बजट सत्र: हरियाणा विधानसभा में दो विधेयक पारित, अब हुक्का बार चलाना व परोसना दंडनीय अपराध
हरियाणा में अब हुक्का बार चलाना या रेस्तरां व होटल में ग्राहकों को हुक्का परोसना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सोमवार को हरियाणा सरकार ने इस संबंध में एक विधेयक पारित किया है। उल्लंघन पर एक से तीन साल तक की सजा और एक से पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। चौपालों और पंचायतों में पीने वाले हुक्के को कानून से बाहर रखा गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विधानसभा में सोमवार को दो विधेयक हरियाणा अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण विधेयक 2024 और सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) हरियाणा संशोधन विधेयक 2024 को पारित कर दिया गया। सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पाद विधेयक के तहत अब राज्य में हुक्का बार चलाना, या रेस्तरां व होटल में ग्राहकों को हुक्का परोसना दंडनीय अपराध बन गया है।
अगर कोई ऐसा करता है तो उसे एक से तीन साल तक की सजा और एक से पांच लाख रुपये तक जुर्माने किया जाएगा। इसके साथ आरोपियों की जमानत भी नहीं होगी। हालांकि पारंपरिक हुक्का को छूट दी गई है। चौपालों और पंचायतों में पीने वाले हुक्के को कानून की जद से बाहर रखा है।
विधानसभा में अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती मेला प्राधिकरण विधेयक को शहरी निकाय मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने पेश किया। इसे चर्चा के बाद पास कर दिया गया। विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि 1989 से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) गीता जयंती महोत्सव मनाता आ रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को इस आयोजन के लिए अलग से प्राधिकरण बनाने की कोई जरूरत नहीं थी, केडीबी सही काम कर रहा है। केडीबी के प्रशासक राज्यपाल होते हैं। वहीं, प्राधिकरण के मुखिया मुख्यमंत्री होंगे। इस दौरान भुक्कल ने घोटाले की भी आशंका व्यक्त की। इस पर सीएम ने कहा कि हर चीज को घपले-घोटालों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
शव सम्मान विधेयक पर आपत्ति, सरकार ने वापस लिया
सरकार ने सदन में हरियाणा शव सम्मानजनक निपटान विधेयक रखा। कांग्रेस विधायकों ने इसका विरोध जताया, जिसकी वजह से सरकार ने इसे वापस ले लिया है। अब इसे संशोधित करके पास पेश किया जाएगा। विधेयक में अपील का कोई प्रावधान नहीं होने पर विपक्ष के विधायकों ने नाराजगी जताई। कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी ने कहा कि पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सम्मान के साथ होना चाहिए लेकिन पीड़ित पक्ष की कोई सुनवाई नहीं करेगा तो वह क्या करेगा। विधेयक में ऐसे मामलों की सुनवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
बीबी बतरा ने कहा कि लोग मजबूरी में शव को लेकर प्रदर्शन करते हैं। इसमें अपील-दलील की कोई व्यवस्था नहीं होने से उसका अधिकार ही छिन जाएगा। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इस तरह का विधेयक पारित हो चुका है। अब हरियाणा में कांग्रेस को यह कानून बनाने से दिक्कत क्यों है। सीएम ने कहा कि शव को सड़कों पर रखकर शासन-प्रशासन पर दबाना बनाना और अपनी मांगों को मनवाना सही नहीं है। विज ने कहा इसको संशोधित करके पेश करेंगे।