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Chandigarh News: 12 साल से कानूनी कब्जे वाली दुकानों का मिलेगा मालिकाना हक
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पंजाब सरकार ने ‘मेरी दुकान मेरे नाम’ योजना जारी की, 6 नवंबर तक कर सकेंगे आवेदन
50 वर्गमीटर से कम दुकानों के लिए आय के अनुसार कलेक्टर रेट का 12.5 से 100 फीसदी तक शुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में 12 साल से दुकानों पर कानूनी कब्जा रखने वाले दुकानदारों को मालिकाना हक देने के लिए सरकार ने ‘मेरी दुकान मेरे नाम’ योजना जारी की है। इसके तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अधीन किराए या लीज पर दुकानें चला रहे पात्र दुकानदार 6 नवंबर 2026 तक संबंधित नगर निकाय कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। शुल्क क्षेत्र के कलेक्टर रेट और आवेदक की आय-श्रेणी के आधार पर तय होगा।
स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 1 अप्रैल 2020 से पहले के 12 वर्षों का कानूनी कब्जा साबित करने वाले दुकानदार योजना के लिए पात्र होंगे। आवेदनों की जांच एसडीएम स्तर की कमेटी करेगी, जबकि कीमत निर्धारित करने का काम डीसी स्तर की कमेटी करेगी। इसके बाद संबंधित स्थानीय निकाय प्रस्ताव पारित करेगा।
आय के हिसाब से तय होगा शुल्क
3 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदकों को कलेक्टर रेट का 12.5 प्रतिशत, 3 से 8 लाख आय वालों को 25 प्रतिशत, 8 से 15 लाख आय वालों को 50 प्रतिशत और 15 लाख रुपये से अधिक आय वालों को 100 प्रतिशत शुल्क देना होगा। ये रियायती दरें 50 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों पर लागू होंगी।
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सबलेट और सार्वजनिक जमीन पर कब्जे वालों को लाभ नहीं
सबलेट की गई दुकानों और पार्क, गलियों या सार्वजनिक सुविधाओं वाली जगहों पर कब्जा करने वालों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आवेदन के लिए जीएसटी प्रमाणपत्र, बिजली बिल, मतदाता कार्ड जैसे वैध दस्तावेज जमा किए जा सकेंगे। बैंस ने कहा कि योजना से लंबे समय से किराए या लीज पर दुकानें चला रहे छोटे व्यापारियों के लिए मालिकाना हक पाने का रास्ता साफ होगा।
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50 वर्गमीटर से कम दुकानों के लिए आय के अनुसार कलेक्टर रेट का 12.5 से 100 फीसदी तक शुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब में 12 साल से दुकानों पर कानूनी कब्जा रखने वाले दुकानदारों को मालिकाना हक देने के लिए सरकार ने ‘मेरी दुकान मेरे नाम’ योजना जारी की है। इसके तहत नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के अधीन किराए या लीज पर दुकानें चला रहे पात्र दुकानदार 6 नवंबर 2026 तक संबंधित नगर निकाय कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे। शुल्क क्षेत्र के कलेक्टर रेट और आवेदक की आय-श्रेणी के आधार पर तय होगा।
स्थानीय निकाय मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 1 अप्रैल 2020 से पहले के 12 वर्षों का कानूनी कब्जा साबित करने वाले दुकानदार योजना के लिए पात्र होंगे। आवेदनों की जांच एसडीएम स्तर की कमेटी करेगी, जबकि कीमत निर्धारित करने का काम डीसी स्तर की कमेटी करेगी। इसके बाद संबंधित स्थानीय निकाय प्रस्ताव पारित करेगा।
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आय के हिसाब से तय होगा शुल्क
3 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदकों को कलेक्टर रेट का 12.5 प्रतिशत, 3 से 8 लाख आय वालों को 25 प्रतिशत, 8 से 15 लाख आय वालों को 50 प्रतिशत और 15 लाख रुपये से अधिक आय वालों को 100 प्रतिशत शुल्क देना होगा। ये रियायती दरें 50 वर्गमीटर से कम क्षेत्रफल वाली दुकानों पर लागू होंगी।
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सबलेट और सार्वजनिक जमीन पर कब्जे वालों को लाभ नहीं
सबलेट की गई दुकानों और पार्क, गलियों या सार्वजनिक सुविधाओं वाली जगहों पर कब्जा करने वालों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा। आवेदन के लिए जीएसटी प्रमाणपत्र, बिजली बिल, मतदाता कार्ड जैसे वैध दस्तावेज जमा किए जा सकेंगे। बैंस ने कहा कि योजना से लंबे समय से किराए या लीज पर दुकानें चला रहे छोटे व्यापारियों के लिए मालिकाना हक पाने का रास्ता साफ होगा।