फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   train reminds memories of mutiny of 1947

एक ट्रेन ने ताजा कर दीं 1947 के गदर की यादें

Tue, 24 Mar 2015 07:57 AM IST
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर
अनिल कुमार/अमर उजाला, फिरोजपुर Updated Tue, 24 Mar 2015 07:57 AM IST
विज्ञापन
train reminds memories of mutiny of 1947

शहीदी दिवस 23 मार्च को अंतरराष्ट्रीय रेलमार्ग पर दौड़ती ट्रेन ने लोगों के दिलों में 1947 के गदर की याद ताजा कर दी। जिन परिवारों के अपने सदस्य बंटवारे के समय में पाकिस्तान में रह गए थे या फिर मर गए थे उनके जख्म ट्रेन ने हरे कर दिए।

विज्ञापन


यह रेलमार्ग फिरोजपुर से लाहौर तक बना था और लाहौर से मुंबई के बीच ट्रेन चलती थी। 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई जंग के बाद ट्रेन का आवागमन बंद कर दिया गया। बंटवारे से पहले रेलवे डिवीजन लाहौर हुआ करता था और आज भी कई भारतीय इंडियन रेलवे के दस्तावेज लाहौर में पड़े हैं।
विज्ञापन


समाजसेवी राजेश कुमार की पत्नी रेनू ने बताया कि उनका परिवार लाहौर में रहता था। बंटवारे के समय उनकी संपत्ति पाकिस्तान में रह गई। कई रिश्तेदार आज भी पाकिस्तान में हैं। जब भी 23 मार्च और 13 अप्रैल को अंतरराष्ट्रीय रेलमार्ग पर ट्रेन दौड़ती देखते हैं तो उनके परिवार को 47 के गदर की याद आ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उनके पिता बताते थे कि गदर के वक्त लाहौर से जब ट्रेन फिरोजपुर पहुंची थी तो उनमें लाशें लदी होती थी और ट्रेन खून से लथपथ थी।

रेल पटरी उखाड़कर ले गई थी पाकिस्तानी सेना

train reminds memories of mutiny of 1947

इसी प्रकार समाजसेवी सतपाल ने बताया कि उनका परिवार पाकिस्तान के मुलतान में था। बंटवारे के समय उनका परिवार फिरोजपुर आ गया। जब उनका परिवार ट्रेन से फिरोजपुर पहुंचा था तो बहुत ही मुश्किल से जान बचा कर आया था।

बुजुर्ग सम्मी चंद ने बताया कि 1971 में भारत-पाकिस्तान की जंग होने के बाद से पाकिस्तानी सेना ने हुसैनीवाला बार्डर के पास कुछ हिस्सा कब्जे में ले लिया था। यही नहीं पाकिस्तानी सेना रेल पटरी, सफेदे के पेड़ और शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव के बुत भी उखाड़कर अपने साथ ले गए थे।

फिर एक समझौते के बाद उक्त इलाका भारत को दिया गया। उसके बाद से ही रेलमार्ग सिर्फ हुसैनीवाला बार्डर तक है। सतुलज दरिया में आज भी रेलमार्ग जिन पिल्लरों से होकर गुजरती थे वे अब भी दरिया के बीच में बने हुए हैं। साल में दो बार चलने वाली ट्रेन बंटवारे की याद दिलाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed