटीफुल इस समय वायरल बुखार की चपेट में है। अस्पतालों की इमरजेंसी फुल हो चुकी हैं। कारिडोर में स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रविवार को तो मरीजों की लाइन इमरजेंसी के बाहर तक पहुंच गई थी। रविवार को इमरजेंसी में 400 से ज्यादा मरीज पहुंचे। जगह नहीं मिलने के कारण कुछ लोग अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर थे।
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वायरल के मरीजों की बढ़ती भीड़ से बिगड़े जीएमएसएच 16 के हालात पर देर शाम अस्पताल प्रशासन ने कई बड़े फैसले लिए। वायरल से पीड़ित मरीजों को बेड नहीं मिलने की स्थिति पर सभी प्लान सर्जरी को फिलहाल कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। इससे कई वार्ड में बेड खाली हो जाएंगे और इसमें बुखार के मरीजों को शिफ्ट कर दिया जाएगा। देर शाम 40 बेड की पहचान भी कर ली गई है। देर रात इमरजेंसी के मरीजों को उनमें शिफ्ट करने की प्रकिया जारी थी। मेडिसिन डिपार्टमेंट के डाक्टर भी देर शाम इमरजेंसी पहुंचे और उन्होंने हालात का जायजा लिया।
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इमरजेंसी में दाखिल मरीजों के भोजन की व्यवस्था भी की गई। सिटीब्यूटीफुल इस समय वायरल बुखार की चपेट में है। अस्पतालों की इमरजेंसी फुल हो चुकी हैं। कारिडोर में स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। रविवार को तो मरीजों की लाइन इमरजेंसी के बाहर तक पहुंच गई थी। रविवार को इमरजेंसी में 400 से ज्यादा मरीज पहुंचे। जगह नहीं मिलने के कारण कुछ लोग अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर थे।
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इमरजेंसी में भी दो घंटे का इंतजार
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- फोटो : अमर उजाला
भास्कर कालोनी से आए सुभाष ने बताया वह अपने बेटे को लेकर इमरजेंसी में आए थे। उनके बेटे को दो दिन से 104 डिग्री बुखार है। रविवार सुबह वे दस बजे इमरजेंसी पहुंच गए थे। बेटा खड़ा तक नहीं हो पा रहा था। कई बार मिन्नतें कीं, फिर भी इलाज नहीं मिला। करीब 12 बजे नंबर आया। उसके बाद सैंपल देने में करीब एक घंटा लग गया।
जीएमसीएच 32 में भी ट्राली खत्म
वायरल पेशेंट की संख्या का बोझ जीएमसीएच 32 में पड़ रहा है। इमरजेंसी और कारिडोर पूरी तरह से फुल हैं। ट्रालियां भी खत्म हो चुकी हैं। एक-एक बेड पर दो-मरीज लिटाए जा रहे हैं। डाक्टरों की संख्या भी काफी कम है। खासकर मेडिसिन वार्ड में। जीएमसीएच 32 प्रशासन की ओर से भी किसी तरह के खास इंतजाम नहीं किए गए हैं।
जीएमसीएच 32 में भी ट्राली खत्म
वायरल पेशेंट की संख्या का बोझ जीएमसीएच 32 में पड़ रहा है। इमरजेंसी और कारिडोर पूरी तरह से फुल हैं। ट्रालियां भी खत्म हो चुकी हैं। एक-एक बेड पर दो-मरीज लिटाए जा रहे हैं। डाक्टरों की संख्या भी काफी कम है। खासकर मेडिसिन वार्ड में। जीएमसीएच 32 प्रशासन की ओर से भी किसी तरह के खास इंतजाम नहीं किए गए हैं।
दिल्ली व हरियाणा में फीवर क्लीनिक चंडीगढ़ में क्यों नहीं
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- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली व हरियाणा में भी वायरल के मरीजों का बोझ काफी बढ़ गया है। भीड़ को देखते हुए वहां की सरकारों ने फीवर क्लीनिक खोल दिए हैं, ताकि मरीजों बुखार के मरीजों को थोड़ी राहत दी जा सके। दिल्ली में तो कुछ जगहों पर मोबाइल फीवर क्लीनिक खोले गए हैं, जो एरिया में जाकर लोगों का बुखार चेक कर रहे हैं।
संदिग्ध मरीज दिखने पर उन्हें पैरासिटामॉल और ओआरएस के घोल दिए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को उनके एरिया में देखा जा सके। इससे मरीजों को अस्पतालों में आने से रोका जा रहा है। चंडीगढ़ में भी ऐसे हालात बन गए है, लेकिन अब तक चंडीगढ़ में फीवर क्लीनिक जैसे उपाय नहीं उठाए गए। चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी के नेता कौशल ने कहा है कि चंडीगढ़ प्रशासन को तत्काल इस दिशा में कुछ सोचना होगा। यदि जल्दी कदम नहीं उठाए गए तो हालात संभालने मुश्किल हो जाएंगे।
संदिग्ध मरीज दिखने पर उन्हें पैरासिटामॉल और ओआरएस के घोल दिए जा रहे हैं, ताकि मरीजों को उनके एरिया में देखा जा सके। इससे मरीजों को अस्पतालों में आने से रोका जा रहा है। चंडीगढ़ में भी ऐसे हालात बन गए है, लेकिन अब तक चंडीगढ़ में फीवर क्लीनिक जैसे उपाय नहीं उठाए गए। चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी के नेता कौशल ने कहा है कि चंडीगढ़ प्रशासन को तत्काल इस दिशा में कुछ सोचना होगा। यदि जल्दी कदम नहीं उठाए गए तो हालात संभालने मुश्किल हो जाएंगे।