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मिलावट रोकने की केंद्र सरकार की नीयत नहीं या फिर कानून में रोकने की शक्ति नहीं : हाईकोर्ट

Thu, 17 Oct 2024 06:11 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2024 06:11 AM IST
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The central government does not have the intention to stop adulteration or the law does not have the power to stop it: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरसों के तेल में मिलावट पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि या तो सरकार की मिलावट रोकने की नीयत नहीं है या फिर कानून में इसे रोकने की शक्ति नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को तीन अलग-अलग लोकप्रिय ब्रांड का एक लीटर सरसों तेल खरीदने और उसे अमृतसर की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजने का निर्देश दिया है।
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इस मामले में याचिका दाखिल कर कपूरथला के राजेश गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता बनाए रखने और नागरिकों के स्वास्थ्य को देखते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 लागू किया था। इसके तहत प्रावधान है कि खाद्य पदार्थों में किसी प्रकार की मिलावट न हो। याची ने पंजाब में बिकने वाले सरसों के तेल के कई ब्रांड की बोतलें रखीं, जिनमें कच्ची घनी मस्टर्ड ऑयल लिखा था। साथ ही पीछे की ओर बहुत छोटे शब्दों में लिखा था कि मस्टर्ड ऑयल 30 प्रतिशत और इसके साथ ही अन्य तेलों के मिलावट की बात भी लिखी गई थी।
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याची ने कहा कि कंपनियां बोतलों पर शुद्ध सरसों का तेल लिखती हैं और अंदर अन्य तेलों की मिलावट वाला तरल बेचा जाता है। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि जिन तेलों को मिलावट के लिए इस्तेमाल किया जाता है वे कई केमिकल प्रोसेस से होकर गुजरते हैं और ऐसे में वे शरीर के लिए जहर के समान होते हैं।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि सरसों के तेल की गलत ब्रांडिंग, मिलावट या मिलावट करने वाले दोषियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं दिखाई दी है। ऐसा प्रतीत होता है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार गंभीर नहीं हैं या संबंधित कानून में पर्याप्त शक्ति नहीं है। प्रतिबंधित होने के बावजूद सरसों के तेल को अन्य तेलों जैसे रिफाइंड चावल की भूसी के तेल के साथ मिलाने के संबंध में बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। ऐसे में पंजाब, हरियाणा या चंडीगढ़ में स्थित किसी भी केंद्रीय प्रयोगशाला से कम से कम तीन विभिन्न लोकप्रिय ब्रांडों के सरसों तेल का परीक्षण करना उचित होगा। परीक्षण 15 दिन की अवधि के भीतर किया जाना चाहिए। इसके बाद इस बारे में सीलबंद रिपोर्ट सौंपी जाए। इससे पता लगाया जा सकेगा कि तेल की मिलावट है अथवा नहीं। यदि है तो उसका प्रतिशत कितना है। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल को तीन विभिन्न लोकप्रिय ब्रांडों का एक लीटर सरसों तेल खरीदने और प्रत्येक ब्रांड का 500 मिलीलीटर परीक्षण के लिए अमृतसर की एगमार्क प्रयोगशाला भेजने का निर्देश दिया।
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