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सक्रिय मरीजों की संख्या ने चिंता बढ़ाई, अस्पतालों में गैर कोविड बेड कम करने की तैयारी
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चंडीगढ़। शहर में कोरोना की मजबूत होती चेन ने संक्रमण की रफ्तार को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ इस पर काबू के लिए मानकों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दे रहे हैं लेकिन लापरवाही जारी है। मौजूदा समय में शहर में सक्रिय मरीज 491 हैं, जिनमें से 23 मरीज ऑक्सीजन पर व दो वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। सक्रिय मरीजों के साथ ही भर्ती मरीजों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग गैर कोविड बेड की संख्या कम करने की तैयारी में है ताकि संक्रमित मरीजों की संख्या और बढ़ने पर उन्हें गैर कोविड वार्ड में भर्ती किया जा सके। वहीं होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों का टीम घर पर जाकर फॉलोअप कर रही है ताकि किसी की स्थिति गंभीर न हो पाए।
स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने बताया कि संक्रमित मरीजों के लिए जीएमएसएच-16 में एक वार्ड आरक्षित रखा है। इसके अलावा अन्य वार्ड भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि आपातकाल में स्थिति अनियंत्रित न हो। साथ ही ऑक्सीजन और दवाओं की भी आपूर्ति सुनिश्चित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गैर कोविड मरीजों से लगातार अपील की जा रही है कि बहुत गंभीर स्थिति में ही अस्पताल आएं और टेली कंसल्टेशन का प्रयोग करें। इसका कारण यह है कि अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण दर नीचे आने के बाद पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में गैर कोविड मरीजों के लिए वार्ड खोल दिए गए हैं। जिन वार्डों को कोविड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया था वहां गैर कोविड मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अब स्थिति गंभीर होने के साथ ही गैर कोविड मरीजों के इलाज पर खतरा मंडराने लगा है।
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स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने बताया कि संक्रमित मरीजों के लिए जीएमएसएच-16 में एक वार्ड आरक्षित रखा है। इसके अलावा अन्य वार्ड भी तैयार किए जा रहे हैं ताकि आपातकाल में स्थिति अनियंत्रित न हो। साथ ही ऑक्सीजन और दवाओं की भी आपूर्ति सुनिश्चित की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि गैर कोविड मरीजों से लगातार अपील की जा रही है कि बहुत गंभीर स्थिति में ही अस्पताल आएं और टेली कंसल्टेशन का प्रयोग करें। इसका कारण यह है कि अस्पताल में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण दर नीचे आने के बाद पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में गैर कोविड मरीजों के लिए वार्ड खोल दिए गए हैं। जिन वार्डों को कोविड आइसोलेशन वार्ड बनाया गया था वहां गैर कोविड मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अब स्थिति गंभीर होने के साथ ही गैर कोविड मरीजों के इलाज पर खतरा मंडराने लगा है।
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