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सूखी ठंड: पंजाब व हरियाणा में फसलें, हिमाचल-कश्मीर में बागवानी प्रभावित, गर्मियों में होगी पानी की किल्लत

Tue, 30 Jan 2024 10:44 AM IST
निवेदिता वर्मा विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़
विशाल पाठक, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 30 Jan 2024 10:44 AM IST
सार

दो माह से बरसात न होने के कारण सेब में भरपूर रस नहीं भर पाया, जबकि अन्य फलों की ग्रोथ नहीं हो पाई। बर्फ न पड़ने के कारण पर्यटन कारोबार भी ठंडा ही रहा। अब गर्मियों में भी लोगों को जल संकट से जूझना पड़ेगा। भूमिगत जल रिचार्ज न होने के कारण भविष्य में परेशानी और बढ़ने वाली है। हिमाचल में मटर की फसल 40 से 60 फीसदी तक सूख गई है। किसान आलू की बिजाई नहीं कर पा रहे। गेहूं और जौ की फसल पीली पड़ गई है।  

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Two months of dry cold had significant impact on North India
Punjab Weather News: - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मध्यसागर से चलने वाले पश्चिमी विक्षोभ के इस बार बेहद कमजोर रहने के कारण सर्दियों में दो महीने की सूखी ठंड ने उत्तर भारत पर खासा असर डाला है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण जहां पंजाब और हरियाणा में गेहूं समेत अन्य फसलों व सब्जियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में नाममात्र बर्फबारी से बागवानी, विशेषकर सेब की फसल को क्षति उठानी पड़ी। 
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चंडीगढ़ मौसम केंद्र के निदेशक अजय कुमार सिंह का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने के कारण ही मैदानी इलाकों में इस बार बारिश देखने को नहीं मिली। बीते दिसंबर से जनवरी में अब तक उत्तर भारत में पड़ी अत्यधिक सूखी ठंड और कोहरा इसकी मुख्य वजह हैं। 
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मध्यसागर के जल स्तर से 12 किलोमीटर ऊपरी छोर से 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वालीं जेट स्ट्रीम हवाएं पश्चिमी विक्षोभ की स्थितियों को पैदा करती हैं। यह पश्चिमी विक्षोभ मध्यसागर से अफगानिस्तान से पाकिस्तान से होते हुए भारत का रुख करता है। इसी से पहाड़ों में हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश होती है, लेकिन इस बार उत्तर भारत इन दो महीने में सूखे पाले, हाड़ कंपा देनी वाली ठंड और कोहरे से बेबस दिखाई पड़ा।
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पाला पड़ने से सब्जियां खराब, गेहूं के पीला पड़ने की आशंका
दो माह से पड़ रहा कोहरा व पाला मैदानी इलाकों खासकर पंजाब और हरियाणा के किसानों के लिए बहुत हानिकारक साबित हुआ है। मौसम विशेषज्ञ एके सिंह ने कहा पाला व कोहरा यूं तो इन दिनों कई फसलों के लिए अच्छा होता है, लेकिन इस बार बारिश न होने व अत्यधिक पाला पड़ने से टमाटर व अन्य सब्जियों- फसालों पर बुरा असर पड़ा है। कई फसलें नष्ट हो गईं। गेहूं के भी पीला पड़ने की आशंका है। चंडीगढ़ मौसम केंद्र ने पंजाब-हरियाणा सरकार के अलावा केंद्र सरकार को भी बीते दो माह में पड़े पाले और सूखे की वजह से नष्ट हुई खेती को लेकर सूचित कर दिया है।

हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड में सेब का उत्पादन प्रभावित होना तय
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश व कश्मीर में फलों की पैदावार काफी प्रभावित हुई है। हिमाचल में फलों की पैदावार में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी सेब से जुड़ी है। इससे करीब छह हजार करोड़ रुपये का उद्योग जुड़ा है। जाने-माने कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा का कहना है कि हिमाचल, कश्मीर और उत्तराखंड में बर्फबारी नहीं हो रही। पीर पंजाल और धौलाधार पर्वत मालाओं पर भी बर्फ नहीं गिर रही। सेब और अन्य गुठलीदार फलों को इससे भारी नुकसान हो सकता है। 

चिलिंग ऑवर पूरे न होने से इस साल सेब का उत्पादन प्रभावित होना तय है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बर्फबारी नहीं हुई तो सेब उत्पादन 50 फीसदी तक गिर सकता है। दिसंबर और जनवरी की शुरुआत में होने वाली बर्फबारी से सेब के बगीचों में कीट-पतंगे मर जाते हैं, जिससे बीमारियों को खतरा कम हो जाता है। 

बर्फबारी न होने से इस साल सेब में अधिक बीमारियां फैलने का खतरा है। 15 जनवरी के बाद तापमान में बढ़ोतरी से चिलिंग ऑवर्स पूरे होने में समस्या पेश आ सकती है। तापमान 7 डिग्री से नीचे आने पर चिलिंग ऑवर्स शुरू होते हैं। सेब की विभिन्न किस्मों के लिए अलग-अलग चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है। आमतौर पर सामान्य फसल के लिए 1000 से 1600 घंटे चिलिंग ऑवर्स की जरूरत रहती है।

पंजाब-हरियाणा में भू-जल पर पड़ेगा असर
कमजोर पश्चिमी विक्षोभ का असर उत्तर भारत खासकर पंजाब और हरियाणा के भू-जल स्तर पर देखने को मिलेगा। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब के कई जिलों में भू-जल स्तर 500 से 600 फीट तक नीचे चला गया है, ऐसे में मौसम की विपरीत स्थितियों के कारण इसके और नीचे जाने की आशंका है। 

हिमाचल प्रदेश में 15 से 25 फीसदी तक पेयजल स्कीमें प्रभावित हुई हैं। इन योजनाओं के पानी में 50 फीसदी तक की गिरावट आई है। सबसे ज्यादा दिक्कत शिमला, कुल्लू, कांगड़ा, सिरमौर और अन्य जिलों में हो रही है। चंबा के जलशक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता राजेश मोंगा ने बारिश और बर्फबारी न होने की वजह से जलस्तर में कमी होने की बात स्वीकारी है।

अनुमान के मुकाबले शून्य रही बारिशविपरित परिस्थितियों के कारण जनवरी 2024 में पंजाब और हरियाणा में जो बारिश होनी चाहिए थी। वह अनुमान के मुकाबले अभी तक शून्य है। वर्ष 2022 में अच्छे पश्चिमी विक्षोभ की मदद से पंजाब में तय लक्ष्य से 398 प्रतिशत और हरियाणा में 389 प्रतिशत वर्षा जनवरी माह में अच्छी हुई थी।


पंजाब-हरियाणा में जनवरी 2024 में बारिश का था अनुमान, अभी तक शून्य
वर्ष                                   पंजाब                                              हरियाणा
                                      अनुमान             मौजूदा स्थिति            अनुमान             मौजूदा स्थिति

2024                             18.3 एमएम             0                        13.5 एमएम             0
2023                             18.3 एमएम             0                        13.5 एमएम             0
2022                              21 एमएम             104.6 एमएम         14.2एमएम             69.4एमएम


आने वाले एक या दो दिनों के अंदर पश्चिमी विक्षोभ दोबारा सक्रिय हो रहा है। अनुमान है कि इससे हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में बर्फबारी और मैदानी इलाकों जैसे पंजाब और हरियाणा में कई जगहों पर अच्छी बारिश देखने को मिलेगी। - अजय कुमार सिंह, निदेशक, मौसम विज्ञान केंद्र, चंडीगढ़।
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