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इराक आया युवक का शव, पैतृक गांव में संस्कार
अमर उजाला/ ब्यूरो, कुरुक्षेत्र
Updated Sat, 13 Sep 2014 12:32 AM IST
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इस्माईलाबाद। लगभग दो महीने पहले इराक में मारे गए गांव झांसा के युवक सुरेश कुमार के शव का अतिंम संस्कार शुक्रवार कर दिया गया।
गांव वासियों के अलावा प्रशासन की तरफ से नायब तहसीलदार हरबंस लाल शर्मा भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शर्मा ने बताया कि इस दुख की घड़ी में हम परिवार के साथ खड़े व परिवार की मदद के लिए आला अधिकारियों को लिखित में भेजा गया है जिसके बाद उन्हें सरकारी सहायता दी जाएगी।
चचेरे भाई मंगू पाल ने बताया सुरेश का शव इराक से वीरवार आधी रात दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा था। पाल ने बताया कि लगभग 15 महीने पहले सुरेश अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये काम की तलाश में इराक गया था।
जहां वह एक कपंनी में काम कर रहा था। गत 21 जुलाई को परिवारिक सदस्यों को फोन के जरिये सुरेश की मौत की सूचना मिली थी, जिसके बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।
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बीमार होने की बात कही थी मां व पत्नी को
पिछले दो महीनों से उसकी पत्नी व मां सुरेश के बीमार होने की बात कही जा रही थी। बताया गया है कि सुरेश से दो माह से उसकी मां और पत्नी से बात नहीं होने पर उन्हें कहा था वह अभी बीमार है, जिसके कारण उससे बातचीत नहीं हो सकती। लेकिन शनिवार को जैसे ही उसका शव गांव पहुंचा। परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। यह देख सभी की आंखें नम हो गई।
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गांव वासियों के अलावा प्रशासन की तरफ से नायब तहसीलदार हरबंस लाल शर्मा भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। शर्मा ने बताया कि इस दुख की घड़ी में हम परिवार के साथ खड़े व परिवार की मदद के लिए आला अधिकारियों को लिखित में भेजा गया है जिसके बाद उन्हें सरकारी सहायता दी जाएगी।
चचेरे भाई मंगू पाल ने बताया सुरेश का शव इराक से वीरवार आधी रात दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचा था। पाल ने बताया कि लगभग 15 महीने पहले सुरेश अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिये काम की तलाश में इराक गया था।
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जहां वह एक कपंनी में काम कर रहा था। गत 21 जुलाई को परिवारिक सदस्यों को फोन के जरिये सुरेश की मौत की सूचना मिली थी, जिसके बाद परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा।
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बीमार होने की बात कही थी मां व पत्नी को
पिछले दो महीनों से उसकी पत्नी व मां सुरेश के बीमार होने की बात कही जा रही थी। बताया गया है कि सुरेश से दो माह से उसकी मां और पत्नी से बात नहीं होने पर उन्हें कहा था वह अभी बीमार है, जिसके कारण उससे बातचीत नहीं हो सकती। लेकिन शनिवार को जैसे ही उसका शव गांव पहुंचा। परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। यह देख सभी की आंखें नम हो गई।