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हाईकोर्ट में यूटी प्रशासन की किरकिरी, 31 साल पहले ही वेटलैंड घोषित हो चुकी है सुखना झील
Tue, 26 Nov 2019 10:51 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 26 Nov 2019 10:51 AM IST
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Sukhna Lake
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सुखना झील को वेटलैंड घोषित करने की प्रक्रिया के बीच सोमवार को चंडीगढ़ प्रशासन की पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में किरकिरी हो गई। क्योंकि यह बात सामने आई है कि सुखना को तो 31 साल पहले 1988 में ही वेटलैंड घोषित किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि अब 31 साल बाद इसे दोबारा वेटलैंड घोषित कर कैसे नियम बनाए जा रहे हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1988 में सुखना को वेटलैंड घोषित किया था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वेटलैंड घोषित करने को लेकर जवाब मांगा तो चंडीगढ़ प्रशासन ने आखिरकार मान लिया है कि 1988 की हुई घोषणा की उन्हें जानकारी नहीं थी, अब सुखना को वेटलैंड घोषित कर इसके नियम बनाए जा रहे हैं ताकि आपत्तियां लेकर इसकी नोटिफिकेशन जारी की जा सके।
इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि बड़े हैरत की बात है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने 2009 में संज्ञान लिया था तब से लेकर अब तक किसी को पता ही नहीं था कि सुखना लेक वेटलैंड है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर इसे वेटलैंड घोषित किया गया है तो इसकी नोटिफिकेशन करनी होगी और उसके लिए आम लोगों से आपत्तियां मंगवानी होंगी। इस पर प्रशासन ने कहा कि यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारी के बाद वेटलैंड अथॉरिटी गठित की गई है।
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कमेटी की 23 जुलाई को पंजाब के राज्यपाल तथा चंडीगढ़ के प्रशासक की अध्यक्षता में दूसरी बैठक हुई थी। बैठक में यह तय किया गया कि सुखना लेक को वेटलैंड घोषित किया जाए ताकि इसके संरक्षण का काम शुरू किया जा सके।
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चंडीगढ़ प्रशासन ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1988 में सुखना को वेटलैंड घोषित किया था। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वेटलैंड घोषित करने को लेकर जवाब मांगा तो चंडीगढ़ प्रशासन ने आखिरकार मान लिया है कि 1988 की हुई घोषणा की उन्हें जानकारी नहीं थी, अब सुखना को वेटलैंड घोषित कर इसके नियम बनाए जा रहे हैं ताकि आपत्तियां लेकर इसकी नोटिफिकेशन जारी की जा सके।
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इस जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि बड़े हैरत की बात है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने 2009 में संज्ञान लिया था तब से लेकर अब तक किसी को पता ही नहीं था कि सुखना लेक वेटलैंड है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर इसे वेटलैंड घोषित किया गया है तो इसकी नोटिफिकेशन करनी होगी और उसके लिए आम लोगों से आपत्तियां मंगवानी होंगी। इस पर प्रशासन ने कहा कि यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारी के बाद वेटलैंड अथॉरिटी गठित की गई है।
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कमेटी की 23 जुलाई को पंजाब के राज्यपाल तथा चंडीगढ़ के प्रशासक की अध्यक्षता में दूसरी बैठक हुई थी। बैठक में यह तय किया गया कि सुखना लेक को वेटलैंड घोषित किया जाए ताकि इसके संरक्षण का काम शुरू किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है कैचमेंट में निर्माण वैध नहीं
चंडीगढ़ प्रशासन ने सोमवार को टाटा कैमलॉट प्रोजक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी देते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है कि सुखना के कैचमेंट में कोई निर्माण नहीं हो सकता। टाटा कैमलॉट प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि सुखना कैचमेंट का एरिया इको सेंसिटिव जोन व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी है। यहां किसी भी प्रकार का निर्माण वैध नहीं है।
पंजाब में क्यों नहीं हो रही अवैध निर्माण पर कार्रवाई
सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि कैचमेंट एरिया में कांसल, करोड़ा आदि गांव आते हैं और यहां निर्माण पर रोक के आदेश के बावजूद वहां निर्माण जारी हैं। उन्होंने बताया कि वह एडवोकेट तनु बेदी के साथ दौरा कर चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि जब निर्माण वैध नहीं है तो पंजाब सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। हालांकि तनु बेदी की गैर मौजूदगी के चलते हाईकोर्ट ने कहा कि जब तनु बेदी कोर्ट में मौजूद होंगी तब इस पर आगे बहस होगी।
पंजाब में क्यों नहीं हो रही अवैध निर्माण पर कार्रवाई
सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन ने हाईकोर्ट को बताया कि कैचमेंट एरिया में कांसल, करोड़ा आदि गांव आते हैं और यहां निर्माण पर रोक के आदेश के बावजूद वहां निर्माण जारी हैं। उन्होंने बताया कि वह एडवोकेट तनु बेदी के साथ दौरा कर चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि जब निर्माण वैध नहीं है तो पंजाब सरकार कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है। हालांकि तनु बेदी की गैर मौजूदगी के चलते हाईकोर्ट ने कहा कि जब तनु बेदी कोर्ट में मौजूद होंगी तब इस पर आगे बहस होगी।