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Chandigarh News: निगम की बैठक 30 को, सदन में 60 टीपीडी प्लांट पर लग सकती है मुहर
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चंडीगढ़। शहर में गार्डन वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण और राजस्व सृजन के लिए नगर निगम नया मॉडल लागू करने की तैयारी में है। 30 अप्रैल को होने वाली नगर निगम सदन की बैठक में 60 टन प्रतिदिन (टीपीडी) क्षमता का नया हार्टिकल्चर वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार प्लांट की स्थापना, संचालन और रखरखाव का कार्य पलक एग्रो इंडस्ट्री को सौंपा जाएगा जो बदले में नगर निगम को प्रति मीट्रिक टन कचरे पर रॉयल्टी देगी।
तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने के बाद बातचीत के दौरान कंपनी ने अपनी शुरुआती 10 रुपये प्रति टन की पेशकश बढ़ाकर 92.50 रुपये प्रति मीट्रिक टन रॉयल्टी देने पर सहमति जताई है। यह परियोजना पूरी तरह रॉयल्टी आधारित होगी जिसमें एजेंसी नगर निगम को भुगतान करेगी। अनुबंध सात वर्षों के लिए होगा जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही रॉयल्टी राशि में हर वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी रहेगा।
प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि चयनित एजेंसी को नए 60 टीपीडी प्लांट के साथ मौजूदा 30 टीपीडी प्लांट का संचालन और रखरखाव भी संभालना होगा। रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के अनुसार लेटर ऑफ अवार्ड जारी होने के चार महीने के भीतर प्लांट स्थापित करना अनिवार्य होगा जबकि एक महीने का ट्रायल रन भी किया जाएगा। बिजली, पानी, सीवर कनेक्शन और अन्य सभी जरूरी मंजूरियां एजेंसी को अपने खर्च पर लेनी होंगी। इस परियोजना के लिए चार बार प्रयास किए गए, जिसके बाद पंजाब के संगरूर की पलक एग्रो एजेंसी तकनीकी रूप से योग्य पाई गई। इससे पहले कम प्रतिस्पर्धा और पात्रता के अभाव में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। बैठक में रायपुर कलां गोशाला में शेड निर्माण और पशु शव निस्तारण केंद्र में इलेक्ट्रिक सेनेटरी वेस्ट इनसिनिरेटर लगाने के लिए 1.46 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। गौरतलब है कि पहले 30 टीपीडी प्लांट के संचालन के लिए नगर निगम को एजेंसी को भुगतान करना पड़ता था लेकिन नए मॉडल में एजेंसी निगम को रॉयल्टी देगी। इससे निगम को वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।
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तकनीकी रूप से योग्य पाए जाने के बाद बातचीत के दौरान कंपनी ने अपनी शुरुआती 10 रुपये प्रति टन की पेशकश बढ़ाकर 92.50 रुपये प्रति मीट्रिक टन रॉयल्टी देने पर सहमति जताई है। यह परियोजना पूरी तरह रॉयल्टी आधारित होगी जिसमें एजेंसी नगर निगम को भुगतान करेगी। अनुबंध सात वर्षों के लिए होगा जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा। साथ ही रॉयल्टी राशि में हर वर्ष पांच प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान भी रहेगा।
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प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि चयनित एजेंसी को नए 60 टीपीडी प्लांट के साथ मौजूदा 30 टीपीडी प्लांट का संचालन और रखरखाव भी संभालना होगा। रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) के अनुसार लेटर ऑफ अवार्ड जारी होने के चार महीने के भीतर प्लांट स्थापित करना अनिवार्य होगा जबकि एक महीने का ट्रायल रन भी किया जाएगा। बिजली, पानी, सीवर कनेक्शन और अन्य सभी जरूरी मंजूरियां एजेंसी को अपने खर्च पर लेनी होंगी। इस परियोजना के लिए चार बार प्रयास किए गए, जिसके बाद पंजाब के संगरूर की पलक एग्रो एजेंसी तकनीकी रूप से योग्य पाई गई। इससे पहले कम प्रतिस्पर्धा और पात्रता के अभाव में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई थी। बैठक में रायपुर कलां गोशाला में शेड निर्माण और पशु शव निस्तारण केंद्र में इलेक्ट्रिक सेनेटरी वेस्ट इनसिनिरेटर लगाने के लिए 1.46 करोड़ रुपये के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। गौरतलब है कि पहले 30 टीपीडी प्लांट के संचालन के लिए नगर निगम को एजेंसी को भुगतान करना पड़ता था लेकिन नए मॉडल में एजेंसी निगम को रॉयल्टी देगी। इससे निगम को वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है।
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