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पीयू खोलें वीसी, स्नातक वर्ग चुनाव करवाएं, लोकतंत्र न कुचलें : चढ़ूनी
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चंडीगढ़। पीयू में कई दिन से चल रहे छात्रों के प्रदर्शन को समर्थन देने किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी पहुंचे। उन्होंने पीयू के अधिकारियों को चेतावनी दी है कि कैंपस खोलकर पढ़ाई शुरू करवाएं।
इसके साथ ही सीनेट स्नातक वर्ग चुनाव करवाएं। वीसी अपनी हठ छोड़ें। यह लोकतंत्र है और यहां सबकी सुनी जाती है। छात्रों की बातों को मानें और जल्द आगे की कार्रवाई शुरू करें। किसान मोर्चा पूरी तरह छात्रों के साथ है।
पीयू के एडमिन ब्लॉक के बाहर धरना दे रहे छात्रों के बीच किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पहुंचकर पीयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने छात्रों की बातें सुनकर कहा कि पीयू के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं जो गलत है। पीयू छात्रों का विश्वविद्यालय है। इसमें छात्रों की बातों को मानना चाहिए, क्योंकि यह विद्यार्थी देश की रीढ़ हैं। अब कोरोना का बहाना नहीं चलेगा। ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करें, क्योंकि ऑनलाइन कक्षाएं केवल नाम की हैं। पूरे देश में आंदोलन चल रहे हैं। भारत सरकार व्यापारिक क्षेत्र को समर्थन कर रही है। शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य हर चीज बेची जा रही है। बेरोजगारी बढ़ रही है। सभी लोग एकजुट हों और इसका जवाब दें।
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मोगा की घटना निंदनीय, नव उदारवादी मॉडल का विरोध
धरना स्थल पर पहुंचे किसान नेता सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि मोगा के किसानों पर किया लाठीचार्ज निंदनीय है। किसानों, मजदूरों और विद्यार्थियों की मांगें नहीं सुनी जा रही हैं। इन्हें केवल वोट बैंक समझा जा रहा है। किसान, मजदूर और विद्यार्थी एकजुट होकर विरोध करें। शिक्षा के निजीकरण को विरोध के जरिए ही रोका जा सकेगा। विश्वविद्यालयों पर कारपोरेट घरानों का कब्जा न होने दें। उन्होंने नव उदारवादी मॉडल का विरोध किया।
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इसके साथ ही सीनेट स्नातक वर्ग चुनाव करवाएं। वीसी अपनी हठ छोड़ें। यह लोकतंत्र है और यहां सबकी सुनी जाती है। छात्रों की बातों को मानें और जल्द आगे की कार्रवाई शुरू करें। किसान मोर्चा पूरी तरह छात्रों के साथ है।
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पीयू के एडमिन ब्लॉक के बाहर धरना दे रहे छात्रों के बीच किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने पहुंचकर पीयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने छात्रों की बातें सुनकर कहा कि पीयू के अधिकारी मनमानी कर रहे हैं जो गलत है। पीयू छात्रों का विश्वविद्यालय है। इसमें छात्रों की बातों को मानना चाहिए, क्योंकि यह विद्यार्थी देश की रीढ़ हैं। अब कोरोना का बहाना नहीं चलेगा। ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करें, क्योंकि ऑनलाइन कक्षाएं केवल नाम की हैं। पूरे देश में आंदोलन चल रहे हैं। भारत सरकार व्यापारिक क्षेत्र को समर्थन कर रही है। शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य हर चीज बेची जा रही है। बेरोजगारी बढ़ रही है। सभी लोग एकजुट हों और इसका जवाब दें।
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मोगा की घटना निंदनीय, नव उदारवादी मॉडल का विरोध
धरना स्थल पर पहुंचे किसान नेता सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि मोगा के किसानों पर किया लाठीचार्ज निंदनीय है। किसानों, मजदूरों और विद्यार्थियों की मांगें नहीं सुनी जा रही हैं। इन्हें केवल वोट बैंक समझा जा रहा है। किसान, मजदूर और विद्यार्थी एकजुट होकर विरोध करें। शिक्षा के निजीकरण को विरोध के जरिए ही रोका जा सकेगा। विश्वविद्यालयों पर कारपोरेट घरानों का कब्जा न होने दें। उन्होंने नव उदारवादी मॉडल का विरोध किया।