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Chandigarh News: सीनियर एडवोकेट नियुक्ति पर सराहना पत्र जारी करने पर नहीं थम रहा विवाद

Mon, 27 Oct 2025 09:00 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Oct 2025 09:00 PM IST
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The controversy over issuing a letter of appreciation for the appointment of a senior advocate continues.
-बार काउंसिल ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव से मांगा स्पष्टीकरण
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव गगनदीप जम्मू से उस सराहना पत्र पर स्पष्टीकरण मांगा है जो हाल ही में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू को सीनियर एडवोकेट्स की नियुक्ति को लेकर जारी किया गया था। बार काउंसिल का कहना है कि यह पत्र सचिव ने व्यक्तिगत क्षमता में जारी किया। कार्यकारिणी समिति की बैठक भी नहीं बुलाई गई और स्वीकृति भी नहीं ली गई।
20 अक्तूबर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 76 वकीलों को सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया था जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल हैं। वर्ष 2024 में कुल 210 अधिवक्ताओं ने इस पद के लिए आवेदन किया था। इसके बाद 24 अक्टूबर को गगनदीप जम्मू ने बार की ओर से एक सराहना पत्र जारी करते हुए कहा था कि यह निर्णय फुल कोर्ट की सामूहिक बुद्धिमत्ता और मुख्य न्यायाधीश शील नागू की योग्यता, प्रतिभा और व्यावसायिक उत्कृष्टता को पहचानने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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इससे पहले 23 अक्टूबर को बार काउंसिल ने हाईकोर्ट से यह जानकारी मांगी थी कि सीनियर एडवोकेट्स की नामांकन प्रक्रिया में क्या तरीका अपनाया गया, क्योंकि इस प्रक्रिया को लेकर पक्षपात और पारदर्शिता की कमी की शिकायतें मिली थीं। बार काउंसिल ने गगनदीप जम्मू को लिखे पत्र में कहा कि उसे पंजाब और हरियाणा की 148 बार एसोसिएशनों से प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है जिनमें इस प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रक्रियागत पहलुओं पर भिन्न-भिन्न मत व्यक्त किए गए हैं। ऐसे में सचिव की ओर से जारी सराहना पत्र कानूनी बिरादरी के सामूहिक रुख की गलत व्याख्या या भ्रम उत्पन्न कर सकता है। बार काउंसिल ने गगनदीप जम्मू से 7 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा है कि उन्होंने यह पत्र गवर्निंग बॉडी की स्वीकृति के बिना क्यों जारी किया इस पूरे घटनाक्रम ने अब पंजाब-हरियाणा के विधिक समुदाय में नए विवाद को जन्म दे दिया है खासकर तब जब सीनियर एडवोकेट्स की नियुक्ति प्रक्रिया पर पहले से ही पारदर्शिता के सवाल उठ रहे हैं।
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