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देश ने पवित्र संविधान को आज तक स्वीकार नहीं किया: चंद्र शेखर
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चंडीगढ़। पीजीआई की एससी एसटी वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से बुधवार को नाइन ऑडिटोरियम में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में समारोह का आयोजन किया गया।
इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। इसके अलावा विशेष अतिथियों में पद्मश्री डॉक्टर डी बेहरा, प्रोफेसर जीआर वर्मा, प्रो. अरुण और आरपी गौतम मौजूद रहे। डॉक्टर डी बेहरा ने कहा कि इस देश के असमतावादी बड़े सिस्टम से अगर कोई लड़ा है तो वह डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और ज्योतिबा फूले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ एरिया में भेदभाव कम हुआ है लेकिन तमिलनाडु में आज भी दलित और सवर्णों के पीने के पानी के लिए ग्लास अलग-अलग रखे जाते हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि इस देश ने पवित्र संविधान को आज तक स्वीकार नहीं किया है। क्योंकि देश की मानसिकता आज भी नहीं बदली है। आज तक आरक्षण को बुरा बोला जाता है, लेकिन यह देश को नहीं बताया जाता कि 2 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में आरक्षण है। 98 प्रतिशत नौकरियां तो प्राइवेट सेक्टर में हैं, वहां तो आरक्षण नहीं है।
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उन्होंने डीयू की एक छात्रा का जिक्र किया जिसको जाति के कारण शौचालय प्रयोग करने से मना कर दिया गया। जब जाति के आधार पर अपमानित किया जाता है तो बहुत दुख होता है।
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इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे। इसके अलावा विशेष अतिथियों में पद्मश्री डॉक्टर डी बेहरा, प्रोफेसर जीआर वर्मा, प्रो. अरुण और आरपी गौतम मौजूद रहे। डॉक्टर डी बेहरा ने कहा कि इस देश के असमतावादी बड़े सिस्टम से अगर कोई लड़ा है तो वह डॉक्टर भीमराव अंबेडकर और ज्योतिबा फूले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ एरिया में भेदभाव कम हुआ है लेकिन तमिलनाडु में आज भी दलित और सवर्णों के पीने के पानी के लिए ग्लास अलग-अलग रखे जाते हैं।
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चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि इस देश ने पवित्र संविधान को आज तक स्वीकार नहीं किया है। क्योंकि देश की मानसिकता आज भी नहीं बदली है। आज तक आरक्षण को बुरा बोला जाता है, लेकिन यह देश को नहीं बताया जाता कि 2 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में आरक्षण है। 98 प्रतिशत नौकरियां तो प्राइवेट सेक्टर में हैं, वहां तो आरक्षण नहीं है।
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उन्होंने डीयू की एक छात्रा का जिक्र किया जिसको जाति के कारण शौचालय प्रयोग करने से मना कर दिया गया। जब जाति के आधार पर अपमानित किया जाता है तो बहुत दुख होता है।