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Chandigarh News: सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में नाटक जानेमन में दिखाया किन्नरों का दर्द

Sun, 16 Feb 2025 01:34 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 16 Feb 2025 01:34 AM IST
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The pain of eunuchs shown in the play Jaaneman in Tagore Theater of Sector-18
चंडीगढ़। सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में शनिवार को नाटक जानेमन का मंचन किया गया। इसमें किन्नरों का दर्द दिखाया। इसका मंचन चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से हिमाचल थिएटर फेस्टिवल के अंतिम दिन किया गया। मछेंद्र मोरे के लिखे और कपिल देव शर्मा के निर्देशन में द बिगनर्स थिएटर ग्रुप शिमला के कलाकारों ने अभिनय किया। नाटक का संदेश है कि किन्नरों के प्रति हमारा नजरिया कब बदलेगा। किन्नर को आदर दें जैसे आमजन को देते हैं। नाटक में किन्नर के जीवन को बारे में बताया जाता है कि समाज में वे किस प्रकार जीवन यापन करते हैं।
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नाटक की शुरुआत किन्नर अखाड़े में त्योहार चल रहा है, जब किन्नर की शादी इरावन होती है। नाटक में दिखाया कि किस प्रकार नया बच्चा किन्नर अखाड़े में आता है। शुरू में अच्छा लगता है। धीरे-धीरे तकलीफें शुरू हो जाती हैं। इसमें किन्नर अखाड़े की कहानी है।
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नज्जो के अखाड़े की चेलन वैश्य का मासिक धंधा नहीं कर सकती। सात अखाड़ों में सबसे ज्यादा रोशन है मेरा अखाड़ा। चेलनों के साथ ही पूरे माहौल को आतंकित करने वाले यह दमदार संवाद नज्जो की भूमिका में कलाकार सौरभ अग्निहोत्री ने कहे।
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ईश्वर के जन्म देने के बावजूद भी इस बिरादरी को समाज से अलग रखा गया है। हम जानवरों से प्रेम करते हैं। अपने घरों में रखते हैं लेकिन अपने ही घर में मां की कोख से जन्म लिए बच्चों को दर-दर भटकने के लिए छोड़ देते हैं। इस नाटक में यही दिखाया है।
जानेमन मुंबई की एक उप नगरीय बस्ती में किन्नर नज्जो नायक अपनी चेलनों और दिल्ली से आईं अपनी सखी पन्नी के साथ रह रही हैं। नज्जो अपने उसूलों की पक्की है। वहीं, पन्नी नरम दिल की है। उसे अपनी चेलन न होने का मलाल है। सहयोग से एक शिक्षित युवक मुकेश किन्नर बनने की तमन्ना लिए बस्ती में पहुंचता है। माता के सामने कुछ समय में उसका निर्माण करके उसकी शादी एक सेठ से कर दी जाती है।


वह एक रात बिताने के बाद वापस नहीं आता। पन्नी की इस चेलन को नज्जो, दूसरी चेलन की तरह दुकान, सिग्नल पर मांगने, किन्नरों के जीने के तरीकों को सीखने के लिए बाजार में भेजने को बोलता है लेकिन पर सारी कोशिश बेकार रहती है। सताने और प्रताड़ना के बाद नगीना, नजो नायक को बुरा भला बोल देती है, जिस पर उसे दंड दिया जाता है। पन्नी यह सब सह नहीं पाती और दम तोड़ देती है। नज्जो को गहरा सदमा लगता है और अपनी सखी नगीना को जाते-जाते आशीर्वाद देती है कि जा बेटी जा इस नर्क में किसी को आने से रोक सकती है तो रोक, मत बनने दे कोई अखाड़ा। नतीजा चेलनों में बगावत और नज्जो के दर्दनाक पीड़ा पूर्वक वार्तालाप के साथ नाटक का समापन होता है।
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