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चंडीगढ़ः रंग लाई मुहिम और खत्म हुआ इंतजार, 18 महीने में मिल जाएगी डंपिंग ग्राउंड से निजात
Thu, 19 Sep 2019 01:17 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 19 Sep 2019 01:17 PM IST
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डंपिंग ग्राउंड
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ की सबसे बड़ी समस्या डड्डूमाजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड से लोगों को अगले 18 महीने में निजात मिलने जा रही है। इसके लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बड़ा फैसला लिया गया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में एडवाइजर मनोज परिदा ने डंपिंग ग्राउंड को हटाने के लिए कंपनी को टेंडर देने पर सहमति दे दी है। डंपिंग ग्राउंड हटाने के लिए कंपनी को लगभग 18 महीने का समय दिया गया है। साथ बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की कमेटी ने कुल छह प्रोजेक्ट के टेंडर करने का फैसला लिया है। जल्द ही कंपनियां इन पांचों प्रोजेक्टों पर काम शुरू कर देंगी।
सभी प्रोजेक्ट अक्तूबर माह में शुरू हो जाएंगे। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने डंपिंग ग्राउंड की माइनिंग के लिए नागपुर की कंपनी मेसर्स एसएमएस लिमिटेड को चुना है। हालांकि कंपनी ने 40 करोड़ रुपये में टेंडर के लिए आवेदन किया था, लेकिन स्मार्ट सिटी ने 34 करोड़ में डील फाइनल की है। इस प्रोजेक्ट का टेंडर होने से अब वर्षों से डड्डूमाजरा में जमा लगभग पांच लाख मीट्रिक टन कचरे का पहाड़ समाप्त हो जाएगा। सालों से डंपिंग ग्राउंड हटाने की मांग कर रहे लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। स्थानीय लोग लंबे समय से इसके लिए संघर्ष कर रहे थे।
प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से ज्वाइंट एक्शन कमेटी के लोगों ने कई बार मुलाकात भी की। साथ ही कई बार धरने दिए और सदन में पार्षद ने भी बराबर डंपिंग ग्राउंड हटाने का मुद्दा उठाया। आखिरकार लोगों की जीत हुई और इस डंपिंग ग्राउंड को हटाने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत टेंडर किया गया।
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सभी प्रोजेक्ट अक्तूबर माह में शुरू हो जाएंगे। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने डंपिंग ग्राउंड की माइनिंग के लिए नागपुर की कंपनी मेसर्स एसएमएस लिमिटेड को चुना है। हालांकि कंपनी ने 40 करोड़ रुपये में टेंडर के लिए आवेदन किया था, लेकिन स्मार्ट सिटी ने 34 करोड़ में डील फाइनल की है। इस प्रोजेक्ट का टेंडर होने से अब वर्षों से डड्डूमाजरा में जमा लगभग पांच लाख मीट्रिक टन कचरे का पहाड़ समाप्त हो जाएगा। सालों से डंपिंग ग्राउंड हटाने की मांग कर रहे लोगों के लिए यह बड़ी खुशखबरी है। स्थानीय लोग लंबे समय से इसके लिए संघर्ष कर रहे थे।
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प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से ज्वाइंट एक्शन कमेटी के लोगों ने कई बार मुलाकात भी की। साथ ही कई बार धरने दिए और सदन में पार्षद ने भी बराबर डंपिंग ग्राउंड हटाने का मुद्दा उठाया। आखिरकार लोगों की जीत हुई और इस डंपिंग ग्राउंड को हटाने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत टेंडर किया गया।
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डंपिंग ग्राउंड का मैटेरियल बाहर भेजने पर ही होगा पेमेंट
स्मार्ट सिटी के जीएम एनपी शर्मा ने बताया कि जेपी प्लांट को लेकर पहले नगर निगम का मामला फंसा हुआ है इसलिए इस बार तय किया गया है कि कंपनी डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले मैटेरियल को शहर से बाहर भेजती जाए और किश्तों पर पेमेंट लेती जाए। एनपी शर्मा ने बताया कि प्रेजेंटेशन के समय कंपनी के अधिकारियों ने बताया था डंपिंग ग्राउंड से तीन तरह का मैटेरियल निकलेगा।
पहला ठोस पदार्थ के रूप में ईंट और कांक्रीट, जिसे सीएंडडी वेस्ट प्लांट में भेजा जाएगा। दूसरा आरडीएफ जो कि सीमेंट बनाने के काम आता है इसलिए इसे सीमेंट प्लांट भेजा जाएगा और तीसरा रेत जैसा पदार्थ निकलेगा, जिसे सड़क बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन तीनों ही मैटेरियल को शहर से बाहर भेजने के लिए कंपनी को ही कहा गया है। जैसे-जैसे मैटेरियल बाहर जाएगा, उसी के अनुसार कंपनी को पेमेंट होती रहेगी।
प्रोजेक्ट -2: ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट से ऑनलाइन हो जाएंगी 28 सरकारी सेवाएं
इसके अलावा कमेटी ने ई गवर्नेंस प्रोजेक्ट का टेंडर करने के लिए भी सहमति दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मेसर्स प्राइस वाटर हाउस कूपर प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिया गया है। 11.50 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को 12 महीने में पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही लगभग सभी सरकारी कामकाज ऑनलाइन हो जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से 28 सरकारी सेवाओं को जोड़ा जाएगा। इसमें ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, बिजली-पानी के बिलों भुगतान, भवन योजनाओं की स्वीकृति संबंधित सभी अनुमतियों के लिए एक एप जारी हो जाएगा। जहां सभी समस्याओं का समाधान भी होगा और घर बैठ कर आवेदन भी कर सकेंगे।
पहला ठोस पदार्थ के रूप में ईंट और कांक्रीट, जिसे सीएंडडी वेस्ट प्लांट में भेजा जाएगा। दूसरा आरडीएफ जो कि सीमेंट बनाने के काम आता है इसलिए इसे सीमेंट प्लांट भेजा जाएगा और तीसरा रेत जैसा पदार्थ निकलेगा, जिसे सड़क बनाने के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन तीनों ही मैटेरियल को शहर से बाहर भेजने के लिए कंपनी को ही कहा गया है। जैसे-जैसे मैटेरियल बाहर जाएगा, उसी के अनुसार कंपनी को पेमेंट होती रहेगी।
प्रोजेक्ट -2: ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट से ऑनलाइन हो जाएंगी 28 सरकारी सेवाएं
इसके अलावा कमेटी ने ई गवर्नेंस प्रोजेक्ट का टेंडर करने के लिए भी सहमति दे दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए मेसर्स प्राइस वाटर हाउस कूपर प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर दिया गया है। 11.50 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट को 12 महीने में पूरा किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होते ही लगभग सभी सरकारी कामकाज ऑनलाइन हो जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से 28 सरकारी सेवाओं को जोड़ा जाएगा। इसमें ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, बिजली-पानी के बिलों भुगतान, भवन योजनाओं की स्वीकृति संबंधित सभी अनुमतियों के लिए एक एप जारी हो जाएगा। जहां सभी समस्याओं का समाधान भी होगा और घर बैठ कर आवेदन भी कर सकेंगे।
प्रोजेक्ट -3: एसयूई मैपिंग प्रोजेक्ट से भवन निर्माण में मिलेगी मदद
वर्तमान में चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिससे पता चल सके कि पेयजल आपूर्ति लाइन, सीवरजे लाइन, फोन की लाइन समेत अन्य जमीन से होकर गुजरने वाली लाइनें कहां से गईं हैं। इससे किसी भी भवन के निर्माण के समय अचानक से भूमिगत पाइप लाइन व तार टूट जाते हैं और सेवाएं बाधित होतीं हैं। यूटिलिटी सर्विसेज इंजीनियरिंग (एसयूई) मैपिंग प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। इसमें जिस तरह एक मानव शरीर का एक्सरे किया जाता है उसी तरह से शहर का भी एक तरह से एक्सरे हो जाएगा। इससे पता चल जाएगा कि कहां से कौन से लाइन गई है। उसके बाद भवन निर्माण की अनुमति देना आसान हो जाएगा और कोई सेवा बाधित नहीं होगी। 6 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को 6 माह में ही कंपनी को पूरा करना होगा।
