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Punjab: अब खुलेंगी 2007 में हुए टीचिंग फेलो भर्ती घोटाले की परतें, HC की फटकार के बाद विजिलेंस जांच शुरू
Sat, 06 May 2023 09:06 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 06 May 2023 09:06 AM IST
सार
2007 में पंजाब के शिक्षा विभाग में 10 हजार टीचिंग फेलो की भर्ती की थी। आरोप है कि उस समय फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई लोग नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे थे। इस दौरान यह भी सवाल उठा था कि चयन प्रक्रिया में कई स्तर पर खामियां थीं।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : File Photo
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विस्तार
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की फटकार के बाद 2007 में हुई टीचिंग फेलो की भर्ती मामले की जांच विजिलेंस ने दोबारा शुरू कर दी। सालों पुराने केस की अब सारी परतें खुलेंगी। विजिलेंस ने शुक्रवार को उस समय की चयन समिति से जुड़े चार अधिकारियों से पूछताछ की है। पूछताछ की प्रक्रिया सुबह से शाम तक चली। इस मामले में विजिलेंस अधिकार कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। हालांकि विजिलेंस को एक महीने में अपनी जांच कर यह रिपोर्ट हाईकोर्ट में सौंपनी है।
2007 में पंजाब के शिक्षा विभाग में 10 हजार टीचिंग फेलो की भर्ती की थी। आरोप है कि उस समय फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई लोग नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे थे। इस दौरान यह भी सवाल उठा था कि चयन प्रक्रिया में कई स्तर पर खामियां थीं। योग्य लोगों को मेरिट सूची से बाहर कर अयोग्य लोगों को मौका दिया। कई साल तक पीड़ित इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे लेकिन 2019 में सरकार ने इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी थी।
पता चला है कि चार साल में उस केस में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद गुरदासपुर निवासी एक व्यक्ति ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने विजिलेंस के अधिकारियों पर सख्ती दिखाई। साथ ही फटकार लगाते हुए कहा था कि इस मामले में एक महीने में उचित जांच कर रिपोर्ट उन्हें दी जाए। वरना इस केस को सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
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सभी विभागों को 15 दिन में विजिलेंस को सौंपना होगा रिकॉर्ड
विजिलेंस ब्यूरो में अब विभिन्न विभागों से दस्तावेज न मिलने की वजह से केस लंबे नहीं लटेंगे। इस मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। साथ ही सभी विभागों को आदेश दिए हैं कि अगर विजिलेंस द्वारा किसी भी केस से जुड़े दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो पहल के आधार पर रिकॉर्ड विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा जाए। 15 दिन में विभागों को हर हालत में रिकॉर्ड विजिलेंस को सौंपना होगा। भ्रष्टाचार उन्मूलन एक्ट 1988 की धारा-17 एक के मुताबिक सरकार से पहले अनिवार्य अनुमति हासिल करने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया पहल के आधार पर होगी।
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2007 में पंजाब के शिक्षा विभाग में 10 हजार टीचिंग फेलो की भर्ती की थी। आरोप है कि उस समय फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई लोग नौकरी हासिल करने में कामयाब रहे थे। इस दौरान यह भी सवाल उठा था कि चयन प्रक्रिया में कई स्तर पर खामियां थीं। योग्य लोगों को मेरिट सूची से बाहर कर अयोग्य लोगों को मौका दिया। कई साल तक पीड़ित इसके खिलाफ आवाज उठाते रहे लेकिन 2019 में सरकार ने इस मामले की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी थी।
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पता चला है कि चार साल में उस केस में कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद गुरदासपुर निवासी एक व्यक्ति ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने विजिलेंस के अधिकारियों पर सख्ती दिखाई। साथ ही फटकार लगाते हुए कहा था कि इस मामले में एक महीने में उचित जांच कर रिपोर्ट उन्हें दी जाए। वरना इस केस को सीबीआई को सौंपा जा सकता है।
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सभी विभागों को 15 दिन में विजिलेंस को सौंपना होगा रिकॉर्ड
विजिलेंस ब्यूरो में अब विभिन्न विभागों से दस्तावेज न मिलने की वजह से केस लंबे नहीं लटेंगे। इस मामले को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है। साथ ही सभी विभागों को आदेश दिए हैं कि अगर विजिलेंस द्वारा किसी भी केस से जुड़े दस्तावेज मांगे जाते हैं, तो पहल के आधार पर रिकॉर्ड विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा जाए। 15 दिन में विभागों को हर हालत में रिकॉर्ड विजिलेंस को सौंपना होगा। भ्रष्टाचार उन्मूलन एक्ट 1988 की धारा-17 एक के मुताबिक सरकार से पहले अनिवार्य अनुमति हासिल करने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया पहल के आधार पर होगी।