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यूपीएससी: रोहतक के मनीष शर्मा को मिली सफलता, हासिल किया 268वां स्थान, पढ़ें- कामयाबी के टिप्स
Wed, 05 Aug 2020 01:53 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Published by: ajay kumar
Updated Wed, 05 Aug 2020 01:53 AM IST
सार
- शुरू से ही बनना चाहता था आईएएस, इसीलिए पहले खुद परखने को एसएससी की परीक्षा दी
- परीक्षा में अच्छे अंक आने पर आयकर विभाग में इंस्पेक्टर के पद कार्यभार संभाला
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मनीष शर्मा अपनी पत्नी और बेटे के साथ।
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विस्तार
समाज में आर्थिक व सामाजिक समानता का बदलाव लाना है। इसके लिए काम करना है। यह सोच है यूपीएससी परीक्षा में देश में 268वां रैंक पाने वाले शहर की नेहरू कॉलोनी में रहने वाले मनीष शर्मा का। आयकर विभाग पुणे में बतौर इंस्पेक्टर तैनात मनीष कुमार ने नौकरी, शादी व बच्चे की जिम्मेदारियों को निभाते हुए अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने अपना संघर्ष साझा किया।
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मनीष शर्मा ने कहा कि अपने लक्ष्य से हटे बगैर उसे पाने के लिए लगातार प्रयास किया। बाबा मस्तनाथ पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई के बाद वर्ष 2007 से 11 तक गुरुग्राम के कॉलेज से बीटेक किया। यहां से 2011 में कैंपस प्लेसमेंट मिला। इसके बाद एरिक्सन कंपनी में 2105 तक काम किया। अपने आईएएस बनने के सपने को पूरा करने से पहले खुद को आजमाने के लिए एसएससी की परीक्षा दी।
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इसमें अच्छे अंक आने पर वर्ष 2015 में आयकर विभाग पुणे में इंस्पेक्टर पद पर कार्यभार मिला। वर्ष 2016 में मंगाली निवासी मौलिक शिक्षा मुख्याध्यापक धीनराम कौशिक की बेटी समिधा शर्मा से विवाह हुआ। समिधा आयकर विभाग पुणे में एसआई हैं। शादी के बाद बेटा नैतिक शर्मा आया। नौकरी, शादी, बेटा इन सब जिम्मेदारियों के बीच मेरा आईएएस बनने का सपना व जोश कम नहीं हुआ।
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किराये पर कमरा लेकर बनाई लाइब्रेरी, वहीं की पढ़ाई
घर पर पढ़ाई नहीं कर पाने के कारण अलग एक कमरा किराये पर लिया। इसे लाइब्रेरी में बदल दिया। यहां दो से तीन घंटे रोजाना पढ़ाई जरूर करता। शनिवार व रविवार अवकाश होने पर यह समय आठ से नौ घंटे भी होता था। यही नहीं एक घंटे समाचार पत्र पढ़ना दैनिक दिनचर्या में शामिल रहा। यही मेरी सफलता के वाहक बने। परिवार का पूरा सहयोग मिला।
सभी ने मेरा जोश कभी कम नहीं होने दिया। जब भी नौकरी छोड़ने का विचार आया तो सोचा कि इतनी मेहनत किस लिए की है। इसलिए नौकरी छोड़ना उचित नहीं। टाइम मैनेजमेंट व लगन से सफलता को आसान बनाया। जहां दिक्कत आई वहां ऑनलाइन कोचिंग से मदद ली। अपनी कमियों के सुधार पर ध्यान दिया।
शिक्षक परिवार से हैं मनीष
यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले मनीष शर्मा शिक्षक परिवार से हैं। पिता शर्मानंद शर्मा सेवानिवृत्त हेड मास्टर हैं। मां शकुंतला देवी सेवानिवृत्त हिंदी शिक्षिका हैं। चार भाई बहनों में सबसे छोटे मनीष परिवार के पहले यूपीएससी परीक्षा पास करने वाले सदस्य हैं। बड़े भाई अमित शर्मा निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। दो बहनें हैं। दोनों सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। पत्नी समिधा शर्मा आयकर विभाग में एसआई हैं। ससुर धनीराम शर्मा मौलिक शिक्षा मुख्याध्यापक हैं।
टिप्स:
पढ़ाई लगातार करें। जरूरी नहीं, सारा दिन पढ़ें। भले कुछ समय पढ़ें, मगर ध्यान से पढ़ें। मैंने ड्यूटी के बाद शाम को दो से तीन घंटे पढ़ाई जरूर की। अवकाश के दिन पढ़ाई के घंटे बढ़ाए। इससे न तो अध्ययन रुकता है न ही रुचि कम होती है।