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वाड्रा लैंड डील: जांच कमेटी ही ‘जांच’ के दायरे में

Tue, 30 Dec 2014 08:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Dec 2014 08:26 AM IST
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vadra land deal: investigation committee, under

निजाम बदलने के साथ ही हरियाणा की अफसरशाही भी बदल गई है। वाड्रा लैंड डील मामले में गठित जांच कमेटी के फैसले पर राजस्व विभाग ने सवाल खड़ा कर दिया है। लिहाजा राजस्व विभाग की रिपोर्ट पर अगर सरकार ने संज्ञान लिया तो इस मामले में गठित जांच कमेटी की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

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राजस्व विभाग ने रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सरकार को जांच गठित कमेटी से स्पष्टीकरण मांगना चाहिए कि स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी शिकोहपुर (गुड़गांव) के मामले में तथ्यों को नजरअंदाज क्यों किया गया जबकि वाड्रा की कंपनी के पास सरप्लस जमीन थी।
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जांच कमेटी की रिपोर्ट पर राजस्व विभाग के रुख के बाद अब मौजूदा सरकार तय करेगी कि कमेटी की रिपोर्ट अमल करने योग्य है या नहीं। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में गठित इस कमेटी में तीन आईएएस अधिकारी हैं। कमेटी की अध्यक्षता वर्तमान में सेवानिवृत्त हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस कृष्ण मोहन कर रहे थे।

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नहीं मिल पाएगी खुली छूट

vadra land deal: investigation committee, under

राजस्व विभाग की सिफारिशों पर सरकार ने और गौर किया तो आने वाले समय में सीएलयू देने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को भी खुली छूट नहीं मिल पाएगी। लाइसेंस देने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को डायरेक्टर लैंड कंसोलिडेशन से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ सकता है।

इस बात की सिफारिश भी राजस्व विभाग की रिपोर्ट में है। फिलहाल यह रिपोर्ट राजस्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के पास है। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी नहीं है। पढ़ने के बाद ही वे इस पर कुछ कह सकेंगे।

गायब पन्नों का सुराग नहीं
आईएएस अशोक खेमका की आपत्ति के बाद वाड्रा लैंड डील मामले से गायब पन्ने अभी तक हरियाणा सरकार को नहीं मिले हैं। इस मामले में जांच के लिए गठित कमेटी को दस दिन का समय दिया गया था।

सोमवार को यह समय पूरा हो गया है, लेकिन रिपोर्ट नहीं आई है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक कमेटी को अब 31 दिसंबर तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।

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