किसान आंदोलन: ट्रैक्टरों से किसानों ने बैरिकेड तोड़े, वाटर कैनन पर कब्जा किया, आठ किमी तक चंडीगढ़ में घुसे
शनिवार को वीआईपी सिटी हजारों किसानों के मार्च की गवाह बनी। चंडीगढ़ सीमा तक सब कुछ शांतिपूर्ण था। सुबह 10 बजे किसानों की रैली शुरू हो गई थी, जो दोपहर करीब एक बजे तक चली। इस रैली को संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं ने संबोधित किया। सभी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कृषि के नए तीन कानून रद्द न होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
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विस्तार
राज्यपाल को ज्ञापन देने पर अड़े किसान शनिवार को पुलिस बैरिकेड तोड़कर चंडीगढ़ में दाखिल हो गए। हजारों की संख्या में पहुंचे किसान करीब ढाई घंटे तक चंडीगढ़ की सड़कों पर जमा रहे। प्रदर्शन में गैंगस्टर से एक्टिविस्ट बना लक्खा सिधाना भी शामिल रहा। उस पर 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किले में हिंसा फैलाने का आरोप है।
लाल किले की घटना के बाद से वह फरार चल रहा है। उस पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख का इनाम भी रखा है। शनिवार को किसानों के हुजूम में लक्खा सिधाना के शामिल होने की सूचना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-17 थाने में उसके व अन्य लोगों के खिलाफ ड्यूटी पर बाधा पहुंचाने और दंगा करवाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। वहीं, बाकी आरोपियों की पहचान के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
बता दें कि शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे किसानों ने मोहाली के वाईपीएस चौक की ओर से चंडीगढ़ में दाखिल होने की कोशिश की। पानी की बौछार से पुलिस ने उनको रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन वे नहीं माने। ट्रैक्टर से पुलिस बैरिकेड तोड़कर किसान चंडीगढ़ की सीमा में दाखिल हो गए। चंडीगढ़ में घुसते ही किसानों ने दमकल विभाग की खड़ी गाड़ियों की टोटियां खोलकर पानी बहा दिया और वाटर कैनन पर कब्जा कर लिया ताकि पुलिस उन पर पानी की बौछार न कर सके।
उसके बाद किसान हिमालय मार्ग की ओर आगे बढ़े। किसानों को आगे बढ़ता देख चंडीगढ़ पुलिस ने पूरे हिमालय मार्ग का ट्रैफिक रोक दिया। दोनों तरफ की सड़कें खाली हो गईं। सेक्टर 34-35 के पास पुलिस की बैरिकेडिंग देखकर किसानों ने डिवाइडिंग रोड की रेलिंग ट्रैक्टर से तोड़ दी। इस दौरान एक किसान ट्रैक्टर से गिरकर घायल तक हो गया।
इन सबके बीच समर्थकों का हुजूम आगे बढ़ता रहा। इसमें शामिल कुछ लोगों ने आम लोगों की बाइक चाबी निकालकर सड़कों पर फेंक दी। इस दृश्य को पुलिस देखती रही लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की।
किसानों का जत्था जब जेडब्ल्यूए मैरिएट चौक पर पहुंचा तो पुलिस के पास उन्हें रोकने का कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं था। ऐसे में पुलिस ने वहां से गुजर रही तीन रोडवेज बसों को रोककर सवारियों को उतार दिया और किसानों को रोकने के लिए बसें सड़क पर खड़ी कर दीं।
इस दौरान सवारियों ने पुलिस को मना किया कि उन्हें न उतारा जाए लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी। इस बीच चौक पर पहुंचे किसान बसों को धक्का मारकर हटाने लगे। इससे बसों के शीशे टूट गए। यही स्थिति प्रेस लाइट प्वाइंट पर भी रही। किसानों ने सेक्टर 17-18 लाइट प्वाइंट पर खड़ी पीसीआर को भी नहीं बख्शा। उसे धक्का मारकर हटा दिया।
प्रेस लाइट प्वाइंट पर माहौल हुआ था तनावपूर्ण
किसान जब राजभवन के नजदीक सेक्टर -17 प्रेस लाइट प्वाइंट पर पहुंचे तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए फिर से सीटीयू की बसें सड़क पर खड़ी कर दीं। इससे गुस्साए किसानों ने बसों को धक्का देकर उसे हटाने की कोशिश की।
किसानों के तेवर देख चंडीगढ़ व पंजाब पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियां बुला ली गईं। तनाव इतना बढ़ गया कि मौके पर चंडीगढ़ पुलिस के डीआईजी, एसएसपी व एसपी को आना पड़ा। उनके पहुंचने के बाद हालात काबू में आए।
डीसी ने प्रेस लाइट प्वाइंट पर किसान नेताओं से लिया ज्ञापन