प्रोजेक्ट -4: स्मार्ट स्कूल के साथ शिक्षा व्यवस्था भी होगी स्मार्ट
बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केतहत स्मार्ट स्कूल बनाने जा रहा है। शहर के चार स्कूलों को इस प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है। सेक्टर 22 का सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 35 का हायर सेकेंडरी स्कूल व सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर 43 के हायर सेकेंडरी स्कूल के 90 कमरों को स्मार्ट बनाने की तैयारी है। सभी कक्षाओं में प्रोजेक्टर, इंटरेक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर के साथ ही पूरे स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर बदला जाएगा। बैंच के साथ बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था होगी। सीबीएसई सिलेबस के अलावा थ्रीडी मॉडल पर बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। इसमें एक शिक्षक भी प्रोजेक्टर पर बच्चों को जानकारियां देने के लिए तैनात रहेगा। 4.80 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को 6 माह में पूरा किया जाना है। इसके अलावा भवन की मरम्मत के लिए 53 लाख रुपये भी दिए जाएंगे।
प्रोजेक्ट -4: स्मार्ट स्कूल के साथ शिक्षा व्यवस्था भी होगी स्मार्ट
बच्चों को बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट केतहत स्मार्ट स्कूल बनाने जा रहा है। शहर के चार स्कूलों को इस प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है। सेक्टर 22 का सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 35 का हायर सेकेंडरी स्कूल व सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर 43 के हायर सेकेंडरी स्कूल के 90 कमरों को स्मार्ट बनाने की तैयारी है। सभी कक्षाओं में प्रोजेक्टर, इंटरेक्टिव बोर्ड, कंप्यूटर के साथ ही पूरे स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर बदला जाएगा। बैंच के साथ बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था होगी। सीबीएसई सिलेबस के अलावा थ्रीडी मॉडल पर बच्चों को शिक्षा दी जाएगी। इसमें एक शिक्षक भी प्रोजेक्टर पर बच्चों को जानकारियां देने के लिए तैनात रहेगा। 4.80 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को 6 माह में पूरा किया जाना है। इसके अलावा भवन की मरम्मत के लिए 53 लाख रुपये भी दिए जाएंगे।
प्रोजेक्ट -5: लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए आएगा स्काडा सिस्टम
शहर के लोगों को शुद्ध पेयजल के लिए स्मार्ट सिटी पानी की पाइप लाइनों पर सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वेजिशन (स्काडा सिस्टम) लगाए जाएंगे। इसके अंतर्गत पाइपों में अंदर तीन स्थानों पर डिसॉल्ड आक्सीजन सेंसर, क्लोरीन सेंसर और प्रेशर सेंसर लगाए जाएंगे। एक जहां से पानी छोड़ा जाता है, दूसरा बीच में और तीसरा जहां से ब्रांच लाइन में यह सिस्टम लगेंगे। इसकी मॉनिटरिंग स्मार्ट सिटी के ऑफिस से ही होगी। यदि कहीं गंदा पानी आता है या पानी से दुर्गंध आती है तो तत्काल उसकी जानकारी सिस्टम पर आ जाएगी। साथ ही किस स्थान से यह समस्या पैदा हो रही है वहां की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। वहीं लोगों की समस्या रहती है कि पानी प्रेशर से नहीं आता है तो इस समस्या को भी ऑफिस में बैठकर ही आसानी से सुलझाया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट को भी छह माह में पूरा किया जाना है।
प्रोजेक्ट -6: 24 घंटे वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी
कमेटी ने 24 घंटे पानी सप्लाई के प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दे दी है। हालांकि इसके लिए फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी से लगभग चर्चा पूरी हो गई है। 440 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स डील करेगा। इस सुविधा के शुरू होने केबाद शहर में 24 घंटे वाटर सप्लाई की सुविधा शुरू हो जाएगी। साथ ही लोगों को पानी की किल्लत से निजात मिलेगी। वैसे भी अक्तूबर माह से कजौली वाटर वर्क्स से आने वाला अतिरिक्त पानी शहर को मिलना शुरू हो जाएगा। इससे इस प्रोजेक्ट को भी लाभ मिलेगा।
प्रोजेक्ट -6: 24 घंटे वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी
कमेटी ने 24 घंटे पानी सप्लाई के प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दे दी है। हालांकि इसके लिए फ्रेंच डेवलपमेंट एजेंसी से लगभग चर्चा पूरी हो गई है। 440 करोड़ के इस प्रोजेक्ट को डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स डील करेगा। इस सुविधा के शुरू होने केबाद शहर में 24 घंटे वाटर सप्लाई की सुविधा शुरू हो जाएगी। साथ ही लोगों को पानी की किल्लत से निजात मिलेगी। वैसे भी अक्तूबर माह से कजौली वाटर वर्क्स से आने वाला अतिरिक्त पानी शहर को मिलना शुरू हो जाएगा। इससे इस प्रोजेक्ट को भी लाभ मिलेगा।
सांसद से लेकर मेयर तक डंपिंग ग्राउंड के मुद्दे पर जीते चुनाव
डंपिंग ग्राउंड हटाने का मुद्दा काफी बड़ा है, सांसद किरण खेर और मेयर राजेश कालिया इसी बलबूते चुनाव जीते हैं। सांसद किरण खेर ने 2013 में डंपिंग ग्राउंड हटाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे लोगों को जूस पिलाकर उठाया था और उसी के बलबूते 2104 में सांसद बनीं। हालांकि पांच साल तक डंपिंग ग्राउंड न हटने पर 2019 में इसका विरोध भी शुरू हुआ तो सांसद ने 100 दिन में डंपिग ग्राउंड हटाने का मुद्दा लाकर वोट को साधने का प्रयास किया, लेकिन 100 दिन में यह हो न सका। उसके बाद मेयर राजेश कालिया भी 2019 में डंपिंग ग्राउंड हटाने का वादा करके मेयर बने। जीतने के बाद सबसे पहले मेयर डंपिंग ग्राउंड ही पहुंचे थे।
तय समय से तीन महीने देरी से हुए टेंडर
टेंडर होने वाले प्रोजेक्ट चुनाव के बाद तत्काल मांगे गए 100 दिन के काम की रूपरेखा में शामिल थे। डंपिंग ग्राउंड को हटाने का टेंडर 23 जुलाई को ही देना था, वहीं 8 जुलाई 2019 को स्मार्ट स्कूल का टेंडर होना था। इसी प्रकार स्काडा के लिए 8 जुलाई, एसयूई मैपिंग केलिए 23 जुलाई, ई गवर्नेंस के लिए 29 जुलाई को टेंडर की तिथि तय की गई थी, लेकिन बैठकों से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक इतना समय निकल गया कि लगभग तीन माह देरी से प्रोजेक्टों का टेंडर हो रहा है। अभी भी कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनका टेंडर होना शेष है।
तय समय से तीन महीने देरी से हुए टेंडर
टेंडर होने वाले प्रोजेक्ट चुनाव के बाद तत्काल मांगे गए 100 दिन के काम की रूपरेखा में शामिल थे। डंपिंग ग्राउंड को हटाने का टेंडर 23 जुलाई को ही देना था, वहीं 8 जुलाई 2019 को स्मार्ट स्कूल का टेंडर होना था। इसी प्रकार स्काडा के लिए 8 जुलाई, एसयूई मैपिंग केलिए 23 जुलाई, ई गवर्नेंस के लिए 29 जुलाई को टेंडर की तिथि तय की गई थी, लेकिन बैठकों से लेकर टेंडर प्रक्रिया तक इतना समय निकल गया कि लगभग तीन माह देरी से प्रोजेक्टों का टेंडर हो रहा है। अभी भी कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिनका टेंडर होना शेष है।