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Chandigarh News: खेतों में आग लगाने वालों के खिलाफ नरमी न बरती जाए
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फोटो समाचार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुख्य सचिव संजीव कौशल ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि खेतों में लगने वाली आग से निपटने में कोई नरमी न बरती जाए। उन्होंने जिला अधिकारियों से जुर्माना लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि पराली जलाने वाले लोगों पर लगाए गए जुर्माने को समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए,ताकि अन्य लोगों को इसके नुकसान का पता चल सके।
बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक उपायों की एक शृंखला के माध्यम से धान की पराली जलाने की समस्या का लगातार समाधान कर रहा है, जिसके प्रभावशाली परिणाम मिले हैं। राज्य में 2021 और 2022 के बीच सभी जिलों में पराली जलाने से जुड़ी आग की घटनाओं में लगभग 50 फीसदी तक की कमी आई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष एमएम कुट्टी ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य सरकार के कदमों की सराहना की है। मुख्य सचिव ने राज्य में पराली जलाने की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में राज्य का लक्ष्य लगभग 37 लाख टन धान की पराली का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना है, इसका लगभग एक-तिहाई हिस्सा विभिन्न उद्योगों द्वारा उपयोग किया जाएगा प्रमुख उद्योगों में अनुमानित मात्रा 13.54 लाख मीट्रिक टन धान के भूसे की खपत होने की संभावना है। राज्य सरकार ने पूसा बायो डीशकंपोजर के माध्यम से 5 लाख एकड़ धान क्षेत्र का लक्ष्य रखने की पहल की है।
पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली के एनसीटी को कवर करते हुए केंद्र प्रायोजित योजना, फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना के तहत 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों पराली न जलाए इसके लिए सरकार की ओर से कई प्रोत्साहन योजनाएं हैं। जिससे किसान अपने घर पर समृद्धि ला सकता है। बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष राघवेंद्र राव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यावरण, विनीत गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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करनाल में सबसे ज्यादा कमी
मुख्य सचिव ने बैठक में बताया कि पराली जलने की घटनाओं में करनाल 68.51% की कमी के साथ अग्रणी जिला बनकर उभरा, जो वर्ष 2021 में 956 घटनाओं से घटकर वर्ष 2022 में मात्र 301 रह गई। फरीदाबाद में 66.67 % , पानीपत में 66.54 % ,हिसार में 53.06% , फतेहाबाद में 48.14% , जींद में 44.63%, कैथल में 42.56%, कुरुक्षेत्र में 44.24% की कमी के साथ आशाजनक प्रगति दिखाई दी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए मुख्य सचिव संजीव कौशल ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को उन्होंने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि खेतों में लगने वाली आग से निपटने में कोई नरमी न बरती जाए। उन्होंने जिला अधिकारियों से जुर्माना लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि पराली जलाने वाले लोगों पर लगाए गए जुर्माने को समाचार पत्रों में प्रकाशित किया जाए,ताकि अन्य लोगों को इसके नुकसान का पता चल सके।
बैठक में उन्होंने यह भी कहा कि व्यापक उपायों की एक शृंखला के माध्यम से धान की पराली जलाने की समस्या का लगातार समाधान कर रहा है, जिसके प्रभावशाली परिणाम मिले हैं। राज्य में 2021 और 2022 के बीच सभी जिलों में पराली जलाने से जुड़ी आग की घटनाओं में लगभग 50 फीसदी तक की कमी आई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष एमएम कुट्टी ने वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए राज्य सरकार के कदमों की सराहना की है। मुख्य सचिव ने राज्य में पराली जलाने की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में राज्य का लक्ष्य लगभग 37 लाख टन धान की पराली का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना है, इसका लगभग एक-तिहाई हिस्सा विभिन्न उद्योगों द्वारा उपयोग किया जाएगा प्रमुख उद्योगों में अनुमानित मात्रा 13.54 लाख मीट्रिक टन धान के भूसे की खपत होने की संभावना है। राज्य सरकार ने पूसा बायो डीशकंपोजर के माध्यम से 5 लाख एकड़ धान क्षेत्र का लक्ष्य रखने की पहल की है।
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पंजाब, हरियाणा, यूपी और दिल्ली के एनसीटी को कवर करते हुए केंद्र प्रायोजित योजना, फसल अवशेषों के इन-सीटू प्रबंधन के लिए कृषि मशीनीकरण को बढ़ावा देना के तहत 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों पराली न जलाए इसके लिए सरकार की ओर से कई प्रोत्साहन योजनाएं हैं। जिससे किसान अपने घर पर समृद्धि ला सकता है। बैठक में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष राघवेंद्र राव, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पर्यावरण, विनीत गर्ग और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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करनाल में सबसे ज्यादा कमी
मुख्य सचिव ने बैठक में बताया कि पराली जलने की घटनाओं में करनाल 68.51% की कमी के साथ अग्रणी जिला बनकर उभरा, जो वर्ष 2021 में 956 घटनाओं से घटकर वर्ष 2022 में मात्र 301 रह गई। फरीदाबाद में 66.67 % , पानीपत में 66.54 % ,हिसार में 53.06% , फतेहाबाद में 48.14% , जींद में 44.63%, कैथल में 42.56%, कुरुक्षेत्र में 44.24% की कमी के साथ आशाजनक प्रगति दिखाई दी है।