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हरियाणा: डेढ़ लाख एनपीएस कर्मियों को हर माह 1000 का घाटा, केंद्र का बढ़ाया 4 फीसदी अंशदान प्रदेश सरकार ने नहीं किया लागू

Tue, 26 Oct 2021 03:39 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 26 Oct 2021 03:39 AM IST
सार

  • पुरानी पेंशन के लिए पहली नवंबर को सकसं ने बुलाया सम्मेलन
  • सरकारी अंशदान को 10 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया था
  • एनपीएस के विरोध में कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा

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Thousand rupees loss every month to 1.5 lakh NPS personnel in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media

विस्तार

नेशनल पेंशन प्रणाली में शामिल हरियाणा के डेढ़ लाख कर्मचारियों को हर माह एक हजार रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। 2019 में लोकसभा चुनाव से पूर्व केंद्र सरकार ने इस प्रणाली में सरकारी अंशदान को 10 से बढ़ाकर 14 प्रतिशत कर दिया था। बावजूद इसके प्रदेश सरकार ने अभी तक यह बढ़ोतरी लागू नहीं की है।

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पुरानी पेंशन बहाली को लेकर पहली नवंबर को एनपीएस कर्मचारी रोहतक में सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले राज्य स्तरीय सम्मेलन करने जा रहे हैं। इसमें आंदोलन तेज करने की रणनीति बनाई जाएगी। इसमें सभी विभागों, बोर्ड, निगमों, विश्वविद्यालयों, नगर निगमों, परिषदों, पालिकाओं की यूनियन एवं एसोसिएशन में कार्यरत एनपीएस कर्मचारियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि सातवें वेतन आयोग ने एनपीएस को समाप्त कर कोई अन्य बेहतर पेंशन स्कीम लागू करने की सिफारिश की थी, जिसे केंद्र सरकार ने अनदेखा कर दिया। केंद्र ने इस योजना को जनवरी 2004 से लागू किया, जबकि हरियाणा में जनवरी 2006 से लागू हुई। योजना के तहत कर्मचारियों को अंशदान के मुताबिक ही पेंशन मिलेगी।
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किसी भी समय फूट सकता है गुबार : लांबा 
आल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट इंपलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि एनपीएस के विरोध में कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। दो साल से अधिक समय से एक हजार रुपये का नुकसान हर महीने झेल रहे कर्मचारियों के अंदर का गुबार किसी भी समय फूट सकता है। कर्मचारी संगठनों के दबाव में निरंतर एनपीएस में कुछ संशोधन हुए हैं, लेकिन सरकार इसे रद्द नहीं कर रही। निरंतर आंदोलन के कारण ही 20 लाख रुपये डीसीआरजी व कई आवश्यक उद्देश्यों के लिए निकासी का प्रावधान हो पाया है। दुर्घटना में मृत्यु पर भी पुरानी पेंशन मिलने का संशोधन हुआ है। कर्मचारियों की मांग एनपीएस रद्द कर पुरानी पेंशन बहाली की है, जब तक यह मांग पूरी नहीं हो जाती, आंदोलन जारी रहेगा।


एनपीएस व पुरानी पेंशन स्कीम में अंतर
पुरानी पेंशन स्कीम में जीपीएफ की सुविधा एनपीएस में नहीं। पेंशन के लिए वेतन से कटौती नहीं, एनपीएस में हर माह दस फीसदी कटौती। पूरी पेंशन सरकार देती है, एनपीएस में बीमा कंपनी देगी। एनपीएस में सेवानिवृत्ति के बाद मेडिकल भत्ता, मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति बंद, पारिवारिक पेंशन खत्म, महंगाई व वेतन आयोग का लाभ नहीं।

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