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पीयू में विभागों के मर्ज पर अभी लग जाएंगे छह माह
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के छोटे विभागों को मर्ज करने की प्रक्रिया में अभी कम से कम छह माह और लगेंगे। सीनेट व सिंडिकेट के चयन के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय हो पाएगा। इस पर निर्णय लेना आसान नहीं है, क्योंकि मामले हाईकोर्ट तक जा सकते हैं।
कई विश्वविद्यालयों में बड़े-बड़े विभाग हैं। उसी के साथ छोटे विभाग जोड़ दिए गए। उन्हीं के जरिए उनका संचालन हो रहा है। छोटे विभागों में चेयरमैन न होकर समन्वयक एक अध्यक्ष के रूप में रखे गए हैं। पीयू में भी कुछ विभागों में ऐसा किया गया, लेकिन विभागों का मर्ज नहीं हो पाया। तीन साल से इस पर पीयू काम कर रही है। कई कमेटियां बनाई गईं। पिछले साल इसका खाका भी तैयार किया गया, लेकिन विवाद उत्पन्न हो गया। पंजाब सरकार को भी इसमें दखल देना पड़ा। आखिरकार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पिछले दिनों इसको लेकर फिर बैठक हुई, लेकिन कोई बात नहीं बन सकी। सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट व सीनेट के आने के बाद ही इस पर निर्णय होगा। कम से कम छह माह बाद ही विभागों के मर्ज को लेकर निर्णय होगा। वहीं दूसरी ओर नैक के निरीक्षण की भी तिथि पास आ जाएगी। ऐसे में पीयू के लिए फिर संकट खड़ा होगा, क्योंकि नैक ने ही विभागों के मर्ज का सुझाव पीयू को दिया था।
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कई विश्वविद्यालयों में बड़े-बड़े विभाग हैं। उसी के साथ छोटे विभाग जोड़ दिए गए। उन्हीं के जरिए उनका संचालन हो रहा है। छोटे विभागों में चेयरमैन न होकर समन्वयक एक अध्यक्ष के रूप में रखे गए हैं। पीयू में भी कुछ विभागों में ऐसा किया गया, लेकिन विभागों का मर्ज नहीं हो पाया। तीन साल से इस पर पीयू काम कर रही है। कई कमेटियां बनाई गईं। पिछले साल इसका खाका भी तैयार किया गया, लेकिन विवाद उत्पन्न हो गया। पंजाब सरकार को भी इसमें दखल देना पड़ा। आखिरकार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। पिछले दिनों इसको लेकर फिर बैठक हुई, लेकिन कोई बात नहीं बन सकी। सूत्रों का कहना है कि सिंडिकेट व सीनेट के आने के बाद ही इस पर निर्णय होगा। कम से कम छह माह बाद ही विभागों के मर्ज को लेकर निर्णय होगा। वहीं दूसरी ओर नैक के निरीक्षण की भी तिथि पास आ जाएगी। ऐसे में पीयू के लिए फिर संकट खड़ा होगा, क्योंकि नैक ने ही विभागों के मर्ज का सुझाव पीयू को दिया था।
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