फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   White fungus is more dangerous 

व्हाइट फंगस: हमारी त्वचा पर हमेशा मौजूद रहता है ये फंगस, मौका मिलते ही करता है अटैक

Tue, 25 May 2021 02:10 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Tue, 25 May 2021 02:10 AM IST
सार

व्हाइट फंगस हवा के कण में मौजूद रहता है। इसके कारण उसका संपर्क लगातार हमारी त्वचा से होता रहता है। उसे जैसे ही पनपने का अवसर मिलता है, वह सांस के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों में पहुंचकर वहां संक्रमण फैलाने लगता है।

विज्ञापन
White fungus is more dangerous 
व्हाइट फंगस। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

कोरोना महामारी के दौर में ब्लैक फंगस के साथ ही व्हाइट फंगस का खतरा भी बढ़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्हाइट फंगस ज्यादा खतरनाक है। यह हमारे आसपास व त्वचा पर ही मौजूद रहता है। जैसे ही पनपने का अवसर मिलता है, वह तेजी से शरीर के अंदर पहुंचकर अंगों को प्रभावित करने लगता है। खास बात यह है कि इसके लक्षण भी कोरोना जैसे ही हैं।

विज्ञापन


विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बचने के लिए नाक, मुंह को स्वच्छ रखें। मास्क के प्रयोग में बेहद सावधानी बरतें। इसके अलावा दांत और जीभ की सफाई भी कुछ घंटों के अंतराल पर करते रहें। यह फंगस नाखून, त्वचा, पेट, किडनी, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट और मुंह के साथ फेफड़ों को संक्रमित कर सकता है। 

विज्ञापन

कोरोना जैसे ही होते हैं लक्षण

नेशनल स्किन हॉस्पिटल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ विकास शर्मा का कहना है कि हालांकि इस फंगस से प्रभावित जो मरीज आ रहे हैं, जरूरी नहीं कि वे कोविड से संक्रमित हों। फेफड़े पर इसका असर होने के कारण लक्षण कोरोना से लगभग मिलते-जुलते होते हैं, जैसे सांस फूलना या कई बार सीने में दर्द। इसके अलावा कई दूसरे लक्षण भी दिखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि नाक के साथ मुंह की सफाई भी विशेष तौर पर की जाए। मास्क प्रयोग करने के बाद मुंह, दांत और जीभ को अच्छी तरह साफ करने के बाद ही कुछ खाया या पीया जाए। दूध पीने वाले बच्चों के स्तर पर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। 

डॉक्टर विकास का कहना है कि संक्रमण अगर शरीर के जोड़ों पर असर करे तो उनमें दर्द होने लगता है। दिमाग तक पहुंचा तो सोचने विचारने की क्षमता पर असर दिखता है। त्वचा में रक्त के जरिए फैलने पर छोटे-छोटे फोड़े हो सकते हैं, जिनमें आमतौर पर दर्द नहीं होता है। ये संक्रमण का शुरुआती लक्षण है।

हरगिज न करें यह गलती

जीएमएसएच 16 के ईएनटी विभाग के पूर्व प्रभारी डॉ राजेश कुमार धीर का कहना है कि फेफड़ों पर असर होने पर कोरोना जैसे लक्षण दिखने पर कई बार लोग बगैर जांच के खुद को कोरोना संक्रमित मान लेते हैं और घर पर ही दवाएं करने लगते हैं, इससे स्थिति बिगड़ जाती है। 

संक्रमण शरीर के मुख्य अंगों को अपनी चपेट में ले लेता है और मरीज के अंग फेल होने से मौत भी हो सकती है। जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है, उन्हें ये संक्रमण हो सकता है अगर वे संक्रमित वनस्पतियों या फिर दूषित पानी के संपर्क में आएं। इसके अलावा कोविड संक्रमित गंभीर मरीज, जिन्हें ऑक्सीजन चढ़ाई जा रही हो, उन्हें भी संक्रमण हो सकता है, अगर नाक या मुंह पर लगे उपकरण फंगलयुक्त हों। इसके अलावा उन लोगों में इसका खतरा ज्यादा रहता है जो डायबिटीज के मरीज हैं, या फिर लंबे समय तक स्टेरॉयड ले रहे हैं।

विज्ञापन

व्हाइट फंगस के लक्षण

  • सांस संबंधी समस्याएं 
  • सीने में भारीपन या दर्द
  • लगातार खांसी
  • सांस फूलना
  • सूजन होना
  • नाक बहना
  • लगातार तेज सिरदर्द रहना।
व्हाइट फंगस का उपचार
  • कई रिपोर्टों से पता चला है कि व्हाइट फंगस का इलाज एंटी फंगल दवा से संभव है।
  • ताजा फल खाएं।
  • घरों में रोशनी आने दें।
  • गंदी सतह को छूने के बाद हाथ-पैर जरूर धोएं।
  • फ्रिज में अधिक समय तक रखे या डिब्बा बंद चीजों का सेवन ज्यादा करने से बचें।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed