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Hindi News ›   Chandigarh ›   Unique Tradition, No Snake Killing in a Village of Haryana

300 साल पुरानी अनूठी परंपरा चौंका देगी आपको

Mon, 15 Dec 2014 03:52 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल
ब्यूरो/अमर उजाला, कैथल Updated Mon, 15 Dec 2014 03:52 PM IST
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Unique Tradition, No Snake Killing in a Village of Haryana

हरियाणा में एक गांव की 300 साल पुरानी इस बेहद अनूठी पंरपरा के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। कस्बे के गांव रोहेड़ा में मान्यता है कि यहां सांप के काटने से किसी को कोई नुकसान नहीं होता है। यही कारण है कि यहां सांप को लोग नहीं मारते हैं।

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कई वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, यहां सांप मारने को बहुत बड़ा पाप समझा जाता है। कुंडू गौत्र के लोगों का मानना है कि सांप के काटने से उनके समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं होता।
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मान्यता है कि सांप के काटने पर इस समुदाय की महिलाओं द्वारा गीत गाने से पीड़ित व्यक्ति ठीक हो जाता है। इस दौरान समुदाय के लोग न तो किसी भी व्यक्ति को घी, दूध व अन्य वस्तु देते है और न ही बेचते हैं।

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ये है मान्यता

Unique Tradition, No Snake Killing in a Village of Haryana

गांव के सरपंच सतबीर कुंडू, ग्रामीण धर्मसिंह, बलम सिंह और मियां सिंह ने बताया कि गांव में कुंडू गौत्र के करीब तीन सौ घर हैं। करीब 1700 लोग रहते हैं।

मान्यता के अनुसार, करीब तीन सौ साल पहले उनके बुजुर्ग जींद जिले के गांव घोघड़िया से आकर यहां बसे थे। उसी समय एक महिला ने एक बच्चे को जन्म दिया, जिसका नाम लखमीर रखा गया।

कहा जाता है कि उसी महिला की कोख से बच्चे के साथ एक सांप ने भी जन्म लिया। उस महिला ने सांप का पालन पोषण भी अपनी औलाद की तरह किया। भाद्र मास की चौथ के दिन वह महिला खेतों में काम करने गई थी।

इस दौरान उसने अपने बेटे और सांप को एक पालने में साथ-साथ सुला दिया। इस बीच उस महिला का भाई अचानक गांव आया और अपनी बहन को घर में न पाकर वह भी उसी खेत चला गया।

सांप मारने के बाद बच्चे की हो गई मौत

Unique Tradition, No Snake Killing in a Village of Haryana

महिला के भाई ने देखा कि उसके भांजे के साथ पालने में एक सांप लेटा हुआ है। किसी खतरे का अंदेशा जानकर उसने सांप को मार दिया।

जिसके तुरंत बाद उस बच्चे की भी मौत हो गई। महिला ने उसके भाई से कहा कि तूने सांप के साथ मेरे बेटे को भी मार डाला है जिससे महिला को बहुत गुस्सा आया।

उसने अपने भाई से कहा कि तू भविष्य में इस दिन कभी भी मेरे घर मत आना, क्योंकि इस से दिन तुझे मेरे घर से अन्न, जल तक नहीं दिया जाएगा।

कहा जाता है कि जिस दिन सांप किसी को काट लेता है तो उस दिन कुंडू गोत्र के लोग किसी मेहमान, आगंतुक अथवा भिखारी को भी खाना नहीं देते। उसी दिन से कुंडू गौत्र में परंपरा बनी कि कोई भी व्यक्ति सांप को नहीं मारेगा।

गीत गाने से ठीक होता है सर्पदंश का पीड़ित

Unique Tradition, No Snake Killing in a Village of Haryana

ऐसी मान्यता है कि सांप के काटने से यहां कुंडू गौत्र के लोगों की मौत नहीं होती। यदि कोई सर्प किसी व्यक्ति को काट लेता है तो उसे घर में ही जमीन पर लेटाकर महिलाओं द्वारा गीत गाकर उसका उपचार किया जाता है। इसके बाद नाग द्वारा डसा हुआ व्यक्ति स्वस्थ हो उठता है।

ठीक होने पर उसे नाग देव के मंदिर पर ले जाकर माथा टकवाया जाता है। उन्होंने बताया कि यहां उन्हें अकसर सांप काटते रहते हैं, लेकिन 300 साल का इतिहास गवाह है कि सांप के काटने से यहां किसी की मृत्यु नहीं हुई है। नाग देव के मंदिर पर हर तीन साल के बाद भाद्र मास की पंचम को भंडारा लगाया जाता है, जिसमें उस दौरान पैदा हुए बच्चों को शामिल किया जाता है।

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