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हथेली जितनी थी ये बच्ची और वजन सिर्फ 600 ग्राम, देखिए
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
Updated Tue, 24 Jan 2017 09:46 AM IST
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हथेली की साइज जितनी बच्ची ने लिया जन्म
इस प्यारी सी बच्ची को देखिए। यह जानकर आपको यकीं नहीं होगा कि यह बच्ची हाथ की हथेली जितनी थी और इसका वजन मात्र 600 ग्राम था। है न चौंकाने वाली बात, पर सच है। हरियाणा के पानीपत में यह बच्ची जन्मी और इसका नाम है यशमायरा। यह अभी चार महीने की है और 3 डॉक्टर्स, 5 नर्सों की देखरेख में आईसीयू में रह रही है।
डॉक्टर्स बताते हैं कि जब वह पैदा हुई तब मात्र 600 ग्राम की थी। उसका आकार चूहे जितना था। पूरा शरीर हथेली पर आ जाता था। अमूमन बच्चे का 9 माह बाद जन्म होता है, लेकिन उसने तीन माह पहले ही जन्म ले लिया। किसी को उसके बचने की उम्मीद नहीं थी। डॉक्टर भी परिजनों को जवाब दे चुके थे। लेकिन अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और 2 किलो 100 ग्राम की है।
रविवार को जब उसकी छुट्टी हुई तो मां को खुश देख वह भी मुस्कुराने हुए आईसीयू से बाहर आई। जो लोग कोख में ही बेटियों को मार देते हैं उसने के लिए यह सबक है। यशमायरा अपने मां नीतू और पिता रविंद्र कुमार की तीसरी बेटी है। चार माह तक दंपती उसकी जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद में लगे रहे। यशमायरा रविवार को अस्पताल से मां के साथ अपने घर सेक्टर 11-12 न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पहुंची तो खुशियां मनाई गईं।
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डॉक्टर्स बताते हैं कि जब वह पैदा हुई तब मात्र 600 ग्राम की थी। उसका आकार चूहे जितना था। पूरा शरीर हथेली पर आ जाता था। अमूमन बच्चे का 9 माह बाद जन्म होता है, लेकिन उसने तीन माह पहले ही जन्म ले लिया। किसी को उसके बचने की उम्मीद नहीं थी। डॉक्टर भी परिजनों को जवाब दे चुके थे। लेकिन अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और 2 किलो 100 ग्राम की है।
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रविवार को जब उसकी छुट्टी हुई तो मां को खुश देख वह भी मुस्कुराने हुए आईसीयू से बाहर आई। जो लोग कोख में ही बेटियों को मार देते हैं उसने के लिए यह सबक है। यशमायरा अपने मां नीतू और पिता रविंद्र कुमार की तीसरी बेटी है। चार माह तक दंपती उसकी जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात जद्दोजहद में लगे रहे। यशमायरा रविवार को अस्पताल से मां के साथ अपने घर सेक्टर 11-12 न्यू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में पहुंची तो खुशियां मनाई गईं।
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सोते-सोते सांस लेना भूल जाती थी
हथेली की साइज जितनी बच्ची ने लिया जन्म
रेनबो अस्पताल के डॉ. गिरीश अरोड़ा ने बताया कि बच्ची का मुंह इतना छोटा था कि तीन माह तक आईसीयू में नली से दूध डाला गया। वह सोते-सोते सांस लेना भूल जाती थी तो जागना पड़ता था।
4 माह तक 24 घंटे वह डॉक्टर व नर्सों की निगरानी में रही। सबसे ज्यादा परेशानी उसके इलाज में आई। आकार बहुत छोटा था। ड्रिप लगाने के लिए घंटों तक नस ही नहीं मिलती थी। 5 बार सांस रुक गई तो वेंटीलेटर पर भेजा गया।
वेंटीलेटर पर सांस लौट आई। खून नहीं बनता था तो चढ़ाया गया। डॉक्टर ने बताया कि ज्यों-ज्यों दिन गुजरने लगे तो खुशी के साथ चिंता सताने लगी। दो माह बाद तो ऐसा लगने लगा कि अब बच्ची को कुछ हो गया तो सारी मेहनत बेकार जाएगी।
4 माह तक 24 घंटे वह डॉक्टर व नर्सों की निगरानी में रही। सबसे ज्यादा परेशानी उसके इलाज में आई। आकार बहुत छोटा था। ड्रिप लगाने के लिए घंटों तक नस ही नहीं मिलती थी। 5 बार सांस रुक गई तो वेंटीलेटर पर भेजा गया।
वेंटीलेटर पर सांस लौट आई। खून नहीं बनता था तो चढ़ाया गया। डॉक्टर ने बताया कि ज्यों-ज्यों दिन गुजरने लगे तो खुशी के साथ चिंता सताने लगी। दो माह बाद तो ऐसा लगने लगा कि अब बच्ची को कुछ हो गया तो सारी मेहनत बेकार जाएगी।
बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं
हथेली की साइज जितनी बच्ची ने लिया जन्म
मां नीतू ने बताया कि 13 वर्षीय बेटी सिमरन व 11 वर्षीय मीनल के बाद यशमायरा उनकी तीसरी बेटी है। उनकी 10 सितंबर को डिलेवरी हुई थी। एक दिन दिन पहले राधाष्टमी थी। इसलिए यशमायरा को राधे भी बुलाते हैं।
जन्म के बाद बच्ची को सात-आठ दिन का मेहमान बताया था। लेकिन डॉक्टर व नर्स ने बहुत मेहनत की, जिसकी बदौलत बच्ची आज जिंदा है। नीतू कहती हैं कि मेरी नजर में बेटा और बेटी एक ही हैं। हमारा पहला उद्देश्य बेटी को बचाना था। नीतू ने बताया कि पति रविंद्र हैंडलूम व्यवसायी हैं।
जन्म के बाद बच्ची को सात-आठ दिन का मेहमान बताया था। लेकिन डॉक्टर व नर्स ने बहुत मेहनत की, जिसकी बदौलत बच्ची आज जिंदा है। नीतू कहती हैं कि मेरी नजर में बेटा और बेटी एक ही हैं। हमारा पहला उद्देश्य बेटी को बचाना था। नीतू ने बताया कि पति रविंद्र हैंडलूम व्यवसायी हैं।