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Chandigarh News: नाना की वो याद... तीन महिलाओं से सीखते थे पंजाबी संवाद का लहजा
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एक-द पावर ऑफ वन की शूटिंग के दौरान चंडीगढ़ में किरदार को असली रंग देने के लिए पंजाबी उच्चारण और अदायगी पर की थी खास
चंडीगढ़। अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने चंडीगढ़ और पंजाब से जुड़े उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नाना का चंडीगढ़ और पंजाब से भी खास रिश्ता रहा। फिल्म ‘एक-द पावर ऑफ वन’ की शूटिंग के दौरान वह चंडीगढ़ और पंजाब में रहे। फिल्म में उन्हें सीबीआई अधिकारी की भूमिका निभानी थी और कहानी के कई हिस्से पंजाब की पृष्ठभूमि में थे।
किरदार को वास्तविक बनाने के लिए नाना ने पंजाबी बोलने की बारीकियां सीखीं। शूटिंग के दौरान उन्होंने आसपास मौजूद तीन पंजाबी महिलाओं से संवादों की पंजाबी अदायगी समझी। वह अपने संवाद उनके सामने बोलते और उच्चारण व लहजे को दुरुस्त करते। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता होने के बावजूद नाना का यह अंदाज बताता था कि वह सीखने में कभी संकोच नहीं करते थे।
पंजाबियों से था खास लगाव
चंडीगढ़ में शूटिंग के दौरान नाना ने पंजाबी भाषा और यहां के लोगों के व्यवहार को करीब से समझा। वह स्थानीय लोगों से बातचीत करते और उनके अंदाज को अपने किरदार में उतारने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया था कि उनके पिता के टेक्सटाइल प्रिंटिंग कारोबार के कारण पंजाबी लोगों से उनका लगातार संपर्क रहा था।
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हरिमंदिर साहिब में सेवा ने जीता था दिल
पंजाब से नाना का भावनात्मक रिश्ता अमृतसर से भी रहा। जनवरी 2018 में वह पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे थे। उन्होंने माथा टेका, परिक्रमा की और बर्तनों की सेवा भी की। करोड़ों प्रशंसकों के चहेते अभिनेता होने के बावजूद उनका आम श्रद्धालु की तरह सेवा करना उनकी सादगी की याद छोड़ गया।
नाना जैसा कलाकार और इंसान मैंने नहीं देखा
नाना से मिलना मेरे लिए हमेशा यादगार रहा। वह सिर्फ अभिनय नहीं करते थे, बल्कि किरदार को अपने भीतर उतार लेते थे। उन्होंने मुझे अभिनय का ऐसा मंत्र दिया, जिसे मैं आज भी याद रखता हूं। -दर्शन औलख, कलाकार व चंडीगढ़ के लाइन प्रोड्यूसर
नाना की फिल्मों से ही नहीं, उनके व्यक्तित्व से सीखा
नाना की फिल्मों और उनकी अभिनय शैली ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उनसे सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि एक कलाकार होने का अर्थ भी सीखा जा सकता है। - मुकेश शर्मा, चंडीगढ़ के कलाकार
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चंडीगढ़। अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने चंडीगढ़ और पंजाब से जुड़े उनके प्रशंसकों को भी भावुक कर दिया। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले नाना का चंडीगढ़ और पंजाब से भी खास रिश्ता रहा। फिल्म ‘एक-द पावर ऑफ वन’ की शूटिंग के दौरान वह चंडीगढ़ और पंजाब में रहे। फिल्म में उन्हें सीबीआई अधिकारी की भूमिका निभानी थी और कहानी के कई हिस्से पंजाब की पृष्ठभूमि में थे।
किरदार को वास्तविक बनाने के लिए नाना ने पंजाबी बोलने की बारीकियां सीखीं। शूटिंग के दौरान उन्होंने आसपास मौजूद तीन पंजाबी महिलाओं से संवादों की पंजाबी अदायगी समझी। वह अपने संवाद उनके सामने बोलते और उच्चारण व लहजे को दुरुस्त करते। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता होने के बावजूद नाना का यह अंदाज बताता था कि वह सीखने में कभी संकोच नहीं करते थे।
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पंजाबियों से था खास लगाव
चंडीगढ़ में शूटिंग के दौरान नाना ने पंजाबी भाषा और यहां के लोगों के व्यवहार को करीब से समझा। वह स्थानीय लोगों से बातचीत करते और उनके अंदाज को अपने किरदार में उतारने की कोशिश करते थे। उन्होंने बताया था कि उनके पिता के टेक्सटाइल प्रिंटिंग कारोबार के कारण पंजाबी लोगों से उनका लगातार संपर्क रहा था।
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हरिमंदिर साहिब में सेवा ने जीता था दिल
पंजाब से नाना का भावनात्मक रिश्ता अमृतसर से भी रहा। जनवरी 2018 में वह पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ श्री हरिमंदिर साहिब पहुंचे थे। उन्होंने माथा टेका, परिक्रमा की और बर्तनों की सेवा भी की। करोड़ों प्रशंसकों के चहेते अभिनेता होने के बावजूद उनका आम श्रद्धालु की तरह सेवा करना उनकी सादगी की याद छोड़ गया।
नाना जैसा कलाकार और इंसान मैंने नहीं देखा
नाना से मिलना मेरे लिए हमेशा यादगार रहा। वह सिर्फ अभिनय नहीं करते थे, बल्कि किरदार को अपने भीतर उतार लेते थे। उन्होंने मुझे अभिनय का ऐसा मंत्र दिया, जिसे मैं आज भी याद रखता हूं। -दर्शन औलख, कलाकार व चंडीगढ़ के लाइन प्रोड्यूसर
नाना की फिल्मों से ही नहीं, उनके व्यक्तित्व से सीखा
नाना की फिल्मों और उनकी अभिनय शैली ने मुझे बहुत प्रभावित किया। उनसे सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि एक कलाकार होने का अर्थ भी सीखा जा सकता है। - मुकेश शर्मा, चंडीगढ़ के कलाकार