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बिना पैसे के निकले देश भ्रमण पर... ऐसे जुटा रहे खाने को पैसे
Sat, 20 Feb 2021 08:28 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 08:28 PM IST
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चंडीगढ़। घुमक्कड़ों के लिए न तो कभी पैसे की कमी आड़े आती है और न ही समय की। 23 साल का एक युवक निधिन केरल से कश्मीर यात्रा पर साइकिल लेकर निकल पड़ा है। एक जनवरी को उसने केरल के त्रिस्सूर से अपनी यात्रा शुरू की थी, उस दौरान उसके पास सिर्फ 170 रुपये और कुछ जरूरी सामान था।
पैसों की कमी को पूरा करने के लिए सफर के दौरान वह चाय बेचते हैं। शनिवार को जब वह चंडीगढ़ पहुंचे तो स्थानीय साइकिलप्रेमियों ने उनका स्वागत किया और हौसले की तारीफ की। शाम को उसने किसान महापंचायत के दौरान भी चाय बेची। 100 दिन के मिशन का उनका सफर श्रीनगर में खत्म होगा।
भाई की टूटी साइकिल को ठीक करवाकर कर रहे हैं सफर
निधिन की पूरी यात्रा 3300 किलोमीटर की है। इस यात्रा को पूरा करने के लिए उन्होंने मोटरसाइकिल का जुगाड़ किया, लेकिन पेट्रोल का खर्चा उनके लिए मुश्किल था। लॉकडाउन में उनकी नौकरी जा चुकी थी। ऐसे में उसने अपने भाई की टूटी साइकिल की मरम्मत करवाने का फैसला लिया। उनके भाई ने यह साइकिल 12वीं के बाद इस्तेमाल करनी बंद कर दी थी। इसे ही उन्होंने अपने सफर का साथी बनाया। इस शानदार सफर के लिए उन्हें अपना पसंदीदा कैमरा भी बेचना पड़ा। साइकिल में ही उन्होंने चूल्हा (स्टोव) फिट करवा कर रखा है।
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दिन की शुरुआत छह बजे से करते हैं
निधिन ने बताया कि वह अपने दिन की शुरुआत सुबह लगभग छह बजे से करते हैं। शाम चार बजे तक वह अपनी दिन की यात्रा संपन्न कर लेते है। दिन में वह लगभग दस रुपये के मूल्य से 50 कप चाय बेचते हैं। यात्रा समाप्त होने के बाद वह किसी होटल, पेट्रोल पंप, मंदिर व स्कूल के पास रुकते हैं, ताकि चाय बनाने के लिए पानी और दूध का इंतजाम कर सके। चाय बेचने के बाद आए पैसों से आगे की यात्रा और चाय का बाकी का सामान खरीदते हैं। उनके पास सेफ्टी के लिए हेलमेट और दस्ताने नहीं थे। कई लोगों ने उनकी मदद की।
साइकिल चलाते-चलाते पैर सूज जाते हैं, लेकिन हार नहीं मानते
बिना गेयर वाली साइकिल को रोजाना 80 किलोमीटर चलाना आसान नहीं होता। निधिन रोजाना इस काम को पूरा करते हैं। कई बार साइकिल चलाते-चलाते उनके पैर सूज जाते हैं, लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं हैं। उन्हें यात्रा करना पसंद है। वह कहते हैं कि नई यात्राएं जिंदगी की समझ बढ़ाती हैं। साथ ही यात्राएं उन्हें विभिन्न राज्यों के सामाजिक ताने-बाने में तौर-तरीकों और संस्कृति से अवगत करवाती हैं, जिससे सीखने को बहुुत कुछ मिल रहा है।
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पैसों की कमी को पूरा करने के लिए सफर के दौरान वह चाय बेचते हैं। शनिवार को जब वह चंडीगढ़ पहुंचे तो स्थानीय साइकिलप्रेमियों ने उनका स्वागत किया और हौसले की तारीफ की। शाम को उसने किसान महापंचायत के दौरान भी चाय बेची। 100 दिन के मिशन का उनका सफर श्रीनगर में खत्म होगा।
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भाई की टूटी साइकिल को ठीक करवाकर कर रहे हैं सफर
निधिन की पूरी यात्रा 3300 किलोमीटर की है। इस यात्रा को पूरा करने के लिए उन्होंने मोटरसाइकिल का जुगाड़ किया, लेकिन पेट्रोल का खर्चा उनके लिए मुश्किल था। लॉकडाउन में उनकी नौकरी जा चुकी थी। ऐसे में उसने अपने भाई की टूटी साइकिल की मरम्मत करवाने का फैसला लिया। उनके भाई ने यह साइकिल 12वीं के बाद इस्तेमाल करनी बंद कर दी थी। इसे ही उन्होंने अपने सफर का साथी बनाया। इस शानदार सफर के लिए उन्हें अपना पसंदीदा कैमरा भी बेचना पड़ा। साइकिल में ही उन्होंने चूल्हा (स्टोव) फिट करवा कर रखा है।
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दिन की शुरुआत छह बजे से करते हैं
निधिन ने बताया कि वह अपने दिन की शुरुआत सुबह लगभग छह बजे से करते हैं। शाम चार बजे तक वह अपनी दिन की यात्रा संपन्न कर लेते है। दिन में वह लगभग दस रुपये के मूल्य से 50 कप चाय बेचते हैं। यात्रा समाप्त होने के बाद वह किसी होटल, पेट्रोल पंप, मंदिर व स्कूल के पास रुकते हैं, ताकि चाय बनाने के लिए पानी और दूध का इंतजाम कर सके। चाय बेचने के बाद आए पैसों से आगे की यात्रा और चाय का बाकी का सामान खरीदते हैं। उनके पास सेफ्टी के लिए हेलमेट और दस्ताने नहीं थे। कई लोगों ने उनकी मदद की।
साइकिल चलाते-चलाते पैर सूज जाते हैं, लेकिन हार नहीं मानते
बिना गेयर वाली साइकिल को रोजाना 80 किलोमीटर चलाना आसान नहीं होता। निधिन रोजाना इस काम को पूरा करते हैं। कई बार साइकिल चलाते-चलाते उनके पैर सूज जाते हैं, लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं हैं। उन्हें यात्रा करना पसंद है। वह कहते हैं कि नई यात्राएं जिंदगी की समझ बढ़ाती हैं। साथ ही यात्राएं उन्हें विभिन्न राज्यों के सामाजिक ताने-बाने में तौर-तरीकों और संस्कृति से अवगत करवाती हैं, जिससे सीखने को बहुुत कुछ मिल रहा है।