पंजाब राजभवन की तरफ कूच करने वाले किसानों से डीसी मनदीप सिंह बराड़ ने प्रेस लाइट प्वाइंट पर ही ज्ञापन ले लिया और किसानों को भरोसा दिया कि वह तुरंत इसे राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर तक पहुंचा देंगे।
डीसी ने सभी किसानों से वापस लौट जाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों का एक पत्र उन्हें सौंपा है। इस ज्ञापन को राज्यपाल को सौंप दिया जाएगा। डीसी बराड़ ने सभी किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि चंडीगढ़ में प्रदर्शन करने के लिए पहले इजाजत लेनी पड़ती है और उसके लिए एक स्थान चिह्नित किया गया है।
किसानों ने बड़ी जिम्मेदारी के साथ प्रशासन के साथ सहयोग किया है, इसलिए ही किसी तरह की समस्या किसी को भी नहीं हुई। प्रदर्शन से न तो लोगों को परेशानी हुई, न ही किसी प्रदर्शनकारी के साथ कोई जबरदस्ती की गई है।
इन थानों में दर्ज हुआ केस
प्रेस लाइट प्वाइंट से करीब 100 से 150 किसान राजभवन की तरफ बढ़ गए। इस दौरान भी पुलिस ने समर्थकों को रोकने की पूरी कोशिश की गई। वहीं, पुलिस ने इस पूरे हंगामे के दौरान वीडियोग्राफी कर ली है। पुलिस अब वीडियोग्राफी से किसानों की पहचान करेगी। मामले में सेक्टर-3 थाना, सेक्टर-36 थाना और सेक्टर-17 थाना पुलिस अज्ञात के खिलाफ दंगा और पुलिस ड्यूटी पर बाधा पहुंचाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, किसान समर्थन को रोकने के लिए विभाग ने करीब तीन हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
क्या बोले किसान नेता
सरकार का काम नुमाइंदगी करना है न कि लोगों पर जबरन अपने बनाए कानून थोपना। केंद्र सरकार जनता से मिली ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। राष्ट्रपति का काम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रखवाली करना होता है लेकिन राष्ट्रपति भी अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हो रहे हैं। - बलबीर सिंह राजेवाल, संयुक्त किसान मोर्चा संयोजक एवं भाकियू राजेवाल प्रधान।
किसान आंदोलन को बदनाम करने के लिए केंद्र सरकार मौका तलाश रही है। आज सभी राज्यों के राज्यपालों को आंदोलन के सात माह होने पर याद-पत्र दिया जा रहा है। मैं सभी किसानों से अपील करता हूं कि जैसे सभी किसान संगठन मोहाली में एकत्रित हुए हैं इसी तरह उन्हें दिल्ली में भी पहुंचना है। पहुंचने की अपील की। - रुलदू सिंह, संयुक्त किसान मोर्चे के नेता।
किसान आंदोलन को सात माह पूरे होने पर शनिवार के मार्च में महिलाएं कम हैं। लेकिन जितनों ने भी आज के आंदोलन में शिरकत की है उनका स्वागत है। पंजाब के 32 किसान संगठन अपना हक मांग रहे हैं और पिछले 30 साल से किसानों के हक की रखवाली कर रही हैं। पंजाब के इन किसान संगठनों ने जो अपने हक के लिए मशाल जलाई है, आज उससे पूरे देश का किसान जागरूक हो रहा है। - रविंदर पाल कौर, संयुक्त मोर्चे की सदस्य।
मौजूदा सरकार के बनाए कृषि कानून वापस होने चाहिए। कृषि कानूनों की किसानों को जरूरत नहीं है। इस कानून से किसानों का कोई हित नहीं होगा। इसमें एमएसपी मिलने पर कोई बात नहीं की गई है। इसके अलावा सरकार इस पर कोई बात करने को तैयार नहीं है। किसान आंदोलन तब तक चलेगा जब तक इसे वापस नहीं लिया जाएगा। किसानों को उनका हक दिलाना हमारा कर्तव्य है। इस काम को हमारे सभी किसान भाई पूरा करके अपने घर जाएंगे। - गुरनाम सिंह चढू़नी।
जब तक कृषि कानून सरकार वापस नहीं लेगी। किसानों का आंदोलन तब तक जारी रहेगा। देश के प्रधानमंत्री को अहंकार हो गया है जिसका इलाज करना होगा। कृषि कानूनों को वापस न लेने पर आने वाले समय में उत्तर-प्रदेश के चुनाव को लेकर किसान संगठन बड़ी नीति बना सकते हैं। किसान संगठन उत्तर-प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ उतर सकते हैं। यह स्पष्ट संकेत है। हमारी सरकार से मांग है कि इस कानून को वापस ले। किसानों के हित में कानून बनाने के लिए सरकार उनसे बातचीत करे और इसका हर हालत में समाधान करे। अगर कृषि कानूनों का समाधान नहीं किया जाएगा तो किसान आंदोलन कर अपना हक मांगता रहेगा। किसानों को उनका हक देना वर्तमान सरकार का काम है। - योगेंद्र यादव, किसान नेता।