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हरियाणाः पशुओं का इलाज करते-करते मरीज खुद बन गए पशु चिकित्सक

Wed, 18 Jul 2018 09:41 AM IST
शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा)
शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा) Updated Wed, 18 Jul 2018 09:41 AM IST
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Veterinary doctors in Haryana are being victim of brussulosis
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala
पशु अस्पतालों में पशुओं का इलाज करते-करते करीब 250 वेटनरी सर्जन, वीएलडीए व अन्य स्टाफ सदस्य खुद मरीज बन गए है। दरअसल ये सब पशुओं की लाइलाज बीमारी ब्रुसेलोसिस के शिकार है। सरकारी पशु अस्पताल के स्टाफ सदस्य ही नहीं अनेक प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सक, पशुपालक भी इस खतरनाक बीमारी के शिकार हो चुके है। यह एक संक्रामक बीमारी है जो ब्रुसेला नामक बैक्टीरिया से फैलती है।
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मगर सबसे चिंता करने वाली बात यह है कि ना तो इसकी जांच किसी सरकारी अस्पताल में होती है और ना ही निजी अस्पताल से। सिर्फ हिसार स्थित पशु अस्पताल की पशु लैब में यह जांच होती है।  चिकित्सक व स्टाफ सदस्य वहां अनाधिकृत रूप से जांच करवाते है। पशुओं में इन दिनों ब्रुसेलोसिस नामक बिमारी तेजी से फैल रही है। यह बिमारी एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। पहले यह बीमारी भेड़-बकरियों में पाई जाती थी मगर अब यह भैंसों में भी खूब पाई जा रही है।
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यह लाइलाज बीमारी है और एक बार इसकी चपेट में आने के बाद पशु का ठीक हो पाना मुश्किल है। इसके पशु शरीर पर अलग-अलग तरह प्रभाव पड़ता है और अधिकतर समय पशुओं में बांझपन की शिकायत होती है और ऐसे पशुओं की उम्र भी कम ही रहती है। अब पशुओं से यह बीमारी इंसानों में फैलने लगी है और सबसे ज्यादा शिकार पशु चिकित्सक हो रहे है। भिवानी जिले में सरकारी अस्पताल में दो वेटनरी सर्जन, दो वीएलडीए और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस बीमारी की चपेट में आ चुके है।
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इसके अलावा भी पांच-छह अन्य प्राइवेट पशु चिकित्सक और कुछ पशुपालक भी इसकी चपेट में है। प्रदेशभर में बात की जाए तो 250 से अधिक पशु चिकित्सक, वीएलडीए, स्टाफ सदस्य, निजी पशु चिकित्सक व पशुपालक इसके शिकार है। 

ऐसे फैलती है बीमारी 
ब्रुसेलोसिस एक संक्रामक बीमारी है और यह संक्रमित पशुओं से फैलती है। अक्सर चिकित्सक, अन्य स्टाफ सदस्य और पशुपालक पशुओं के प्रसव के दौरान यह बीमारी फैलती है। यदि किसी चिकित्सक के हाथ में चोट या कट लगा है तो यह बैक्टीरिया मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाता है। इसके अलावा आंखों या मुंह में संक्रमित मरीज की छींटा लग जाए तो भी व्यक्ति इसकी चपेट में आता है। पशु गर्भधारण करने के बाद गर्भकाल के अंतिम तीन महीनों में ज्यादा इस बीमारी की चपेट में आते है। यह एक पशु से दूसरे पशु में फैलती है। 


इस तरह करें बचाव 
- संक्रमित पशु का प्रसव कराते समय विशेष सावधानी रखे। हाथों में दस्ताने पहने और आंखों पर चश्मा लगाए। 
- संक्रमित पशु का दूध गर्म करके प्रयोग करें। दूध से भी संक्रमण फैलने की संभावना है।  
- चिड़चिड़ापन ज्यादा होने, बुखार और जोड़ों में दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह करें। 
- इस बीमारी में एल्कोहल का सेवन खतरनाक साबित हो सकता है। 

 

ये है लक्षण 
- पीड़ित व्यक्ति को मलेरिया बुखार की तरह सर्दी लगती है व बार-बार बुखार होता है और रात के समय ज्यादा बुखार होता है। 
- पीड़ित व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ा हो जाता है और बात-बात पर झगड़ा करता है। 
- शरीर के जोड़ों में दर्द और सूजन रहता है 
- मनुष्य के अंडकोष में सुजन आता है। 
टीबी की तरह लंबा चलता है इलाज 
यह बैक्टिरियल डिजिज है और यह बैक्टिरिया कोशिका के अंदर रहता है। जब वह बाहर निकलता है तभी दवा काम करती है। ऐसे में इस बीमारी का टीबी की बीमारी की तरह लंबा इलाज चलता है। 


किसी अस्पताल या लैब में में नहीं होता ब्रुसेलोसिस का टेस्ट 
ब्रुसेलोसिस एक खतरनाक बीमारी है। मगर खतरनाक बात यह है कि मनुष्यों के लिए बने किसी अस्पताल या लैब में इसका टेस्ट नहीं होता। ना ही इंसानों के चिकित्सक को इस बीमारी के बारे में पता है जिससे इसके इलाज में भी कठिनाई आती है। इस बीमारी का टेस्ट सिर्फ पशु यूनिवर्सिटी हिसार लुवास में ही होता है यानी पशुओं की लैब में ही इंसानों का टेस्ट होता है। मगर कुछ पशु चिकित्सक व अन्य हिसार पशु केंद्र में अनाधिकृत तरीके से टेस्ट करवाकर बीमारी का इलाज करवा रहे है। 



एक्सपर्ट व्यू 
ब्रुसेलोसिस एक खतरनाक बीमारी है और बैक्टिरियल डिजिज है। यह प्रदेश में तेजी से पशुओं के साथ इंसानों में फैल रही है। जो चिकित्सक या पशुपालक ब्रुसेलोसिस बीमारी से पीड़ित पशु के संपर्क में आता है, उसमें यह बीमारी फैलने की ज्यादा संभावना रहती है। ऐसे में सावधानी रखनी चाहिए। प्रदेशभर में अनेक पशु चिकित्सक, वीएलडीए, पशु चिकित्सक इसकी चपेट में है। मनुष्य की बीमारियों की विभिन्न लैबों में इस बीमारी का पता नहीं लगता, जो ज्यादा चिंता का विषय है।  डा. जयपाल सिंह, वेटनरी सर्जन

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